
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस रही यहूदी बस्तियों को लेकर पश्चिमी देशों ने इजरायल पर दबाव और बढ़ा दिया है। 8 सितंबर 2026 को ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों में बने सभी सामान के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की थी। यह ऐलान प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार में विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने हाउस ऑफ कॉमन्स में दिया।
मिलिबैंड ने आरोप लगाया कि वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों में चरमपंथी बसने वाले फिलिस्तीनियों की "जातीय सफाई" (एथनिक क्लींजिंग) कर रहे हैं और ब्रिटेन सरकार अब आधिकारिक तौर पर इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम ब्रिटेन द्वारा पिछले साल फिलिस्तीनी राज्य को औपचारिक मान्यता देने के बाद इजरायल-फिलिस्तीन मसले पर उसका सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव है।
ब्रिटेन के ऐलान के कुछ ही घंटों में फ्रांस और कनाडा ने भी वेस्ट बैंक बस्तियों के सामान पर तुरंत प्रभाव से आयात प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन समेत कुल 12 देशों ने साझा बयान जारी किया। हालांकि, इन 9 अतिरिक्त देशों की प्रतिबद्धता एक जैसी नहीं है।
इन्होंने बस्तियों के सामान पर राष्ट्रीय या यूरोपीय स्तर पर पाबंदी का समर्थन करने या इस पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है, जबकि फिलहाल केवल ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने ही ठोस प्रतिबंध लागू किया है। साझा बयान में कहा गया कि इजरायली सरकार की बस्तियों संबंधी कार्रवाइयां दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को कमजोर कर रही हैं।
ब्रिटेन का प्रतिबंध सिर्फ आयात तक सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन ने बस्तियों के लिए वित्तीय, निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेवाएं देने वाली कंपनियों पर भी पाबंदी लगाई है। बस्तियों की संपत्तियों के विज्ञापन पर रोक लगाई है और इजरायल को हथियारों के नए निर्यात लाइसेंस देने से इनकार किया है।
ब्रिटेन और अन्य देशों द्वारा पाबंदी लगाए जाने पर इजरायल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री गिडियोन सआर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मंजूरी से पूर्वी यरुशलम में ब्रिटिश कॉन्सुलेट बंद करने, 12 ब्रिटिश नागरिकों (जिनमें लेबर पार्टी के सांसद भी शामिल हैं) के इजरायल में प्रवेश पर रोक लगाने और गाजा सहायता केंद्र और वेस्ट बैंक पुलिस-प्रशिक्षण कार्यक्रम से ब्रिटिश अधिकारियों को हटाने का ऐलान किया। गिडियोन सआर ने मिलिबैंड के "जातीय सफाई" वाले बयान को गलत बताया और आरोप लगाया कि यह कदम ब्रिटेन की घरेलू राजनीति से प्रेरित है।
ब्रिटेन के कदम पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सतर्क रुख अपनाया। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा की तरह इजरायली बस्तियों से आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा। हालांकि उन्होंने वेस्ट बैंक में अस्थिरता न बढ़ने की उम्मीद जताई। इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने ब्रिटिश कदम को और तीखे शब्दों में "अतार्किक" करार दिया। साथ ही चेतावनी दी कि इससे ब्रिटिश कंपनियों को अमेरिका के कुछ राज्यों (जैसे फ्लोरिडा) में कारोबार करने में दिक्कत आ सकती है, क्योंकि वहां इजरायल-विरोधी बॉयकॉट में शामिल संस्थाओं पर रोक लगाने वाले कानून मौजूद हैं।
वेस्ट बैंक की बस्तियों से मुख्य रूप से जॉर्डन घाटी में उगाए गए खजूर, खट्टे फल (संतरा, चकोतरा) और प्सागोत, शीलो जैसी बस्तियों की वाइनरी से वाइन का निर्यात होता है। यूरोपियन कमीशन के हवाले से यूरो-ऑब्जर्वर की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ अधिकारी बस्तियों से होने वाले कुल व्यापार को "मामूली" बताते रहे हैं, जिसका अनुमानित मूल्य सालाना 25 करोड़ यूरो से भी कम है।
साल 2025 में इजरायल के साथ यूरोपीय संघ का कुल व्यापार करीब 43.3 अरब यूरो का रहा। यानी बस्तियों के सामान का हिस्सा इजरायल के कुल निर्यात व्यापार में बेहद छोटा है, इसलिए प्रतिबंधों का इजरायली अर्थव्यवस्था पर सीधा असर सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। इनका असर मुख्यतः प्रतीकात्मक और कूटनीतिक माना जा रहा है।
न्यूजीलैंड 8 सितंबर के इस 12-देशीय बयान का हिस्सा नहीं है। हालांकि, न्यूजीलैंड मई 2026 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और नीदरलैंड समेत अन्य देशों के साथ एक अलग साझा बयान में बस्तियों के विस्तार और बसने वालों की हिंसा पर चिंता जाहिर कर चुका है, जिसमें दो-राष्ट्र समाधान को खतरे में बताया गया था।
ब्रिटेन ने अपने रुख को जुलाई 2024 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की सलाहकार राय से भी औपचारिक रूप से जोड़ा है, जिसमें इजरायल के कब्जे को गैरकानूनी बताया गया था। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा बना रहेगा, हालांकि इस विशिष्ट प्रतिबंध पर महासभा में अलग से मतदान की पुष्टि फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
Updated on:
11 Sept 2026 04:38 pm
Published on:
11 Sept 2026 04:38 pm
