
GST व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को हुई GST परिषद की 57वीं बैठक में पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड और विवाद निपटान से जुड़े सुधारों की सिफारिश की गई।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पिछले साल की 56वीं बैठक दर कटौती पर केंद्रित थी, जबकि इस बार जोर प्रक्रिया सुधारों पर रहा। ये परिषद की सिफारिशें हैं। कानून बनने के लिए इन्हें अधिसूचना, नियम या संशोधन के जरिये लागू करना होगा।
नए नियमों से सबसे बड़ी राहत छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, इससे करीब 9।5 लाख छोटे विक्रेताओं को बिना हर राज्य में दफ्तर खोले राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सकती है।
प्रस्तावित नियम 14B के तहत विक्रेता ई-कॉमर्स ऑपरेटर की सहमति से उसके गोदाम को दूसरे राज्य में अपना प्रमुख कारोबारी स्थल घोषित कर सकेंगे, इसकी शर्तें भी हैं। मासिक ITC पास-ऑन की सीमा 2।5 लाख रुपये है।
पंजीकरण सिर्फ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये होने वाली आपूर्ति तक सीमित रहेगा। विक्रेता की कम से कम एक राज्य में भौतिक मौजूदगी जरूरी होगी। पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया भी आसान होगी। दस्तावेजों की स्पष्ट सूची और REG-01 फॉर्म में ड्रॉप-डाउन विकल्प जोड़े जाएंगे, ताकि अधूरी जानकारी से आवेदन रद्द न हों।
इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का रिफंड बिना अधिकारी के स्वचालित होगा। टैक्सगुरु के विश्लेषण के अनुसार रिफंड आवेदन की पावती या कमी-सूचना की समयसीमा 15 से घटाकर 10 दिन की जाएगी। शून्य-दर आपूर्ति और उलट शुल्क ढांचे में जोखिम आकलन के आधार पर 90 प्रतिशत रिफंड सिस्टम से अस्थायी रूप से मंजूर होगा। इसके अलावा उलट शुल्क ढांचे में इनपुट सेवाओं पर जमा आईटीसी का रिफंड भी मिल सकेगा। यह 1 नवंबर 2026 के बाद लिए गए क्रेडिट पर लागू होगा।
बैठक में कारण बताओ नोटिस के लिए 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा की सिफारिश की गई। इससे कम कर राशि पर नोटिस नहीं भेजा जाएगा। इस सीमा से नीचे के लंबित नोटिस और अपील भी इसी आधार पर निपटाए जाएंगे। सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25,000 से घटाकर 10,000 रुपये करने की भी सिफारिश है।
इसके साथ धारा 69 के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने और अभियोजन की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई है। बैठक में दरों में बदलाव सालाना एक बार तक सीमित रखने की बात भी कही गई।
सभी सुधारों की एक तारीख तय नहीं है। अभी दो तारीखें स्पष्ट हैं। 1 नवंबर 2026 से उलट शुल्क ढांचे में इनपुट सेवाओं का रिफंड शुरू होगा। 1 अप्रैल 2027 से पूंजीगत वस्तुओं पर आईटीसी रिफंड शुरू होगा। उसी रिटर्न अवधि से जीएसटीआर-1, 2बी और 3बी का मिलान तंत्र प्रस्तावित है।
बाकी बदलाव अधिसूचनाओं और कानूनी संशोधनों पर निर्भर करेंगे। टैक्सस्कैन ने लिखा है कि ई-कॉमर्स पंजीकरण योजना पर अब तक कोई अधिसूचना नहीं आई है। कारोबारियों को तब तक मौजूदा नियम ही मानने होंगे
पिछले साल 56वीं बैठक में तय 90 प्रतिशत अस्थायी रिफंड और ई-कॉमर्स पंजीकरण की सैद्धांतिक मंजूरी का नासकॉम ने स्वागत किया था। उसने कहा था कि इससे कार्यशील पूंजी पर दबाव घटेगा और MSME के लिए प्रवेश बाधाएं कम होंगी। अब 57वीं बैठक में उन्हीं घोषणाओं का ब्योरा तय हुआ है। उनका असर इस पर निर्भर करेगा कि अधिसूचनाएं कितनी जल्दी और किस रूप में आती हैं।