
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बड़ी तकनीकी कामयाबी हासिल की है। इसरो ने बताया कि उसने अपने स्वदेशी सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के अपरेटेड (बढ़े हुए) थ्रस्ट पर "फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट" सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 9 सितंबर को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में किया गया। स्पेस एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इसकी जानकारी दी है। एजेंसी ने बताया कि टेस्ट किया गया इंजन आने वाले LVM3 मिशन के C32 अपर स्टेज के लिए तय है।
सीई20 इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) द्वारा विकसित एक पूर्णतः स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन है, जो तरल ऑक्सीजन और तरल हाइड्रोजन ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है। यह इंजन LVM3 (पूर्व नाम GSLV मार्क-3) रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है। इसी इंजन के दम पर एलवीएम3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 समेत कई भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाया है।
गौरतलब है कि 1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत को क्रायोजेनिक इंजन तकनीक विदेश से नहीं मिल पाई थी, जिसके बाद इसरो ने वर्षों की मेहनत से यह तकनीक खुद विकसित की। ताजा हॉट टेस्ट में इंजन की थ्रस्ट क्षमता को पहले से बढ़ाकर परखा गया है, ताकि यह भारी और महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए और सक्षम बन सके।
इसरो के अनुसार, टेस्ट किया गया सीई20 इंजन एलवीएम3 के सी32 अपर स्टेज के लिए तय किया गया है, जो भारत के मानवयुक्त गगनयान अभियान से सीधे तौर पर जुड़ा है। गगनयान मिशन के लिए एलवीएम3 रॉकेट को "ह्यूमन-रेटेड" यानी अंतरिक्षयात्रियों को सुरक्षित रूप से ले जाने लायक बनाया जा रहा है, जिसमें क्रू एस्केप सिस्टम और अन्य सुरक्षा प्रणालियों के अतिरिक्त भार को झेलने के लिए इंजन की थ्रस्ट क्षमता बढ़ाना जरूरी है। यही वजह है कि इसरो सी32 स्टेज के लिए अपरेटेड सीई20 इंजन को चरणबद्ध तरीके से परख रहा है, ताकि उड़ान से पहले इसकी विश्वसनीयता पूरी तरह सुनिश्चित हो सके।
इसरो ने बताया कि इसी हॉट टेस्ट के दौरान गगनयान मिशन के सी32 स्टेज के लिए बनाए गए एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM) के प्रदर्शन का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया। यह मॉड्यूल क्रायोजेनिक स्टेज में तरल ऑक्सीजन टैंक के भीतर सही दबाव बनाए रखने का काम करता है, जो इंजन के सुरक्षित व स्थिर प्रदर्शन के लिए अहम माना जाता है। एक ही परीक्षण में इंजन और सहायक प्रणाली दोनों की सफलता गगनयान कार्यक्रम की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के परीक्षण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई मायनों में फायदेमंद हैं। सबसे पहले, थ्रस्ट क्षमता बढ़ने से एलवीएम3 रॉकेट और भारी पेलोड यानी उपग्रह या मानव मॉड्यूल को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम होगा, जिससे भारत को भारी संचार उपग्रहों या चंद्रयान जैसे मिशनों के लिए विदेशी लॉन्च वाहनों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।
दूसरा फायदा है कि यह टेस्ट गगनयान मिशन को मानवयुक्त उड़ान के करीब ले जाता है, जिसके तहत पहले मानवरहित परीक्षण उड़ानें और उसके बाद अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाना प्रस्तावित है। तीसरा फायदा है कि स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक में यह प्रगति आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम है, क्योंकि यह तकनीक कभी भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध नहीं कराई गई थी। लंबी अवधि में यह तकनीक प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य के चंद्र व ग्रहीय अभियानों के लिए भी आधार तैयार करेगी।
इसरो ने यह भी कहा है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे सुधारों का मकसद एक व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (नेशनल स्पेस इकोसिस्टम) तैयार करना है, जिसमें निजी उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थान एजेंसी के साथ मिलकर काम करें, जबकि इसरो खुद एडवांस्ड रिसर्च, नई तकनीक और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सके। इस मॉडल से आने वाले वर्षों में भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। सीई20 इंजन का यह सफल परीक्षण भारत के अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम, मानव अंतरिक्ष उड़ान और दीर्घकालिक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।