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उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा क्यों नहीं हिली? सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच आस्था और प्रशासन आमने-सामने

उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए गए खड़े हनुमान मंदिर की करीब 8 फुट ऊंची प्रतिमा को चार दिनों में चार बार कोशिश के बावजूद नहीं हटाया जा सका। अब प्रतिमा की नींव और संरचना की ग्राउंड स्कैनिंग की तैयारी है।
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भारत

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Adarsh Thakur

Sep 10, 2026

Khade Hanuman Mandir

उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर क्यों नहीं हिले? (फोटोः ChatGPT)

मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच एक प्राचीन हनुमान प्रतिमा को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर श्रद्धालुओं तक सबका ध्यान खींच लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा हटाया गया, लेकिन करीब 8 फुट ऊंची खड़े हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। चार दिनों में चार बार कोशिश के बाद भी जब आधुनिक मशीनें काम नहीं आईं, तो अब प्रतिमा की नींव और संरचना की वैज्ञानिक जांच की तैयारी है।

चार दिन और चार कोशिशें, फिर भी नहीं हिली प्रतिमा

यह मामला उज्जैन के सती गेट क्षेत्र में स्थित खड़े हनुमान मंदिर से जुड़ा है। सिंहस्थ 2028 से पहले शहर में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम चल रहा है। इसी क्रम में कंठाल चौराहा से छत्री चौक के बीच सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई गई। मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए उसके बाहरी ढांचे को हटाया गया, लेकिन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया।

रिपोर्टों के अनुसार, नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम ने हाइड्रोलिक मशीन, क्रेन और अन्य भारी उपकरणों की मदद से प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया। चार दिनों में चार बार कोशिश की गई, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इसके बाद मशीनों के इस्तेमाल को रोककर आगे की जांच पर विचार किया जा रहा है।

नींव कितनी गहरी है, अभी साफ नहीं

इस मामले में सबसे बड़ा तकनीकी सवाल प्रतिमा की नींव को लेकर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिमा जमीन के भीतर कितनी गहराई तक जुड़ी हुई है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि प्रतिमा एक ही विशाल पत्थर से बनी हो सकती है। ऐसे में उसे सीधे खींचकर या उठाकर हटाने से टूटने या खंडित होने का खतरा हो सकता है।

अब ग्राउंड स्कैनिंग के जरिए प्रतिमा के नीचे की संरचना और नींव की जानकारी जुटाने की तैयारी है। विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह तय किया जाएगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सड़क का काम आगे बढ़ाने के साथ ही प्रतिमा को किसी भी संभावित नुकसान से बचाना भी है।

170 साल पुरानी या उससे भी प्राचीन?

खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर एक और महत्वपूर्ण सवाल उसकी वास्तविक उम्र का है। स्थानीय स्तर पर इसे करीब 170 साल पुराना बताया जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों ने इसके परमार वंश और राजा भोज के काल से जुड़े होने की संभावना भी जताई है। यदि यह दावा वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जांच में सही साबित होता है, तो प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। हालांकि, अभी इसे प्रमाणित इतिहास नहीं माना जा सकता।

यही वजह है कि प्रतिमा की शिफ्टिंग अब केवल निर्माण कार्य का विषय नहीं रह गई है। इसके ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि होने पर संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। उज्जैन जैसे प्राचीन धार्मिक शहर में किसी पुरानी प्रतिमा की संरचना और उम्र की जांच करना इसलिए भी जरूरी है, ताकि जल्दबाजी में कोई नुकसान न हो।

भक्तों के लिए आस्था का केंद्र

प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। कई भक्त इसे भगवान की इच्छा और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसे पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि हनुमानजी अपना स्थान छोड़ना नहीं चाहते। कुछ लोग इस घटना को दैवीय संकेत मान रहे हैं।

स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने प्रतिमा की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उसे हटाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े इस स्थान पर कोई भी फैसला सावधानी और सहमति के साथ लिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ की तैयारियों को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी भी है।

विकास और विरासत के बीच संतुलन की परीक्षा

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए उज्जैन में सड़क, पुल, यातायात और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजनाएं चल रही हैं। इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, इसलिए बुनियादी ढांचे का मजबूत होना जरूरी है। लेकिन इस तरह के मामलों में विकास के साथ धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

फिलहाल प्रतिमा की शिफ्टिंग को लेकर अंतिम फैसला जांच के बाद ही होने की उम्मीद है। क्या यह प्रतिमा सचमुच एक विशाल पत्थर से बनी है? क्या इसकी नींव जमीन के भीतर बहुत गहरी है? और क्या इसका इतिहास राजा भोज के काल तक जाता है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल सकते हैं। फिलहाल, उज्जैन का यह खड़े हनुमान मंदिर आस्था, इतिहास और विकास के बीच संतुलन की एक बड़ी मिसाल बना हुआ है।