
भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया की तस्करी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। भारत में किसानों को सब्सिडी के जरिए अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिलने वाली यूरिया की नेपाल में मांग और कीमत का अंतर इसकी अवैध आवाजाही को बढ़ावा देने वाले कारणों में शामिल है। इसका असर सीमावर्ती क्षेत्रों में खाद की उपलब्धता, सरकारी वितरण व्यवस्था और किसानों की लागत पर पड़ सकता है।
हाल के मामलों ने एक बार फिर इस समस्या को सामने ला दिया है। अगस्त 2026 में सिद्धार्थनगर और खुनुवां क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने अलग-अलग कार्रवाइयों में 83 बोरी यूरिया पकड़ी और चार लोगों को हिरासत में लिया। तस्करी में इस्तेमाल वाहन भी बरामद किए गए।
लोकसभा में 24 मार्च 2026 को गृह मंत्रालय ने भारत-नेपाल सीमा पर उर्वरक तस्करी से जुड़े आंकड़े साझा किए। सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 3,810 उर्वरक तस्करी के मामले दर्ज किए गए, 23,69,489 किलोग्राम यूरिया जब्त की गई और 4,212 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सशस्त्र सीमा बल नियमित नाकेबंदी, गश्त, संयुक्त गश्त और खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करता है। सरकार ने बताया कि कानून के तहत संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई है।
यह आंकड़ा बताता है कि समस्या छिटपुट घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमा के कई हिस्सों में लगातार निगरानी की जरूरत है।
भारत में यूरिया पर सरकार भारी सब्सिडी देती है। इसका उद्देश्य किसानों को उचित कीमत पर नाइट्रोजन उर्वरक उपलब्ध कराना है। जब यही खाद अवैध तरीके से सीमा पार जाती है, तो स्थानीय बाजार में उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
खासतौर पर धान और अन्य फसलों के मौसम में मांग बढ़ने पर सीमावर्ती किसानों को खाद के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है या बाजार में कमी और कीमत बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि हर स्थानीय कमी को केवल तस्करी का परिणाम मानना सही नहीं होगा। आपूर्ति, मांग, वितरण और स्थानीय भंडारण भी खाद की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं।
सीमा पर तस्करी रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी सशस्त्र सीमा बल की है। इसके अलावा पुलिस, सीमा शुल्क और कृषि विभाग जैसी एजेंसियां भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करती हैं।
केंद्र सरकार ने खाद की अवैध बिक्री, डायवर्जन और कालाबाजारी पर निगरानी के लिए तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था भी बनाई है। उर्वरक वितरण की निगरानी Integrated Fertilizer Monitoring System (iFMS) के जरिए की जाती है।
इसके अलावा फर्टिलाइजर फ्लाइंग स्क्वाड जैसी व्यवस्थाओं के जरिए निरीक्षण और कार्रवाई की जाती है।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। फर्टिलाइजर फ्लाइंग स्क्वाड ने 2023 में 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 370 से अधिक औचक निरीक्षण किए थे। उस कार्रवाई में संदिग्ध यूरिया की करीब 70,000 बोरियां जब्त की गई थीं और यूरिया डायवर्जन से जुड़े 30 एफआईआर दर्ज हुए थे। 112 मिश्रण निर्माताओं को भी अधिकृत सूची से हटाया गया था।
इसलिए इन आंकड़ों को 2026 की भारत-नेपाल सीमा पर हुई कार्रवाई के आंकड़े के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
दूसरी तरफ नेपाल में भी रासायनिक खाद की उपलब्धता और वितरण चुनौती बना हुआ है। अप्रैल 2026 में नेपाल ने भारत सहित दूसरे देशों से अतिरिक्त उर्वरक आपूर्ति के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू किए थे। नेपाल सरकार ने भारत से खाद की सुचारु आपूर्ति के लिए संपर्क किया था।
जुलाई 2026 में नेपाल की कृषि मंत्री गीता चौधरी ने बताया था कि सरकार ने बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरक आयात किया है और अतिरिक्त आपूर्ति की तैयारी भी चल रही है।
इससे साफ है कि समस्या केवल सीमा सुरक्षा की नहीं है। दोनों देशों में खाद की मांग और वैध आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
केवल सुरक्षा बढ़ाना इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता। तस्करी के रास्ते बदल सकते हैं और अवैध नेटवर्क नए तरीके अपना सकते हैं।
इसलिए सीमा सुरक्षा के साथ यह भी जरूरी है कि भारत में किसान को उसके क्षेत्र में समय पर पर्याप्त खाद मिले और नेपाल में वैध आयात व वितरण व्यवस्था मजबूत हो। इससे अवैध बाजार की गुंजाइश कम हो सकती है।
सीमा के संवेदनशील इलाकों में एसएसबी, पुलिस, कस्टम और कृषि विभाग के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। संदिग्ध थोक खरीद, असामान्य स्टॉक और बार-बार होने वाली सीमा पार आवाजाही पर डेटा आधारित निगरानी मददगार हो सकती है।
साथ ही खाद की आपूर्ति और वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि खाद किस स्तर से डायवर्ट हो रही है।
किसानों को तस्करी के नेटवर्क और वैध खरीद के बीच स्पष्ट अंतर समझना जरूरी है। खाद केवल अधिकृत विक्रेता से और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही खरीदनी चाहिए।
सरकार को सीमावर्ती इलाकों में मांग के अनुसार पर्याप्त स्टॉक, पारदर्शी वितरण और शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे किसानों को खाद के लिए बिचौलियों या अवैध बाजार पर निर्भर होने की जरूरत कम होगी।
भारत और नेपाल दोनों के लिए खाद की उपलब्धता कृषि उत्पादन से सीधे जुड़ी है। इसलिए सीमा पर सुरक्षा कार्रवाई के साथ दोनों देशों के बीच वैध उर्वरक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
यदि नेपाल को अपनी जरूरत के मुताबिक खाद वैध चैनल से समय पर मिलती है और भारत में किसानों के लिए पर्याप्त सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध रहती है, तो अवैध कारोबार की आर्थिक गुंजाइश कम हो सकती है।
भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया की तस्करी सिर्फ सीमा अपराध नहीं है। यह किसानों की खाद उपलब्धता, सरकारी सब्सिडी और दोनों देशों की कृषि व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है।
सरकारी आंकड़ों में पिछले पांच वर्षों के 3,810 मामले और 23.69 लाख किलो से अधिक जब्ती इस चुनौती की गंभीरता दिखाती है।
इसलिए समाधान भी बहुआयामी होना चाहिए। सीमा पर सख्त निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, भारत में पर्याप्त खाद वितरण और नेपाल के लिए वैध आपूर्ति व्यवस्था। यही रास्ता किसानों के हिस्से की खाद को अवैध बाजार में जाने से रोक सकता है।