
शहर हो या गांव, पीने वाले पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना अब जरूरत बन गया है। हाल ही में सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं, जिससे नागरिकों को अपने शहर के पानी की गुणवत्ता समझने और उस पर कार्रवाई करने का मौका मिला है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, जागरूकता और सतर्कता से पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर, जल जीवन मिशन के तहत 'वाटर क्वालिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' (WQMIS) पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर ग्रामीण क्षेत्रों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसमें लैब और फील्ड टेस्ट किट (FTK) दोनों से लिए गए नमूने शामिल हैं। 2025–26 में लगभग 24.89 लाख नमूने लैब में और 21.92 लाख नमूने FTK से जांचे गए हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को अपने पानी की गुणवत्ता की जानकारी मिलती है और वे जागरूक हो सकते हैं।
शहरी स्तर पर भी कदम उठाए गए हैं। AMRUT 2.0 योजना के तहत 'AMRUT मित्र' कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह (SHGs) और महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांच में शामिल किया जा रहा है। उन्हें फील्ड टेस्ट किट से घर-घर पानी की जांच करने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर निगरानी और जवाबदेही बढ़ती है।
इसके साथ ही, AMRUT की वेबसाइट पर कई शहरों के जल बोर्डों और नगर निगमों द्वारा पानी की गुणवत्ता की दैनिक रिपोर्टें उपलब्ध हैं। जैसे- दिल्ली जल बोर्ड, बेंगलुरु जल बोर्ड, हैदराबाद, पश्चिम बंगाल आदि। इससे शहरी नागरिक सीधे अपने शहर के पानी की ताजा स्थिति जान सकते हैं।
पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल 'Water Quality Assessment Dashboard' है। इसमें जनवरी–दिसंबर 2024 के आंकड़े दिखाए गए हैं। इस पहल से राजस्थान में शहरी आबादी का 99.03% हिस्सा कवर हुआ, कुल 69,443 घरेलू नमूने लिए गए, जिनमें से 66,696 पास हुए। यह डेटा नागरिकों को यह समझने में मदद करता है कि उनके शहर का पानी कितना सुरक्षित है।
इन पहलों से नागरिकों को पानी की गुणवत्ता की जानकारी मिलती है, लेकिन असली असर तब होगा जब वे सक्रिय हों। स्थानीय स्तर पर नागरिकों को पानी की जांच रिपोर्ट देखना चाहिए, पानी की गुणवत्ता में कोई समस्या हो तो संबंधित विभाग में इसकी जानकारी दें और समुदाय में जागरूकता फैलाएं।