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हाथ-पैर हमेशा रहते हैं बर्फ जैसे ठंडे? जानिए आयरन डेफिशिएंसी के प्रमुख लक्षण और बचाव

बिना मौसम के लगती है ठंड? इसे नजरअंदाज न करें! जानिए शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन की कमी के लक्षण, कारण और खून का स्तर सुधारने के उपाय।
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Aug 16, 2026
Iron
शरीर में खून कम है? (AI)

बदलते मौसम या कड़ाके की सर्दियों में ठंड लगना एक सामान्य बात है। लेकिन जब सामान्य रूम टेम्परेचर (कमरे के तापमान) पर भी आपके हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे रहने लगें और आसपास के लोगों की तुलना में आपको ज्यादा ठंड महसूस हो, तो इसे केवल मौसम का असर मान कर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह स्थिति शरीर में आयरन की कमी (Iron Deficiency) या एनीमिया (Anemia) की ओर सीधा इशारा करती है। आयरन शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक है। जब खून में इसकी मात्रा कम होने लगती है, तो इसका असर ऊर्जा स्तर, त्वचा की चमक, मानसिक एकाग्रता और शरीर के तापमान नियंत्रण पर सीधे तौर पर पड़ता है।

शरीर में आयरन की भूमिका और ठंड लगने का विज्ञान

हमारे शरीर में आयरन का मुख्य काम हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) का निर्माण करना है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के हर हिस्से, ऊतकों (tissues) और मांसपेशियों तक पहुंचाता है।

जब शरीर में आयरन का स्तर गिरता है:

  • लाल रक्त कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाती हैं।
  • इससे कोशिकाओं और ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति सीमित हो जाती है।
  • शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे ऊर्जा और आंतरिक गर्मी (Internal Body Heat) का उत्पादन कम होता है।
  • शरीर की रक्त वाहिकाएं महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों (जैसे हृदय और मस्तिष्क) को सुरक्षित रखने के लिए सिकुड़ जाती हैं, जिससे हाथ और पैरों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। परिणाम स्वरूप व्यक्ति को हर वक्त असामान्य ठंडक महसूस होती है।

आयरन की कमी के प्रमुख संकेत

  • असामान्य ठंड लगना और ठंडे हाथ-पैर (Cold Intolerance): कमरे में पंखा या एसी हल्का चलने पर भी कंपकंपी महसूस होना, या सामान्य तापमान में भी मोजे और गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ना इसका पहला संकेत है। खराब ब्लड सर्कुलेशन की वजह से हथेलियां और तलवे लगातार ठंडे बने रहते हैं।
  • अत्यधिक थकान और ऊर्जा की कमी (Chronic Fatigue): आयरन की कमी का सबसे आम लक्षण है लगातार थकान महसूस होना। जब मांसपेशियों और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो शरीर को सामान्य दैनिक गतिविधियों के लिए भी दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। 8 घंटे की नींद लेने के बाद भी सुस्ती और भारीपन बना रहता है।
  • त्वचा, नाखूनों और आंखों का पीलापन (Pale Appearance): हीमोग्लोबिन खून को लाल रंग देता है, जिससे चेहरे पर स्वाभाविक चमक और लाली दिखाई देती है। आयरन कम होने पर चेहरा बेजान और पीला दिखने लगता है। निचली पलक के अंदर का हिस्सा, होंठ, मसूड़े और नाखून अपनी प्राकृतिक गुलाबी रंगत खोने लगते हैं। इसके साथ ही नाखून कमजोर होकर बीच से चटकने या चम्मच के आकार (Koilonychia) में मुड़ने लगते हैं।
  • सांस फूलना और सिर चकराना (Shortness of Breath & Dizziness): सीढ़ियां चढ़ते समय, थोड़ा तेज चलने पर या सामान्य घरेलू काम करते वक्त सांस फूलना इस बात का संकेत है कि फेफड़े ऑक्सीजन की कमी पूरी करने के लिए ज्यादा तेजी से सांस लेने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह, मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने से अचानक उठने पर चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना आम हो जाता है।
  • तेज दिल की धड़कन और बार-बार सिरदर्द (Heart Palpitations & Headaches): ऑक्सीजन की भरपाई करने के लिए हृदय को तेजी से खून पंप करना पड़ता है। इससे दिल की धड़कनें तेज और अनियमित (Palpitations) महसूस हो सकती हैं। साथ ही मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में पड़ने वाले दबाव के कारण लगातार सिरदर्द या माइग्रेन जैसी स्थिति बन सकती है।

अन्य सामान्य और छिपे हुए लक्षण

  • पिका (Pica Syndrome): बर्फ, मिट्टी, चॉक या कच्चा चावल खाने की असामान्य तलब होना।
  • बालों का झड़ना: बालों की जड़ों (Follicles) को पोषक तत्व और ऑक्सीजन न मिलने के कारण बाल तेजी से पतले होकर झड़ने लगते हैं।
  • जीभ में सूजन या छाले (Glossitis): जीभ का चिकना, लाल और दर्दनाक हो जाना।
  • रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (Restless Legs Syndrome): रात को सोते समय पैरों में अजीब सी बेचैनी या खिंचाव महसूस होना, जिसके कारण पैर हिलाने की जरूरत पड़ती है।
कारणविवरण
असंतुलित आहारभोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों की कमी।
खून की कमी (Blood Loss)महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म (Heavy Menstruation), आंतरिक रक्तस्राव (जैसे अल्सर या बवासीर)।
खराब अवशोषण (Poor Absorption)सीलिएक रोग, क्रोहन रोग या पेट की सर्जरी के कारण आंतों द्वारा आयरन न सोख पाना।
गर्भावस्था (Pregnancy)भ्रूण के विकास के लिए शरीर को दोगुनी मात्रा में खून और आयरन की आवश्यकता होती है।

आयरन की कमी को दूर करने के उपाय

  • शाकाहारी स्रोत: पालक, मेथी, बथुआ, चुकंदर, अनार, खजूर, मुनक्का, अंजीर, भुने चने, कद्दू के बीज और गुड़।
  • दालें व अनाज: राजमा, सोयाबीन, मसूर की दाल, बाजरा और रागी।
  • गैर-शाकाहारी स्रोत: अंडे, चिकन लिवर और लाल मांस।
  • विटामिन-C का साथ जरूरी: शरीर प्लांट-बेस्ड (गैर-हीम) आयरन को सीधे आसानी से अवशोषित नहीं कर पाता। भोजन में नींबू का रस, संतरा, आंवला, अमरूद या टमाटर जैसे विटामिन-C युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने से आयरन का अवशोषण 3 गुना तक बढ़ जाता है।
  • चाय-कॉफी का सेवन सीमित करें: भोजन करने के तुरंत पहले या बाद में चाय और कॉफी पीने से बचें। इनमें मौजूद टैनिन (Tannins) और फाइटेट्स (Phytates) आयरन को बांध लेते हैं और शरीर को उसे सोखने नहीं देते। भोजन और चाय के बीच कम से कम 1 घंटे का अंतर रखें।
  • लोहे के बर्तनों का प्रयोग: पारंपरिक रूप से लोहे की कड़ाही या तवे पर खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ती है।

कब करवाएं मेडिकल जांच?

यदि स्वस्थ खान-पान के बावजूद ठंड लगना, कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याएं 2-3 हफ्तों से अधिक समय तक बनी रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित जांच कराने की सलाह देते हैं:

सीबीसी (Complete Blood Count): हीमोग्लोबिन (Hb) और आरबीसी की संख्या जांचने के लिए।

सीरम फेरिटिन टेस्ट (Serum Ferritin): शरीर में स्टोर (जमा) हुए आयरन के स्तर को मापने के लिए।

टीआईबीसी (Total Iron Binding Capacity): रक्त में आयरन को ले जाने की क्षमता देखने के लिए।

डॉक्टर की सलाह के बिना स्वयं आयरन की दवाइयां या सप्लीमेंट्स न लें, क्योंकि शरीर में आयरन की अधिकता (Iron Overload) भी लिवर और दिल के लिए नुकसानदेह हो सकती है। सही खान-पान, समय पर जांच और आवश्यक चिकित्सीय परामर्श से आयरन की कमी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

Updated on:
16 Aug 2026 08:10 pm
Published on:
16 Aug 2026 08:10 pm