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बच्चों के खेल-कूद और समाज की सेहत पर मंडरा रहा खतरा, मानकों से कोसों दूर हैं महानगर

क्या आपके शहर या कस्बे में कोई खुला मैदान है, जहां बच्चे खेल-कूद सकें? अगर आपके आसपास खेल-कूद के लिए कोई जगह नहीं है तो स्थानीय नगर निगम या विकास प्राधिकरण को लिखकर इसकी मांग कर सकते हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 23, 2026

sports grounds

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

शहरों में हरियाली और खुली जगहों की कमी केवल सौंदर्य की समस्या नहीं है। यह हमारे बच्चों की खेल-कूद, युवाओं की फिटनेस और पूरे समाज की सेहत से जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है। जब शहरों में खेल के लिए स्थान कम होते हैं, तो खेल संस्कृति और सामुदायिक जीवन दोनों प्रभावित होते हैं।

बेंगलुरु में सार्वजनिक मैदानों की कमी

बेंगलुरु के कई पुराने और नए इलाकों में सार्वजनिक खेल मैदान धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। वर्थूर, इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी, महादेवपुरा और केआर पुरम जैसे नए क्षेत्रों में मुफ्त खेलने के मैदान लगभग समाप्त हो चुके हैं। वहीं, ऑस्टिन टाउन के नंदन ग्राउंड को टर्फ स्टेडियम में बदलने की दिसंबर 2025 की योजना ने स्थानीय युवाओं में भारी विरोध उत्पन्न कर दिया है।

मुंबई में खुली जगहों की असमानता

मुंबई में औसतन प्रति व्यक्ति केवल 1.28 वर्ग मीटर खुली जगह उपलब्ध है, जबकि विकास योजना (DP 2034) का लक्ष्य 4 वर्ग मीटर है। कई वार्डों में यह आंकड़ा और भी कम है। A वार्ड में 9.4 वर्ग मीटर है, जबकि B वार्ड में मात्र 0.5 वर्ग मीटर। इसके अलावा, 2021 में WRI इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में सुलभ खुली जगह केवल 1.08 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति है, जो URDPFI मानक (10–12 वर्ग मीटर) से बहुत कम है।

नागपुर में न्यायालय का हस्तक्षेप

नागपुर में एक कॉलोनी में बच्चों के खेलने के लिए कोई निर्धारित मैदान नहीं होने की शिकायत पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का आदेश दिया। अदालत ने स्थानीय अधिकारियों से तीन सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

कोलार शहर का अध्ययन

कोलार में प्रति व्यक्ति पार्क और खेल मैदान का क्षेत्रफल केवल 0.4 वर्ग मीटर है, जबकि राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के अनुसार न्यूनतम मानक 3 वर्ग मीटर है। इसके अलावा, उपलब्ध सुविधाओं की गुणवत्ता भी खराब से मध्यम स्तर की है, और शहर के बाहरी इलाकों में ये सुविधाएं और भी कम हैं।

कोलकाता में पार्कों की स्थिति

कोलकाता के पार्कों में लगभग 41 प्रतिशत में खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं, और केवल 19.66 प्रतिशत पार्कों में ही अच्छी तरह से बनाए गए खेल मैदान हैं। ये बेहतर रखरखाव वाले मैदान शहर के मध्य और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में केंद्रित हैं।

शहरी नियोजन और स्वास्थ्य पर असर

UN-Habitat के अनुसार, शहरी भूमि का 15–20 प्रतिशत हिस्सा खुली और सार्वजनिक जगहों के लिए होना चाहिए। URDPFI दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रति व्यक्ति 10–12 वर्ग मीटर खुली जगह होनी चाहिए। लेकिन अधिकांश भारतीय शहर इन मानकों से बहुत पीछे हैं।

शहरी लोगों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। खेल और खुली जगहें केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव और बच्चों के विकास के लिए भी आवश्यक हैं। जब शहरों में ये स्थान कम होते हैं, तो खेल-कूद, फिटनेस और सामुदायिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है।