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भारत-ब्रिक्स सहयोग से खुलेगी निर्यात की राह: भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 50% की उछाल, UAE-चीन बड़े खरीदार

राजधानी दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन होगा। इस शिखर सम्मेलन से भारत को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27 प्रतिशत बढ़ा है।
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Sep 11, 2026
BRICS summit in Delhi
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षेत्र ने ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने शुक्रवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27 प्रतिशत बढ़ा है, जो देश के कुल निर्यात की 26.53 प्रतिशत वृद्धि दर से कहीं अधिक है।

डिजिटल सहयोग को मिलेगी मजबूती

ESC (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) ने एक बयान में कहा कि नई दिल्ली में 12-13 सितंबर के बीच आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान डिजिटल सहयोग और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाए जाने के बाद इस गति को और मजबूती मिल सकती है। यह मजबूत प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि ब्रिक्स देशों के साथ डिजिटल और तकनीकी सहयोग को व्यावसायिक अवसरों में बदलने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

18वें ब्रिक्स सम्मेलन से उम्मीद

ESC संगठन का मानना है कि यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है। ब्रिक्स देशों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और चीन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के सबसे बड़े आयातक बने हुए हैं। परिषद के अनुसार, इन दोनों देशों का संयुक्त योगदान ब्रिक्स देशों को होने वाले भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 88.50 प्रतिशत रहा।

उत्पाद श्रेणियों की बात करें तो दूरसंचार उपकरण सबसे बड़ा निर्यात सेगमेंट रहा, जिसकी हिस्सेदारी कुल निर्यात में 74.60 प्रतिशत रही। ESC ने बताया कि ब्रिक्स देशों का भारत के कुल वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 19.61 प्रतिशत योगदान है। परिषद का कहना है कि सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग नेटवर्क उपकरणों, डिवाइस सर्टिफिकेशन और साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने वाले सॉफ्टवेयर की मांग को बढ़ा सकता है।

भारत के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता अहम

ESC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं कार्यकारी निदेशक गुरमीत सिंह ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान एजेंडे में शामिल कई विषय भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन प्रस्तावों को सदस्य देश किस गति और गंभीरता से आगे बढ़ाते हैं।

ब्रिक्स डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी पर चर्चा और पिछले महीने पुणे में भारत एवं ब्राजील के बीच संपन्न सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समझौता इस दिशा का संकेत देता है। समझौते में 5जी, 6जी, ओपन रैन और उपग्रह कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है, जो भविष्य में ब्रिक्स डिजिटल सहयोग का आधार बन सकते हैं।

ESC ने यह भी कहा कि प्रस्तावित ब्रिक्स ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान 2026-2030 और MSME सहयोग पोर्टल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों, को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

भारतीय निर्यातकों को मिलेंगे नए अवसर

ESC के अध्यक्ष राजेश रेवंकर ने कहा कि यह प्रस्तावित ढांचा भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि वे उभरती सीमा-पार मूल्य शृंखलाओं का हिस्सा बन सकेंगे। परिषद ने एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग तंत्र का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य एमएसएमई के सामने आने वाली व्यापार वित्तपोषण संबंधी चुनौतियों को कम करना है। उद्योग जगत का कहना है कि यह व्यवस्था सऊदी अरब, रूस, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों में विस्तार की योजना बना रहे भारतीय निर्यातकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।

Updated on:
11 Sept 2026 03:28 pm
Published on:
11 Sept 2026 03:28 pm
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