
सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने एक ही हफ्ते में दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। एक तरफ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की सफरान हेलिकॉप्टर इंजन ने मिलकर उच्च क्षमता वाला स्वदेशी हेलिकॉप्टर इंजन 'अरावली' विकसित करने का करार किया है। दूसरी तरफ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर स्वदेशी सैन्य पैराशूट प्रणाली का सफल परीक्षण किया है।
26 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में HAL और सफरान हेलिकॉप्टर इंजन कंपनी ने अपनी 50-50 हिस्सेदारी वाली संयुक्त कंपनी 'सफहल हेलिकॉप्टर इंजन प्राइवेट लिमिटेड' (SAFHAL) के जरिए एक करार पर हस्ताक्षर किए। इस करार के तहत 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर क्षमता वर्ग के नई पीढ़ी के इंजन 'अरावली' का संयुक्त डिजाइन, विकास, निर्माण, आपूर्ति और पूरे जीवनचक्र के दौरान तकनीकी सहायता की व्यवस्था होगी।
यह विमानन इतिहास में पहली बार है, जब भारत में किसी हाई-पावर हेलिकॉप्टर इंजन को स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया जा रहा है। इस करार पर HAL की ओर से इंजीनियरिंग, अनुसंधान एवं विकास निदेशक अजय कुमार श्रीवास्तव और सफहल की ओर से निदेशक ओलिवियर सावेन ने हस्ताक्षर किए, जबकि समारोह की अध्यक्षता HAL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि के. और सफरान हेलिकॉप्टर इंजन के CEO सेड्रिक गुबे ने की। रवि के. ने कहा कि यह करार भारत की एयरो-इंजन तकनीकों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है।
नई पीढ़ी के इंजन 'अरावली' का नाम भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शुमार अरावली पर्वतमाला से लिया गया है। इस इंजन को HAL के प्रस्तावित 13 टन के इंडियन मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर (IMRH) और नौसेना के लिए बनाए जा रहे इसके डेक-बेस्ड वेरिएंट (DBMRH) के लिए चुना गया है। इसका निर्माण सफहल की कर्नाटक के तुमकुरु स्थित यूनिट में किया जाएगा। यह करार जुलाई 2022 के एक समझौता ज्ञापन और अगस्त 2024 के प्रारंभिक एयरफ्रेमर अनुबंध के बाद हुआ है। बता दें कि सफहल कंपनी की स्थापना नवंबर 2023 में हुई थी।
HAL और सफरान (पूर्व में टर्बोमेका) पहले से ही 1,400 से 2,000 शाफ्ट हॉर्सपावर क्षमता वर्ग का 'शक्ति' इंजन (आर्डिडेन-1 शक्ति) संयुक्त रूप से विकसित कर चुकी हैं, जो फिलहाल ALH ध्रुव और LCH प्रचंड जैसे हेलिकॉप्टरों में इस्तेमाल होता है। इसकी तुलना में 'अरावली' लगभग दोगुनी क्षमता वाला इंजन है, जो भारी IMRH और DBMRH जैसे हेलिकॉप्टरों की जरूरत पूरी करेगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अनुबंध से HAL को हाई-प्रेशर कंप्रेसर, पावर टर्बाइन, फ्यूल-ऑयल सिस्टम और एक्सेसरी गियरबॉक्स जैसी मुख्य इंजन तकनीकों तक पहुंच मिलेगी, जो भविष्य के स्वदेशी एयरो-इंजन कार्यक्रमों के लिए अहम साबित होगी। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटेगी और घरेलू औद्योगिक व तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।
इसी हफ्ते, 26 अगस्त को ही, DRDO ने लद्दाख के न्योमा स्थित मुध ड्रॉप जोन में अपनी स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट प्रणाली (MCPS) का सफल उच्च-ऊंचाई परीक्षण किया। यह परीक्षण नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब, समुद्र तल से 22,000 फीट की ऊंचाई से किया गया, जहां पैराशूट 20,000 फीट पर खुला और परीक्षण जंपर्स 13,700 फीट की ऊंचाई पर सुरक्षित उतरे। यह ठीक उतनी ही ऊंचाई है जितनी पर हाल ही में चालू हुआ न्योमा का वायुसेना बेस स्थित है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे लड़ाकू विमान अड्डों में गिना जाता है। तापमान माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक गिरा हुआ था।
इस स्वदेशी पैराशूट को DRDO की आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) ने बेंगलुरु स्थित डिफेंस बायोइंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रोमेडिकल लैबोरेटरी (DEBEL) के साथ मिलकर विकसित किया है। परीक्षण में चीफ टेस्ट जंपर विंग कमांडर राहुल झा, एमडब्ल्यूओ आर.जे. सिंह और एमडब्ल्यूओ विवेक तिवारी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने MCPS के साथ स्वदेशी पैराकंप्यूटर, ऑक्सीजन प्रणाली व विशेष जंपसूट का इस्तेमाल किया। DRDO के मुताबिक, इस परीक्षण ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में प्रणाली की प्रभावशीलता, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता को साबित किया, जो पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष अभियानों और हवाई तैनाती के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
Updated on:
29 Aug 2026 06:08 pm
Published on:
29 Aug 2026 06:08 pm
