
गणेश चतुर्थी 2026 (इमेज सोर्स- Chatgpt)
गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान की मूर्तियों का बाजार सज गया है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। गणेश चतुर्थी से पहले बाजार में मूर्तियों की कीमत 300 रुपये से लेकर 14,000 रुपये तक है। ये मूर्तियां आकार में आधा फीट से लेकर करीब 10-12 फीट तक उपलब्ध हैं।
गणेश चतुर्थी, भगवान गणेश के जन्मउत्सव के रूप में पूरे भारत में, विशेषकर महाराष्ट्र में, अत्यंत धूमधाम से मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती ने अपने उबटन से गणेश जी की रचना की थी और उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया था। भगवान शिव और गणेश के बीच हुए प्रसंग के उपरांत उन्हें हाथी का मस्तक प्रदान किया गया और शिव जी ने उन्हें 'प्रथम पूज्य' होने का वरदान दिया, जिसका अर्थ है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा अनिवार्य है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकमान्य तिलक ने इस धार्मिक उत्सव को एक सार्वजनिक और सामाजिक आंदोलन का रूप दिया, ताकि लोग एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की अलख जगा सकें। दस दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान भगवान गणेश की मूर्तियों की स्थापना की जाती है, पंडाल सजते हैं, और अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ उनका विसर्जन किया जाता है। यह पर्व ज्ञान, बुद्धि और विघ्ननाशक की आराधना का प्रतीक है।
गणेश चतुर्थी के लिए तैयार की गई मूर्तियों की विविधता ने भक्तों को आकर्षित किया है। स्थानीय कारीगरों ने विभिन्न आकारों और डिजाइनों में मूर्तियां तैयार की हैं। भक्त अपने बजट और स्थान के अनुसार मूर्तियों का चयन कर सकते हैं। इस बार बाजार में विशेष रूप से बड़े आकार की मूर्तियों की मांग बढ़ी है।
गणेश चतुर्थी के दौरान भक्तों के लिए रंगों का चयन भी महत्वपूर्ण है। सुबह की पूजा के लिए पीला या सफेद रंग का पहनावा उपयुक्त माना जाता है। परिवार के साथ उत्सव मनाने के लिए हरा या नारंगी रंग का चयन करना बेहतर होता है। वहीं, शाम की आरती या विशेष समारोह के लिए लाल या मैरून रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इस प्रकार, रंगों का चयन पूजा और उत्सव के माहौल को और भी खास बना देता है।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष व्यंजनों की तैयारी भी जोरों पर है। आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण के फिटनेस ट्रेनर ने शुगर-फ्री मोदक की रेसिपी साझा की है, जिससे भक्त बिना शुगर के भी इस खास मिठाई का आनंद ले सकें। इसके अलावा, उकडिचे मोदक, जो एक पारंपरिक भोग है। इस पारंपरिक भोग को भी तैयार किया जा सकता है।
गणेश चतुर्थी का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। इस अवसर पर लोग एकत्रित होकर उत्सव मनाते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं। इस बार भी भक्तों में उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा है, जिससे यह पर्व और भी खास बन जाएगा।
गणेश चतुर्थी के दौरान सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने कहा है कि वे इस पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे। भक्तों को सलाह दी गई है कि वे मूर्तियों की स्थापना और विसर्जन के दौरान सावधानी बरतें। इसके अलावा, मूर्तियों की चोरी की घटनाओं से बचने के लिए भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
बेंगलुरु में गणेश चतुर्थी से पहले एक चोरी की घटना सामने आई है, जहां 4 चोरों ने सड़क किनारे से गणपति बप्पा की मूर्ति चुरा ली। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई और पुलिस आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश कर रही है। इस प्रकार की घटनाएं भक्तों के मन में चिंता पैदा कर रही हैं।
Updated on:
09 Sept 2026 03:21 pm
Published on:
09 Sept 2026 03:21 pm
