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भारत-चीन के बीच ऐतिहासिक सैन्य वार्ता: सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे दोनों देशों के बीच संबंध, क्या होगा असर?

भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण वार्ता हुई है। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक दिशा में यह बड़ा कदम है।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 08, 2026

Important talks between India and China

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत और चीन के बीच संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने दी। यह बयान 6 और 7 सितंबर को पूर्वी क्षेत्र में आयोजित पहले कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद आया है।

भारत-चीन के सैन्य संबंधों को मजबूत करने पर जोर

दोनों देशों के बीच भारतीय पक्ष पर वाचा (Wacha) में 6 सितंबर को और चीनी पक्ष पर दमाई (Damai) में 7 सितंबर को वार्ता हुई। यह दो दिवसीय बैठक दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस वार्ता का उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता को बनाए रखना है।

भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत

रंधीर जैसवाल ने कहा कि भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब हम लोगों के बीच संबंधों या सामान्यीकरण की बात करते हैं, तो वीजा मुद्दे भी महत्वपूर्ण होते हैं। यह मुद्दे लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

भारत-चीन वार्ता एक महत्वपूर्ण कदम

भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में यह वार्ता एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे संवाद नियमित रूप से होते रहें। यह ऐतिहासिक बैठक अरुणाचल प्रदेश के किबिथू क्षेत्र के पास स्थित दुर्गम वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट (Border Personnel Meeting Point) पर हुई। इससे पहले इस स्तर की सैन्य वार्ताएं केवल लद्दाख के चुशुल-मोल्डो क्षेत्र तक ही सीमित थीं। इस महत्वपूर्ण सैन्य वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने किया, जो नागालैंड के रंगापहार (डिमापुर) स्थित भारतीय सेना की 3 कोर (स्पीयर कॉर्प्स) के कमांडर हैं।

विदेश मंत्रालय ने शांति वार्ता पर कहा था कि भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने 2020 में गलवान घाटी में हुए घातक संघर्षों के बाद गंभीर रूप से तनावपूर्ण हो चुके अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई उपाय किए हैं। उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत दौरे से कुछ दिन पहले आयोजित की गई थी।

भविष्य की संभावनाएं

भारत-चीन वार्ता के परिणामस्वरूप, दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है।