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क्या आप ऋण मुक्ति का रास्ता खोज रहे हैं? लोन सेटेलमेंट बन सकता है विकल्प, जानें इसके फायदे और नियम

लोन सेटलमेंट आपके लिए राहत का नया रास्ता हो सकता है। लेकिन क्या यह आपकी वित्तीय सेहत को भी बिगाड़ सकता है? जानिए इस विकल्प का इस्तेमाल कब और कैसे करें?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 29, 2026

loan settlement scheme

सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)

जब कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाए तो आम आदमी के लिए लोन सेटलमेंट बेहतर विकल्प बन सकता है। लेकिन क्या यह वाकई फायदे का सौदा है? इस लेख में हम समझेंगे कि लोन सेटलमेंट क्या है? इसके क्या फायदे-नुकसान हैं और किस स्थिति में यह विकल्प काम आता है?

लोन सेटलमेंट का अर्थ

लोन सेटलमेंट का मतलब है कि जब आप कर्ज पूरा नहीं चुका सकते, तो बैंक या NBFC से बातचीत करके एक कम राशि पर समझौता कर लेते हैं। जिसे एकमुश्त भुगतान (One-Time Settlement) कहा जाता है। इसके बाद बकाया राशि माफ कर दी जाती है और आपका खाता ‘Settled’ के रूप में बंद हो जाता है, ‘Closed’ नहीं।

लोन सेटलमेंट से लाभ

जब आप EMI नहीं चुका पा रहे हों और कर्ज बढ़ता जा रहा हो, तो सेटलमेंट आपको एकमुश्त भुगतान करके बकाया से छुटकारा दिला सकता है। यह दिवालियापन जैसी गंभीर स्थिति से बचने में मदद करता है और लंबे समय तक चलने वाले तनाव को खत्म कर सकता है। इसके साथ ही, बैंक के लिए भी यह बेहतर होता है कि वह कुछ राशि तुरंत वसूल कर ले, बजाय पूरी रिकवरी के लंबे और महंगे प्रयास के।

लोन सेटलमेंट का क्रेडिट स्कोर पर असर

लोन सेटलमेंट के बाद आपका क्रेडिट रिपोर्ट पर खाता ‘Settled’ दिखेगा, न कि ‘Closed’। इसका मतलब है कि आपने पूरा भुगतान नहीं किया। इससे आपका CIBIL स्कोर 75 से 100 अंक तक गिर सकता है और यह ‘Settled’ मार्किंग 7 साल तक बनी रह सकती है। भविष्य में नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है और मिलने पर ब्याज दरें अधिक हो सकती हैं।

यह विकल्प कब उपयुक्त है?

लोन सेटलमेंट का विकल्प केवल तब अपनाएं, जब आपकी वित्तीय स्थिति सचमुच बिगड़ चुकी हो। जैसे- नौकरी छूटना, मेडिकल इमरजेंसी या लंबे समय तक EMI न चुका पाना। आमतौर पर बैंक तभी सेटलमेंट की पेशकश करते हैं, जब खाता NPA (Non-Performing Asset) बन चुका हो। अर्थात 90 दिनों से अधिक ईएमआई बकाया हो।

वैकल्पिक रास्ते: सेटलमेंट से पहले क्या करें?

सेटलमेंट से पहले अन्य विकल्पों पर विचार करें। जैसे EMI पुनर्गठन, अवधि बढ़ाना, ब्याज राहत या पार्ट-पेमेंट प्लान। ये विकल्प आपके क्रेडिट स्कोर पर कम असर डालते हैं और खाता ‘Closed’ होने की संभावना बढ़ाते हैं।

लोन सेटलमेंट कैसे करें?

  1. अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करें और एकमुश्त भुगतान के लिए तैयार राशि तय करें।
  2. बैंक से संपर्क करें, अपनी कठिनाई समझाएं और दस्तावेज जमा करें।
  3. बातचीत करें और समझौता राशि तय करें।
  4. लिखित समझौता प्राप्त करें जिसमें भुगतान और रिपोर्टिंग की शर्तें स्पष्ट हों।
  5. राशि का भुगतान करें और भुगतान का प्रमाण रखें।
  6. बाद में अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जांचें कि खाता ‘Settled’ दिख रहा है या नहीं।

सरकारी दिशा-निर्देश और कानूनी मान्यता

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने OTS को कानूनी और मान्यता प्राप्त प्रक्रिया माना है, विशेषकर NPA खातों के लिए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 38 लाख से अधिक OTS मामले स्वीकृत हुए, जिनमें कुल ₹56,222 करोड़ की वसूली हुई। इसके अलावा, बैंक बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीति के तहत समझौता प्रक्रिया पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण होनी चाहिए।

जोखिम और सावधानियां

  • क्रेडिट स्कोर पर दीर्घकालिक असर: ‘Settled’ मार्किंग 7 साल तक रहती है।
  • भविष्य में लोन मिलने में मुश्किल: बैंक अधिक दस्तावेज, गारंटी या उच्च ब्याज मांग सकते हैं।
  • धोखाधड़ी से बचें: केवल बैंक या NBFC से ही बातचीत करें; अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहें।
  • लिखित समझौता जरूरी: मौखिक वादे पर भरोसा न करें।

लाभ और नुकसान का सारांश

पहलूलाभनुकसान
त्वरित राहतकर्ज से जल्दी मुक्तिक्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर
तनाव में कमीदिवालियापन से बचावभविष्य में लोन मुश्किल
बैंक के लिए वसूलीबकाया राशि माफ‘Settled’ मार्किंग 7 साल तक

लोन सेटलमेंट आखिरी विकल्प

आम आदमी के लिए लोन सेटलमेंट एक आखिरी विकल्प हो सकता है। जब EMI चुकाना असंभव हो जाए और अन्य विकल्प काम न आएं। ऐसी स्थिति में यह तत्काल राहत देता है और कानूनी रूप से मान्य है। लेकिन इसके साथ क्रेडिट स्कोर पर दीर्घकालिक असर और भविष्य में लोन लेने में मुश्किलें जुड़ी होती हैं। इसलिए, इसे अपनाने से पहले ईएमआई पुनर्गठन या अवधि विस्तार जैसे विकल्पों पर विचार करें। अगर सेटलमेंट ही अंतिम रास्ता है, तो बैंक से लिखित समझौता लेकर सावधानी से आगे बढ़ें।