
उत्तर प्रदेश में पर्यटन की समृद्ध और ऑफबीट विरासत। (फोटो: AI)
उत्तर प्रदेश के अनदेखे और बजट-अनुकूल पर्यटन स्थलों की सैर करें। ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों और शांत जलप्रपातों के साथ अपनी छुट्टियों को बनाएं बेहद ख़ास।
उत्तर प्रदेश के 10 अनदेखे पर्यटन स्थल, जहां बजट में होगा वीकेंड का पूरा आनंद। प्रदेश में बजट-अनुकूल यात्रा करना अब और भी सुगम और रोमांचक हो गया है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग (UP Tourism) तथा राज्य सरकार की ओर से पर्यटन विकास व बुनियादी ढांचे के विस्तार पर दिए जा रहे विशेष बल से प्रदेश के ऑफबीट और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच आसान हुई है। आइए जानें, कौन-से ऐसे स्थल हैं जो आपके वीकेंड, सोलो ट्रिप या पारिवारिक भ्रमण के लिए बेहतरीन और किफायती विकल्प हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना' के साथ-साथ नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद, मां विंध्यवासिनी धाम (मिर्ज़ापुर), काशी (वाराणसी) और अयोध्या के समग्र विकास के लिए निरंतर बजट आवंटन किया जा रहा है। इन विकास कार्यों का सीधा लाभ प्रमुख तीर्थस्थलों के साथ-साथ उनके आसपास स्थित कम-ज्ञात और अनदेखे ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थलों को भी मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश में कई ऐसे स्थल हैं जो मुख्यधारा के पर्यटन मार्गों से थोड़े अलग हैं, किंतु अपने इतिहास, स्थापत्य और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए अद्वितीय हैं:
कालिंजर दुर्ग (बांदा): विंध्य पर्वतमाला पर स्थित यह अभेद्य ऐतिहासिक किला अपने नीलकंठ महादेव मंदिर और उत्कृष्ट शैल-उत्कीर्ण कलाकृतियों के लिए विख्यात है।
महोबा (बुंदेलखंड): चंदेल शासकों की ऐतिहासिक भूमि, जहाँ 9वीं सदी के सूर्य मंदिर (रहिला सागर), विजय सागर पक्षी विहार और शिव तांडव प्रतिमा दर्शनीय हैं।
सोनभद्र (प्राकृतिक व भूगर्भीय धरोहर): विजयगढ़ किला, दुनिया के प्राचीनतम जीवाश्मों में शामिल सलखन फॉसिल पार्क, लखनिया दरी, मुक्खा जलप्रपात और रेणुकेश्वर महादेव मंदिर यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।
बरुआसागर (झांसी): बेतवा नदी के तट पर स्थित यह ऐतिहासिक स्थल अपनी झील, 9वीं सदी के प्राचीन जराय का मठ (प्रतीहार कालीन मंदिर) और बुंदेला किले के लिए जाना जाता है।
हस्तिनापुर (मेरठ): महाभारत कालीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाला यह पवित्र नगर जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली के रूप में और प्राचीन ऐतिहासिक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है।
भीतरगांव मंदिर (कानपुर देहात): गुप्तकाल (5वीं सदी) का यह प्राचीन मंदिर पूर्णतः पकी हुई ईंटों और टेराकोटा कलाकारी से निर्मित भारत का दुर्लभ स्थापत्य चमत्कार है।
बटेश्वर तीर्थ समूह (आगरा): यमुना नदी के अर्धचंद्राकार मोड़ पर स्थित 101 शिव मंदिरों की शृंखला, जो अपने शांत घाटों और पुरातात्विक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (लखीमपुर खीरी): तराई क्षेत्र में स्थित यह समृद्ध राष्ट्रीय उद्यान बाघों, गैंडों और दलदली हिरणों (बारहसिंगा) के दर्शन के लिए एक किफायती वन्यजीव गंतव्य है।
शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी अभयारण्य / नवाबगंज (उन्नाव): लखनऊ-कानपुर मार्ग पर स्थित यह वेटलैंड शीतकाल में प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुलज़ार रहता है।
संकिसा (फ़र्रुख़ाबाद): बौद्ध आस्था का प्रमुख केंद्र, जहां सम्राट अशोक कालीन गज स्तंभ शीर्ष (Elephant Capital) और प्राचीन स्तूप स्थित हैं।
चुनार दुर्ग व जलप्रपात (मिर्ज़ापुर): गंगा तट पर स्थित चुनार का किला और विंध्य पहाड़ियों में स्थित देवदरी-राजदरी जलप्रपात (चंदौली सीमा) युवा बैकपैकर्स और एडवेंचर पसंद यात्रियों के लिए बेहतरीन वीकेंड स्थल हैं।
परिवहन: इन सभी स्थलों तक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों तथा भारतीय रेल नेटवर्क के माध्यम से बेहद कम ख़र्च में पहुँचा जा सकता है।
ठहरने की व्यवस्था: पर्यटन विभाग के राही (UPSTDC) पर्यटक आवास गृह, स्थानीय धर्मशालाएं और बजट लॉज ₹400 से ₹1,200 प्रतिदिन में उपलब्ध हो जाते हैं।
सुरक्षा व अग्रिम योजना: जलप्रपातों और दुर्गम क्षेत्रों (जैसे सोनभद्र व मिर्ज़ापुर के झरने) में वर्षा ऋतु के दौरान पर्याप्त सावधानी बरतें। दुधवा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों में सफ़ारी के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग के आधिकारिक पोर्टल से पूर्व-बुकिंग अवश्य करें।
Updated on:
27 Aug 2026 08:53 pm
Published on:
27 Aug 2026 08:52 pm
