
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का एजेंडा सिर्फ कूटनीति और भू-राजनीति तक सीमित नहीं रहने वाला। इस बार भारत तकनीक, विकास, व्यापार और अपराध-नियंत्रण को भी शिखर सम्मेलन के केंद्र में लाने की तैयारी कर रहा है। यह सम्मेलन एक और मायने में खास है। इस साल ब्रिक्स के औपचारिक गठन (2006) को 20 साल पूरे हो रहे हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सबसे अहम प्रस्तावों में से एक आर्थिक भगोड़ों को लेकर है। भारत इस सम्मेलन में एक ऐसा ढांचा प्रस्तावित करने जा रहा है, जिससे सदस्य देशों के बीच वित्तीय और जांच संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज और समयबद्ध हो सके, ताकि आर्थिक अपराध करके देश से भागने वाले अपराधियों को पकड़ा जा सके।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्तावित ढांचे में समय-सीमा के भीतर सूचना साझा करना, जांच के शुरुआती चरण में एक समान (स्टैंडर्डाइज्ड) प्रारूप में जानकारी का आदान-प्रदान, संपत्ति वापस लाने (एसेट रिकवरी) की व्यवस्था, तकनीकी सहयोग, संस्थागत संपर्क और एक स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया जैसे बिंदु शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इसका मकसद वित्तीय अपराध के मामलों में एक मजबूत और समन्वित प्रतिक्रिया तैयार करना है, क्योंकि ऐसे अपराध अक्सर कई देशों और क्षेत्राधिकारों तक फैले होते हैं।
ब्रिक्स में सम्मेलन में आर्थिक भगोड़ों को लेकर पेश किए जाने वाली पहल की खासियत है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जाएगी। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सदस्य देशों के बीच सूचनाएं तेजी से पहुंचें। इसके लिए AI का इस्तेमाल किया जाएगा और जांच एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने के लिए एक समान प्रारूप तय किया जाएगा। खास बात यह है कि यह सिर्फ आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं रहेगा। यही कार्यप्रणाली आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी अपनाई जाएगी। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सूचना साझाकरण, मेंटरशिप, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI—इन चार स्तंभों के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि यह सिर्फ भारत की एकतरफा पहल नहीं है। सम्मेलन से पहले हुई एक बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों की जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों में वांछित भगोड़ों का पता लगाने में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुई हैं। यह नई व्यवस्था मौजूदा औपचारिक कानूनी सहायता (म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस) और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं की जगह नहीं लेगी, बल्कि उन्हें पूरक बनाएगी। खासकर उन मामलों में जहां अपराधी फिनटेक प्लेटफॉर्म या क्रिप्टो जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों के जरिए अपनी पहचान और पैसा छिपाने की कोशिश करते हैं।
भारत पहले भी G20 की अपनी अध्यक्षता के दौरान क्रिप्टो-एसेट्स को लेकर एक साझा वैश्विक नियामक मॉडल की वकालत कर चुका है और ब्रिक्स में यह नया प्रस्ताव उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख नया नहीं है, बल्कि इस साल की शुरुआत से ही स्पष्ट है। जून 2026 में ब्राज़ील के ब्रासीलिया में हुए 11वें ब्रिक्स पार्लियामेंट्री फोरम में सदस्य देशों ने साझा घोषणा में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की सामूहिक रूप से निंदा की थी।
आतंकवाद के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" यानी शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने की बात कही थी। इसी फोरम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की थी कि अगला ब्रिक्स पार्लियामेंट्री फोरम 2026 में भारत में आयोजित होगा। उस बैठक में AI को लेकर भी सहमति बनी थी कि इसका उपयोग जरूरी है, लेकिन इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। एक सिद्धांत जो अब आर्थिक भगोड़ों और आतंकियों को ट्रैक करने के नए प्रस्ताव में भी झलकता है।
दिल्ली सम्मेलन में एजेंडा सिर्फ अपराध-नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगा। चर्चा का दायरा कृषि, बीज और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी, तथा व्यापार को सुगम बनाने के लिए कस्टम्स और डिजिटल क्षमता निर्माण तक भी फैला होगा। साथ ही, भारत सम्मेलन के मंच से संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार का अपना पुराना एजेंडा भी आगे बढ़ाएगा, ताकि ग्लोबल साउथ के देशों को फैसले लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिल सके।
Updated on:
09 Sept 2026 06:25 pm
Published on:
09 Sept 2026 06:25 pm
