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आजादी के वक्त भारत में कितने कारखाने थे? 79 साल में कैसे बना औद्योगिक भारत

Industrial Development in India : 1947 में आजादी के वक्त भारत में केवल 9,000 कारखाने थे। जानिए 79 वर्षों में भारत ने कपड़ा और जूट से लेकर स्टील, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स तक का औद्योगिक सफर कैसे तय किया।
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Aug 15, 2026
Industrial Development in India
Industrial Development in India : 1947 में देश में कितने कारखाने थे, PC- Patrika

1947 में जब भारत आजाद हुआ, तब देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित थी। लगभग 85 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती थी और खेती ही रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत थी। उद्योग मौजूद थे, लेकिन उनका दायरा सीमित था। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत को मुख्य रूप से कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले देश के रूप में विकसित किया गया था, जबकि आधुनिक मशीनें और तैयार माल विदेशों से आते थे। यही वजह थी कि आजादी के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मजबूत औद्योगिक आधार तैयार करना था।

आजादी के समय भारत में कितने कारखाने थे?

सटीक संख्या अलग-अलग स्रोतों में कुछ भिन्न मिलती है, लेकिन 1950-51 के आसपास भारत में लगभग 9,000 पंजीकृत कारखाने थे, जिनमें करीब 17 लाख मजदूर काम करते थे। यह संख्या आज के भारत की तुलना में बेहद छोटी थी। उस समय आधुनिक उद्योगों में देश की कुल श्रमशक्ति का केवल एक छोटा हिस्सा ही कार्यरत था।

उस दौर में भारत का औद्योगिक ढांचा मुख्य रूप से उपभोक्ता वस्तुओं पर आधारित था। मशीन निर्माण, भारी उद्योग और पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) का उत्पादन बहुत कम था। देश अपनी अधिकांश मशीनरी और औद्योगिक उपकरण विदेशों से आयात करता था।

1947-50 में भारत के प्रमुख उद्योग कौन से थे?

कपड़ा उद्योग : कॉटन टेक्सटाइल (सूती कपड़ा) भारत का सबसे बड़ा उद्योग था। मुंबई, अहमदाबाद, कानपुर और कोयंबटूर जैसे शहर कपड़ा उत्पादन के बड़े केंद्र थे। वस्त्र उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देता था और निर्यात में भी इसकी बड़ी भूमिका थी।

जूट उद्योग : जूट उद्योग मुख्य रूप से बंगाल क्षेत्र में केंद्रित था। भारत दुनिया के प्रमुख जूट उत्पादक देशों में शामिल था। हालांकि विभाजन के बाद जूट उगाने वाले कई क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में चले गए, जिससे उद्योग को झटका लगा।

इस्पात उद्योग : भारत का इस्पात उत्पादन बहुत सीमित था। 1950-51 में देश में लगभग 10 लाख टन (1 मिलियन टन) तैयार इस्पात का उत्पादन होता था। उस समय टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) देश की सबसे महत्वपूर्ण इस्पात निर्माता कंपनी थी।

कोयला उद्योग : कोयला उस समय ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत था। 1950-51 में भारत का कोयला उत्पादन लगभग 32-33 मिलियन टन था। झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों के केंद्र थे।

सीमेंट उद्योग : आजादी के समय सीमेंट उद्योग मौजूद तो था, लेकिन उत्पादन सीमित था। 1950-51 में भारत लगभग 2.7 मिलियन टन सीमेंट का उत्पादन करता था। यह मात्रा देश की विकास आवश्यकताओं के मुकाबले बहुत कम थी।

टाटा जैसी निजी कंपनियों की क्या भूमिका थी?

जब देश आजाद हुआ, तब सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उद्योग लगभग नहीं थे। औद्योगिक विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कुछ निजी कारोबारी समूहों पर थी।

  • टाटा समूह
  • बिड़ला समूह
  • वालचंद समूह
  • किर्लोस्कर समूह
  • डालमिया समूह

टाटा समूह की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। जमशेदपुर स्थित टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) ने भारत में आधुनिक इस्पात उद्योग की नींव रखी थी। यह कंपनी 1911 से उत्पादन कर रही थी और आजादी के समय देश की औद्योगिक क्षमता का प्रतीक मानी जाती थी।

कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि यदि टाटा जैसी कंपनियां न होतीं तो स्वतंत्र भारत को इस्पात, इंजीनियरिंग और भारी उद्योगों की शुरुआत शून्य से करनी पड़ती।

आजादी के बाद सरकार ने क्या किया?

स्वतंत्रता के बाद सरकार ने महसूस किया कि केवल निजी क्षेत्र के भरोसे औद्योगिक विकास संभव नहीं होगा। इसलिए पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भारी उद्योगों पर जोर दिया गया।

1950 और 1960 के दशक में

  • भिलाई स्टील प्लांट
  • राउरकेला स्टील प्लांट
  • दुर्गापुर स्टील प्लांट
  • हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT)
  • भारी इंजीनियरिंग उद्योग

जैसी परियोजनाएं शुरू की गईं। उद्देश्य था कि भारत मशीनें भी बनाए और मशीन बनाने वाली मशीनें भी बनाए।

79 साल में कितना बदल गया भारत?

1947 का भारत और 2026 का भारत औद्योगिक दृष्टि से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं।

उद्योग1950-51हाल के वर्ष
इस्पात~1 मिलियन टन~140 मिलियन टन
कोयला~33 मिलियन टन~893 मिलियन टन
सीमेंट~2.7 मिलियन टन~374 मिलियन टन
बिजली उत्पादनबेहद सीमितदुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल

आज भारत दुनिया का:

  • दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक
  • दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक
  • प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता
  • दवा निर्माण का वैश्विक केंद्र
  • मोबाइल फोन निर्माण का बड़ा हब

बन चुका है। औद्योगिक ढांचा अब कपड़ा और जूट तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, मशीनरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों तक फैल चुका है।

आज भारत का औद्योगिक उत्पादन कितना बड़ा है?

भारत का विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र आज अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है। विनिर्माण क्षेत्र का योगदान देश की जीडीपी में लगभग 14-17 प्रतिशत के बीच रहता है और भारत दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

जहां 1950 में भारत मुख्य रूप से उपभोक्ता वस्तुएं बनाता था, वहीं आज देश:

  • लड़ाकू विमान
  • मेट्रो ट्रेन
  • उपग्रह
  • मोबाइल फोन
  • ऑटोमोबाइल
  • दवाएं
  • भारी मशीनरी
Updated on:
15 Aug 2026 04:53 pm
Published on:
15 Aug 2026 04:52 pm