
दिल्ली में एक हैरान कर देने वाली घटना में, एक 74 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी को फर्जी एनआईए अधिकारियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उनसे 30 लाख रुपये ठग लिए। यह घटना पिछले सप्ताह हुई, जब ठगों ने दंपति को लाल किला विस्फोट मामले में फंसाने की धमकी दी।
पुलिस के अनुसार, ठगों ने दंपति को बताया कि उनका नाम लाल किला विस्फोट मामले में शामिल हैं और उन्हें तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की आवश्यकता है। इस डर से कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, दंपति ने ठगों के कहने पर पैसे ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने खुद को एनआईए और एटीएस के अधिकारी बताकर दंपति को विश्वास दिलाया कि वे उनकी मदद कर रहे हैं।
दंपति को सात दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया, जिसमें उन्हें अपने बैंक खातों और अन्य वित्तीय जानकारी को ठगों के साथ साझा करने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान, ठगों ने उन्हें लगातार धमकाया और कहा कि यदि वे पैसे नहीं देते हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जो हरियाणा का निवासी है। पुलिस ने आरोपी के पास से 12 लाख रुपये भी बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का एक उदाहरण है, जिसमें ठग आतंकवादी जांचों का सहारा लेकर लोगों को ठगते हैं।
यह घटना साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को दर्शाती है, जहां ठग विभिन्न तरीकों से लोगों को धोखा दे रहे हैं। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश का जवाब न देने की सलाह दी है।
इस मामले ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि कैसे ठग लोग आतंकवादी गतिविधियों का सहारा लेकर आम नागरिकों को डराकर पैसे ठगने में सफल हो रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि वे इस तरह के मामलों की जांच कर रहे हैं और ठगों को पकड़ने के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे।
सबसे पहले, राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट से संबंधित शिकायतों की संख्या 2022 में लगभग 39,925 थी, जो 2023 में बढ़कर 60,676 हो गई। 2024 में यह संख्या और तेजी से बढ़कर 1,23,672 हो गई।
लेकिन 2025 में यह प्रवृत्ति उलट गई। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में मामले घटकर लगभग 17,264 रह गए। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में भी यह गिरावट स्पष्ट रूप से दिखाई देती है: 2024 में 1,23,672 मामले, 2025 में 58,249, और 30 जून 2026 तक केवल 16,377 मामले दर्ज हुए।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड की संख्या 2024 में चरम पर थी, लेकिन जागरूकता और कार्रवाई के चलते 2025 और 2026 में इसमें कमी आई है।
वित्तीय नुकसान की बात करें तो, 2022 में इस फ्रॉड से लगभग ₹91 करोड़ का नुकसान हुआ। यह राशि 2023 में बढ़कर ₹339 करोड़ और 2024 में ₹1,918 करोड़ तक पहुंच गई। 2025 में यह नुकसान घटकर ₹644 करोड़ रह गया।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड ने 2024 में सबसे अधिक प्रभाव डाला, लेकिन उसके बाद स्थिति में सुधार हुआ।
इन मामलों की जांच और रोकथाम में न्यायपालिका और सरकार भी सक्रिय रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने RBI को म्यूल अकाउंट्स (फर्जी मध्यस्थ खाते) के लिए SOP तैयार करने का निर्देश दिया है। साथ ही, e‑Zero FIR प्रणाली 19 राज्यों में लागू की गई है, जिससे पीड़ितों की शिकायतें तुरंत दर्ज की जा सकें।
CBI ने भी डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में कार्रवाई की है। एक बड़े अभियान में चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो 200 से अधिक ठगी की घटनाओं से जुड़े थे।
सरकारी पोर्टलों और हेल्पलाइन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। I4C के तहत संचालित CFCFRMS पोर्टल और NCRP के माध्यम से अब तक लाखों शिकायतें दर्ज की गई हैं, और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को रोका गया है।