
सांकेतिक इमेजः ChatGPT
भारत में घूमने के लिए सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती ही नहीं; सदियों पुरानी कला, वास्तुकला और इतिहास भी मौजूद है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कई धरोहरें हैं, जिन्हें UNESCO ने विश्व धरोहर स्थाल (World Heritage Site) के रूप में मान्यता दी है। अब इन ऐतिहासिक जगहों तक पहुंचने के लिए तेज रफ्तार वंदे भारत एक्सप्रेस भी यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प बनती जा रही हैं।
कुछ वंदे भारत रूट सीधे इन पर्यटन शहरों तक पहुंचाते हैं, जबकि कुछ रूट ऐसे हैं जहां ट्रेन से उतरने के बाद थोड़ी सड़क यात्रा करके UNESCO साइट तक पहुंचा जा सकता है। यानी अगर आप इतिहास, संस्कृति और आधुनिक रेल यात्रा को एक साथ अनुभव करना चाहते हैं, तो ये सात रूट खास हो सकते हैं। UNESCO की आधिकारिक सूची में ताजमहल, खजुराहो, कुतुब मीनार, रानी-की-वाव, होयसला स्मारक समूह और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसी भारतीय धरोहरें शामिल हैं।
अगर आपकी पहली पसंद मुगलकालीन वास्तुकला है, तो दिल्ली-आगरा वंदे भारत रूट काफी उपयोगी हो सकता है। आगरा पहुंचकर आप दुनिया के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में शामिल ताजमहल देख सकते हैं। इसके अलावा आगरा फोर्ट भी यहां का प्रमुख ऐतिहासिक आकर्षण है।
ताजमहल को UNESCO ने 1983 में World Heritage Site के रूप में शामिल किया था। आगरा फोर्ट भी उसी साल UNESCO की सूची में आया।
ट्रैवल आइडिया: एक दिन ताजमहल और आगरा फोर्ट के लिए रखें और समय मिले तो फतेहपुर सीकरी को भी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
खजुराहो की पहचान उसके बारीक पत्थर के काम और मंदिरों की अनोखी वास्तुकला से है। खजुराहो ग्रुप ऑफ मॉन्यूमेंट्स UNESCO World Heritage Site है।
यहां मंदिरों में नागर शैली की वास्तुकला का शानदार उदाहरण देखने को मिलता है। UNESCO के अनुसार खजुराहो के स्मारक समूह में 23 मंदिर शामिल हैं, जो अलग-अलग समूहों में फैले हुए हैं।
बनारस-खजुराहो वंदे भारत इस ऐतिहासिक यात्रा को आसान बनाने वाला विकल्प है। ट्रेन यात्रा के साथ आप वाराणसी की आध्यात्मिक संस्कृति और खजुराहो की स्थापत्य कला को एक ही ट्रिप में अनुभव कर सकते हैं।
दक्षिण भारत की ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखना है तो चेन्नई-मैसूरु वंदे भारत रूट उपयोगी हो सकता है। मैसूरु पहुंचने के बाद कर्नाटक के बेलूर, हलेबीडु और सोमनाथपुरा के होयसला मंदिरों की यात्रा की जा सकती है।
इन स्मारकों को UNESCO ने Sacred Ensembles of the Hoysalas के रूप में World Heritage सूची में शामिल किया है। इन मंदिरों की पहचान उनकी बेहद बारीक पत्थर की नक्काशी और शानदार स्थापत्य शैली से होती है।
यह यात्रा उन लोगों के लिए खास है जिन्हें मंदिर, इतिहास और वास्तुकला में दिलचस्पी है।
दिल्ली से देहरादून जाने वाले यात्रियों के लिए राजधानी में ही एक बड़ी विश्व धरोहर मौजूद है, कुतुब मीनार और उसके स्मारक।
UNESCO के मुताबिक कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है और इसका निर्माण लाल और बफ सैंडस्टोन से हुआ है। इसके परिसर में कुतुब मस्जिद, अलाई दरवाजा, इल्तुतमिश का मकबरा और लौह स्तंभ जैसी ऐतिहासिक संरचनाएं भी हैं।
इसलिए देहरादून की यात्रा के साथ दिल्ली में एक अतिरिक्त दिन निकालकर इस ऐतिहासिक परिसर को देखा जा सकता है।
होयसला स्थापत्य को विस्तार से देखने के लिए मैसूरु को बेस बनाया जा सकता है। बेलूर, हलेबीडु और सोमनाथपुरा में मौजूद मंदिरों की नक्काशी देखकर यह समझ आता है कि सदियों पहले भारतीय कारीगर पत्थर पर कितनी बारीकी से काम करते थे।
UNESCO ने इन मंदिरों के समूह को 2023 में World Heritage सूची में शामिल किया।
ध्यान रखें कि इन धरोहर स्थलों के लिए ट्रेन के बाद सड़क मार्ग से आगे की यात्रा करनी पड़ सकती है।
गुजरात की ऐतिहासिक धरोहरों में पाटन की रानी-की-वाव बेहद खास है। यह सामान्य कुएं से बिल्कुल अलग है। जमीन के नीचे उतरती इसकी सीढ़ियां और दीवारों पर बनी कलात्मक मूर्तियां इसे अनोखा बनाती हैं।
रानी-की-वाव को UNESCO ने 2014 में World Heritage Site का दर्जा दिया था।
अहमदाबाद पहुंचकर पाटन की ओर सड़क यात्रा करके इस धरोहर को देखा जा सकता है। इसलिए यह रूट गुजरात घूमने वालों के लिए एक अच्छा कॉम्बिनेशन बन सकता है।
मुंबई-शिर्डी वंदे भारत की सबसे खास बात यह है कि यात्रा का शुरुआती पड़ाव ही एक UNESCO World Heritage Site है, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST)।
UNESCO के अनुसार यह इमारत Victorian Gothic Revival और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला का शानदार मेल है। इसे 2004 में World Heritage Site का दर्जा मिला था।
यानी ट्रेन पकड़ने से पहले ही आप एक ऐसी इमारत देख सकते हैं, जो खुद भारत के रेलवे इतिहास और वास्तुकला की महत्वपूर्ण विरासत है।
इन सातों रूट को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर UNESCO स्थल ट्रेन स्टेशन के बिल्कुल पास नहीं है। कई जगहों पर वंदे भारत से नजदीकी बड़े शहर तक पहुंचने के बाद टैक्सी, बस या स्थानीय परिवहन से आगे जाना होगा। इसलिए टिकट बुक करने से पहले ट्रेन का वर्तमान शेड्यूल, ठहराव और आगे की सड़क यात्रा जरूर जांच लें।
वंदे भारत एक्सप्रेस ने देश के कई शहरों के बीच यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाया है। ऐसे में अगर आपकी अगली छुट्टी सिर्फ घूमने के बजाय कुछ सीखने और भारत की विरासत को करीब से समझने के लिए है, तो इन रूट्स को अपनी यात्रा सूची में शामिल किया जा सकता है।
एक तरफ तेज रफ्तार वंदे भारत और दूसरी तरफ सदियों पुरानी भारतीय विरासत, यह कॉम्बिनेशन आपकी अगली यात्रा को यादगार बना सकता है।
Updated on:
09 Sept 2026 10:40 am
Published on:
09 Sept 2026 10:40 am
