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एंडोमेट्रियोसिस चुपचाप बढ़ा रहा है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा? जानिए लक्षण और विशेषज्ञों की राय

एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं को होने वाली एक बहुत पीड़ादायक और गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। यह बीमारी न केवल महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालती है, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी काफी बढ़ा देती है।
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Oct 07, 2026
Endometriosis Symptoms
सांकेतिक इमेजः ChatGPT

एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं को होने वाली एक बहुत पीड़ादायक और गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। NIH में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में सात में से एक महिला इस कंडीशन से परेशान है। यह बीमारी न केवल महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालती है, बल्कि टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी काफी बढ़ा देती है।

एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 46 फीसदी तक अधिक होता है। यह संबंध उन महिलाओं (प्रीमोनोपॉजल और बिना मोटापे वाली महिलाओं) में सबसे मजबूद देखा गया है, जिन्हें आमतौर पर डायबिटीज के कम जोखिम वाला माना गया है।

एंडोमेट्रियोसिस को अब सिर्फ महिलाओं से जुड़ी बीमारी नहीं माना जाता, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली एक पुरानी बीमारी है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिज्म में बदलाव हो सकते हैं। चूंकि यह बीमारी गर्भाशय से फैलकर शरीर के दूसरे अंगों जैसे कि ओवरी, आंतों, ब्लैडर और कभी-कभी छाती या फेफड़ों तक भी पहुंच सकती है। इसलिए इससे पूरे शरीर में लंबे समय तक रहने वाली और गहरी सूजन हो सकती है।

इंडोमेट्रियोसिस क्या है?

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके गर्भाशय की परत (लाइनिंग) जैसा टिश्यू शरीर के दूसरे हिस्सों में बढ़ने लगता है। जब यह टिश्यू गलत जगहों पर बढ़ता है, तो इससे दर्दनाक लक्षण हो सकते हैं जो न केवल आपके मासिक धर्म चक्र (पीरियड्स) को, बल्कि आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकते हैं। एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित कुछ लोगों को स्कारिंग और फैलोपियन ट्यूब में रुकावट के कारण गर्भवती होने में भी परेशानी हो सकती है।

एंडोमेट्रियोसिस का शरीर पर प्रभाव

एंडोमेट्रियोसिस से शरीर में प्रो-इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स और इंफ्लेमेटरी मार्कर बढ़ जाते हैं। यह क्रोनिक सूजन इंसुलिन के काम में रुकावट डालती है, जिससे सेल्स इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते। इसके नतीजतन, इंसुलिन रेजिस्टेंस एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज और मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा काफी बढ़ा देता है।

यह स्थिति लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल लेवल) पर बुरा असर डाल सकती है, ब्लड शुगर बढ़ा सकती है और वजन मैनेज करना मुश्किल बना सकती है। आंतों के आसपास टिशू के बढ़ने से अक्सर पेट फूलना, पुरानी कब्ज, डायरिया और मतली जैसे लक्षण होते हैं। इसके अलावा, इम्यून सिस्टम के लगातार एक्टिव रहने से प्रभावित महिलाओं को बहुत ज्यादा और पुरानी थकान महसूस होती है। लगातार दर्द और शारीरिक बदलाव डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा भी बढ़ाते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण


एंडोमेट्रियोसिस का मुख्य लक्षण पेल्विक पेन या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना है। यह अक्सर मासिक धर्म से जुड़ा होता है। बहुत सी महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ऐंठन महसूस होती है, लेकिन एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं को अक्सर सामान्य से कहीं ज्यादा तेज दर्द महसूस होता है, यह दर्द समय के साथ और भी बढ़ सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस के सामान्य लक्षण

  • मासिक धर्म के दौरान दर्द – पीरियड्स शुरू होने से पहले पेल्विक दर्द और ऐंठन शुरू हो सकती है और कई दिनों तक रह सकती है। दर्द पीठ के निचले हिस्से और पेट में भी हो सकता है। पीरियड्स के दर्द को डिस्मेनोरिया भी कहते हैं।
  • मल त्याग या पेशाब के दौरान दर्द – ये लक्षण अक्सर पीरियड्स से पहले या उसके दौरान होते हैं।
  • बहुत ज्यादा ब्लीडिंग – कभी-कभी, आपको पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग हो सकती है।
  • इनफर्टिलिटी – कुछ लोगों में, एंडोमेट्रियोसिस का पता सबसे पहले इनफर्टिलिटी के इलाज के लिए किए गए टेस्ट के दौरान चलता है।
  • दूसरे लक्षणों में थकान, डायरिया, कब्ज, पेट फूलना या जी मिचलाना शामिल हैं. ये लक्षण अक्सर पीरियड्स से पहले या उसके दौरान होते हैं
Updated on:
07 Oct 2026 09:08 pm
Published on:
07 Oct 2026 09:08 pm