
मध्य-पूर्व में तनाव का केंद्र अब केवल ग़ाज़ा पट्टी तक सीमित नहीं रह गया है। उत्तरी इज़रायल (Israel) और लेबनान सीमा, जिसे 'ब्लू लाइन' (Blue Line) के नाम से जाना जाता है, अब एक नए और विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर खड़ी हुई है। इज़रायली रक्षा बलों (IDF) और ईरान समर्थित शिया सशस्त्र गुट 'हिज़्बुल्लाह' (Hezbollah) के बीच रॉकेट हमलों, ड्रोन स्ट्राइक और जवाबी हवाई कार्रवाई का सिलसिला जारी है। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यह 'कैलकुलेटेड एस्केलेशन' अब बेक़ाबू होने के कगार पर है, जो पूरे क्षेत्र को एक ऐसे युद्ध में धकेल सकता है, जिसके परिणाम ग़ाज़ा संघर्ष से भी अधिक भयावह होंगे।
हिज़्बुल्लाह ने अपनी युद्ध नीति में स्पष्ट बदलाव किया है। वह अब महज़ अनगाइडेड रॉकेट्स (Unguided Rockets) पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसने इज़रायल के मशहूर 'आयरन डोम' (Iron Dome) रक्षा प्रणाली को भेदने के लिए सटीक हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। हिज़्बुल्लाह की ओर से दागी जा रही एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें (ATGM) ज़मीन के बेहद क़रीब से उड़ान भरती हैं, जिससे रडार के लिए उन्हें ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है। इसके अतिरिक्त, विस्फोटक से लदे 'कामिकेज़' (आत्मघाती) ड्रोन्स का झुंड एक साथ भेज कर इज़रायली एयर डिफ़ेंस को भ्रमित (Decoy tactics) करने की कोशिश की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आयरन डोम की बैटरियों को ख़ाली करना है, ताकि सैन्य और नागरिक ठिकानों पर सीधा और सटीक वार किया जा सके।
| सामरिक पहलू (Strategic Aspect) | हमास (ग़ाज़ा पट्टी का संघर्ष) | हिज़्बुल्लाह (लेबनान सीमा का विवाद) |
| सैन्य क्षमता और शस्त्रागार | मुख्य रूप से हल्के हथियार, सीमित अनगाइडेड रॉकेट और सुरंगे। | 1.5 लाख से अधिक उन्नत गाइडेड मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें और पेशेवर लड़ाके। |
| भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति | चारों तरफ़ से घिरा, घनी आबादी वाला और सीमित शहरी इलाक़ा। | विशाल पहाड़ी क्षेत्र, सीरिया व ईरान से खुली सप्लाई लाइन और स्ट्रैटेजिक डेप्थ। |
| इज़रायल पर संभावित प्रभाव | दक्षिणी क्षेत्र तक सीमित ख़तरा, नागरिक बुनियादी ढांचे को आंशिक नुकसान। | पूरे इज़रायल (हाइफ़ा, तेल अवीव) के पावर ग्रिड और रणनीतिक ठिकानों को भेदने की क्षमता। |
वर्तमान परिस्थिति का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि लेबनान सीमा का यह विवाद अब ग़ाज़ा युद्ध के साये से स्वतंत्र होकर अपना वजूद क़ायम कर चुका है। उत्तरी इज़रायल से लगभग 80,000 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किया गया है, जिससे वह पूरा इलाक़ा एक 'बफ़र ज़ोन' (Buffer Zone) में तब्दील हो चुका है। हिज़्बुल्लाह की सैन्य ताक़त हमास से कई गुना अधिक है। यदि दोनों पक्षों के बीच पूर्ण युद्ध (All-out war) छिड़ता है, तो यह केवल लेबनान तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें सीरिया, इराक़ और सीधे तौर पर ईरान के शामिल होने की प्रबल आशंका है, जो इसे एक 'बहु-मोर्चा युद्ध' (Multi-front War) बना देगा।