
केंद्र सरकार ने 2026 में निवेश नीतियों में कई बड़े बदलाव किए हैं। यह बदलाव सीधे आपके निवेश के अवसरों और रणनीतियों को प्रभावित करेंगे। आइए समझते हैं कि ये बदलाव क्या हैं? नए नियम किस प्रकार लागू होंगे और आपके ऊपर नई नीतियों का क्या असर होगा?
सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (G‑Secs) में निवेश को आकर्षक बनाने के लिए छूट की घोषणा की है। अब G‑Secs से प्राप्त होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर टैक्स नहीं लगेगा, बशर्ते यह 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद की आय हो। इसके साथ ही, FAR (Fully Accessible Route) के तहत अब 15, 30 और 40 वर्ष की नई G‑Sec इश्यू और Sovereign Green Bonds को शामिल किया गया है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक निवेश के अवसर बढ़ेंगे और भारत के बॉन्ड बाजार में स्थिरता आएगी।
10 मार्च 2026 को कैबिनेट ने सीमा साझा करने वाले देशों (Land Bordering Countries) से आने वाले निवेश के लिए FDI नीति में बदलाव को मंजूरी दी। अब महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को 60 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे इलेक्ट्रॉनिक घटक, पूंजीगत सामान और सौर सेल जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश को गति मिलेगी।
बजट 2026‑27 में यह घोषणा की गई कि अब व्यक्तिगत रूप से भारत के बाहर रहने वाले व्यक्ति (PROI) सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में पोर्टफोलियो निवेश योजना (PIS) के तहत निवेश कर सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल NRI/OCI को थी। अब एक व्यक्ति की सीमा 5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है, और कुल मिलाकर सभी PROI का निवेश सीमा 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी बाजार में प्रवेश आसान और आकर्षक होगा।
बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पिछले वर्ष के ₹11.2 लाख करोड़ से अधिक है। वित्तीय घाटा 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने के लिए मार्केट‑मेकिंग फ्रेमवर्क और टोटल रिटर्न स्वैप (TRS) जैसे साधन पेश किए गए हैं। इन कदमों से पूंजी बाजार में तरलता बढ़ेगी और निवेशकों को अधिक विकल्प मिलेंगे।
यदि आप निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह समय रणनीतिक सोच का है। विदेशी निवेशकों को G‑Secs और इक्विटी में नए अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। घरेलू निवेशक भी बॉन्ड बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में बढ़ते विकल्पों पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, निवेश से पहले किसी SEBI‑पंजीकृत सलाहकार से सलाह लेना आवश्यक है। साल 2026 में लागू हुई निवेश नीतियों ने विदेशी और घरेलू निवेशकों दोनों के लिए नए रास्ते खोले हैं। टैक्स में छूट, सीमा साझा करने वाले देशों से आसान निवेश, PROI की बढ़ी हुई इक्विटी सीमा और पूंजीगत व्यय में वृद्धि जैसे कदम निवेश के माहौल को मजबूत और आकर्षक बना रहे हैं।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है, व्यक्तिगत वित्तीय सलाह नहीं है)