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यूपी में सितंबर का बिजली बिल 7.93% सस्ता, 604 करोड़ की राहत; क्या राजस्थान में भी मिलेगा इसका फायदा?

FPPAS Relief:उत्तर प्रदेश में बिजली खरीद लागत कम होने से सितंबर के बिलों में 7.93% निगेटिव FPPAS लागू हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं को 604 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। वहीं राजस्थान में भी विनियामक नियमों के तहत फ्यूल सरचार्ज समायोजन का प्रावधान है, जिसकी वजह से राज्य के उपभोक्ताओं को भी ऐसे लाभ की उम्मीद है।
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Aug 27, 2026
Electricity Bill News
उत्तर प्रदेश में निगेटिव FPPAS से उपभोक्ताओं को 604 करोड़ रुपये की बचत, राजस्थान में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होने पर चर्चा तेज। ( फोटो: AI)

उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने सितंबर 2026 के बिलों में 7.93 फीसदी निगेटिव फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) लागू करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से प्रदेश भर के उपभोक्ताओं को लगभग 604 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय राहत मिलेगी। यूपी में दरें घटने के बाद अब पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वहां के उपभोक्ताओं को भी इसी तरह का लाभ मिल सकता है।

यूपी में सितंबर में क्यों घट रहा है बिजली बिल?

बिजली बिल में यह कमी कोई तदर्थ छूट नहीं, बल्कि नियामक व्यवस्था (Regulatory Framework) का हिस्सा है।

बिजली खरीद लागत में कमी: जून 2026 के दौरान डिस्कॉम द्वारा की गई बिजली खरीद और ट्रांसमिशन लागत अनुमानित बजट से काफी कम रही।

निगेटिव FPPAS का गणित: विद्युत विनियामक आयोग के नियमानुसार, यदि बिजली खरीद लागत तय बेस रेट से कम आती है, तो डिस्कॉम को 'निगेटिव सरचार्ज' लागू करके बची हुई राशि का लाभ सीधे उपभोक्ताओं के बिलों में क्रेडिट करना होता है।

सीधा फायदा: 7.93% की इस कटौती से घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक—सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं का सितंबर महीने का कुल बिल कम आएगा।

क्या है FPPAS और यह कैसे काम करता है?

FPPAS (Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge): बिजली कंपनियों द्वारा ईंधन (जैसे कोयला, गैस) और पावर एक्सचेंज से खरीदी जाने वाली बिजली की वास्तविक लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव को समायोजित करने की एक मासिक प्रक्रिया है।

पॉजिटिव FPPAS: जब कोयला महंगा होता है या पीक ऑवर में महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है, तो सरचार्ज जुड़कर बिल बढ़ जाता है।

निगेटिव FPPAS: जब रिन्यूएबल एनर्जी (सौर/पवन) की उपलब्धता बढ़ती है या बाजार में बिजली सस्ती मिलती है, तो सरचार्ज माइनस (-) हो जाता है और बिल घट जाता है।

क्या यूपी की तरह राजस्थान में भी लागू होगा FPPAS? जानिए क्या है स्थिति

राजस्थान के बिजली उपभोक्ताओं के मन में भी यह सवाल है कि क्या उन्हें भी इस तरह बिल में राहत मिलेगी।

  1. राजस्थान में पहले से लागू है फ्यूल सरचार्ज मैकेनिज्मराजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के नियमों के तहत राजस्थान के तीनों डिस्कॉम (जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम) में भी फ्यूल सरचार्ज लागू होता है। हालांकि, राजस्थान में इसे मुख्य रूप से त्रैमासिक (Quarterly) या मासिक फ्यूल सरचार्ज के रूप में तय किया जाता है।
  2. निगेटिव सरचार्ज की संभावना कब बनती है?राजस्थान सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। यदि राज्य डिस्कॉम पीक सीजन में रिन्यूएबल एनर्जी और सस्ती दरों पर उपलब्ध पावर का अधिकतम उपयोग करते हैं और ओवरऑल खरीद लागत बेस रेट से कम रहती है, तो RERC के प्रावधानों के अनुसार यहां भी उपभोक्ताओं को निगेटिव सरचार्ज (बिल में छूट) का लाभ दिया जा सकता है।
  3. वर्तमान चुनौतीराजस्थान में थर्मल पावर प्लांट्स में इस्तेमाल होने वाले कोयले की ढुलाई लागत और पिछले वित्तीय घाटे के कारण अक्सर फ्यूल सरचार्ज पॉजिटिव (अतिरिक्त शुल्क) के रूप में जुड़ता रहा है। हालांकि, यदि जून-जुलाई की पावर परचेज ऑडिट में लागत कम पाई जाती है, तो डिस्कॉम को विनियामक नियमों के तहत दरों में समायोजन करना ही होगा।

उत्तर प्रदेश द्वारा लागू किया गया 7.93% निगेटिव FPPAS यह साबित करता है कि पारदर्शी पावर परचेज मैनेजमेंट का सीधा फायदा आम उपभोक्ता को मिल सकता है। यदि राजस्थान डिस्कॉम भी इसी वित्तीय अनुशासन और सस्ती ऊर्जा खरीद के मॉडल पर काम करते हैं, तो राजस्थान के उपभोक्ताओं को भी आने वाले समय में अपने बिजली बिलों में इसी तरह की राहत देखने को मिल सकती है।

राजस्थान में फ्यूल सरचार्ज की गणना का पूरा गणित

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा जून 2026 में बिजली खरीद और ट्रांसमिशन लागत कम रहने के चलते सितंबर के बिलों में 7.93 फीसदी निगेटिव FPPAS लागू किया गया है, जिससे प्रदेश के उपभोक्ताओं को करीब 604 करोड़ रुपये की सीधी राहत मिलेगी; वहीं राजस्थान की बात करें तो वहां भी राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के तहत फ्यूल सरचार्ज समायोजन का नियम लागू है, जिसके तहत यदि राज्य की डिस्कॉम कंपनियां सौर और सस्ती ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन से अपनी खरीद लागत बेस रेट से कम रखने में सफल रहती हैं, तो नियमानुसार राजस्थान के उपभोक्ताओं को भी यूपी की तर्ज पर बिजली बिलों में निगेटिव सरचार्ज यानी छूट का सीधा लाभ मिल सकता है।

Updated on:
27 Aug 2026 09:46 pm
Published on:
27 Aug 2026 09:46 pm