
Phone Under Pillow Risk: रात के करीब 11 बजे हैं। आपने फोन पर आखिरी बार संदेश देखा, अलार्म लगाया और सोचा—“फोन पास ही रहने दो, सुबह काम आएगा।” फिर फोन तकिए के नीचे चला गया और आप सो गए।
यह आदत बहुत सामान्य लगती है। लेकिन सवाल है, क्या तकिए के नीचे फोन रखकर सोना वाकई सुरक्षित है? इसका जवाब थोड़ा अलग है। इंटरनेट पर अक्सर दावा किया जाता है कि तकिए के नीचे फोन रखने से मोबाइल की रेडिएशन सीधे दिमाग को नुकसान पहुंचाती है या कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इतने सीधे नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक कम स्तर के रेडियोफ्रीक्वेंसी संपर्क से स्वास्थ्य पर नुकसान का कोई स्पष्ट और लगातार प्रमाण नहीं मिला है। अमेरिकी एफडीए भी कहता है कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों का कुल भार मोबाइल फोन की रेडियोफ्रीक्वेंसी को स्वास्थ्य समस्याओं से नहीं जोड़ता। तो फिर तकिए के नीचे फोन रखने से असली परेशानी क्या है?
तकिया, गद्दा और कंबल ऐसी नरम सतह हैं जो हवा का प्रवाह रोक सकती हैं। अगर फोन चार्जिंग पर है, गर्मी और बढ़ सकती है। यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा संघ (NFPA) साफ तौर पर सलाह देता है कि मोबाइल या दूसरे लिथियम-आयन बैटरी वाले उपकरणों को तकिए के नीचे, बिस्तर पर या सोफे पर चार्ज नहीं करना चाहिए। इन्हें कठोर और खुली सतह पर चार्ज करना सुरक्षित है।
अमेरिकी एफडीए की सुरक्षा सलाह भी कहती है कि चार्जिंग उपकरण को ऐसी जगह नहीं रखना चाहिए, जहां वह आसानी से गर्म हो सके या ज्वलनशील सामग्री के संपर्क में आए। यानी खतरा यह नहीं कि हर रात तकिए के नीचे फोन रखने से आग लग जाएगी। लेकिन फोन को चार्जिंग के दौरान तकिए के नीचे रखना अनावश्यक और टालने योग्य जोखिम है।
मान लीजिए फोन गर्म नहीं हुआ और कोई सुरक्षा समस्या भी नहीं हुई। फिर भी फोन आपके बिस्तर के पास रहने का मतलब है, नोटिफिकेशन, संदेश, वीडियो, सोशल मीडिया और बार-बार स्क्रीन देखने का मौका।
शाम की तेज रोशनी और स्क्रीन शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है। सीडीसी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से आने वाली रोशनी, खासकर नीली रोशनी, सोने में दिक्कत पैदा कर सकती है और नींद-जागने के चक्र को प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन की 2025 की सर्वे रिपोर्ट में 38 प्रतिशत वयस्कों ने कहा कि सोने से पहले समाचार या दूसरी सामग्री देखने के कारण उनकी नींद थोड़ी या काफी खराब होती है। संगठन सोने से 30 से 60 मिनट पहले फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाने की सलाह देता है।
फोन तकिए के नीचे होने का एक और असर है। आप उसे 'पास' महसूस करते हैं। रात में संदेश या नोटिफिकेशन आने पर स्क्रीन जल सकती है, कंपन हो सकता है और आपका दिमाग सतर्क अवस्था में जा सकता है। भले ही आप पूरी तरह जागें नहीं, बार-बार होने वाली ऐसी रुकावटें नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
और नींद कोई छोटी चीज नहीं है। सीडीसी के मुताबिक अधिकांश वयस्कों को हर रात कम से कम 7 घंटे नींद की जरूरत होती है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलना मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बढ़े जोखिम से जुड़ा है।
जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति फोन को दूसरे कमरे में रखे। लेकिन अगर फोन आपका अलार्म है, तो उसे तकिए के नीचे रखने की जरूरत नहीं है। इसे बिस्तर से कुछ दूरी पर किसी कठोर, खुली सतह पर रखें। अगर चार्ज करना है तो बिस्तर, तकिए और कंबल से दूर रखें। रात में अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। और अगर फोन की बैटरी फूल गई है, फोन असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, उसमें क्षति दिखाई दे रही है या चार्जिंग के दौरान गंध/धुआं जैसी असामान्य चीज महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें।
तकिए के नीचे फोन रखकर सोने की आदत का सबसे बड़ा सबक यह है कि डर फैलाने की जरूरत नहीं, लेकिन सावधानी छोड़ने की भी नहीं। मोबाइल की रेडियोफ्रीक्वेंसी को लेकर कैंसर जैसी बातों का दावा उपलब्ध प्रमाणों से कहीं ज्यादा मजबूत तरीके से नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन चार्जिंग के दौरान गर्मी और आग का जोखिम वास्तविक है और रात में स्क्रीन व नोटिफिकेशन आपकी नींद बिगाड़ सकते हैं।
इसीलिए आज रात फोन को तकिए के नीचे रखने से पहले बस एक सवाल खुद से पूछिए, 'क्या अलार्म के लिए मेरा फोन सच में मेरे सिर के नीचे या तकिए के आसपास होना जरूरी है?' जवाब शायद आपको अपनी सोने की जगह बदलने के लिए काफी है।