
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) अपने 'तेरे मेरे सपने' प्री-मैरिटल काउंसलिंग प्रोग्राम को देश के हर तालुका/ब्लॉक तक पहुंचाने की योजना बना रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाली इस संवैधानिक संस्था का लक्ष्य हर तालुका/ब्लॉक में कम से कम एक प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर (PMCC) खोलना है, ताकि शादी करने जा रहे जोड़ों को सार्थक बातचीत के लिए मंच मिल सके।
'तेरे मेरे सपने' प्रोग्राम NCW ने पिछले साल 8 मार्च 2025 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुरू किया था। NCW की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक शुरुआत में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश, इन 9 राज्यों में 23 सेंटर खोले गए थे। एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने उस समय बताया था कि आयोग ने इस प्रोग्राम को तैयार करने के लिए देशभर के 100 से ज्यादा विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा किया था।
शुरुआती योजना हर जिले में कम से कम एक सेंटर खोलने की थी। अब यह महत्वाकांक्षा जिला स्तर से आगे बढ़कर हर तालुका/ब्लॉक तक पहुंच गई है, जो एक बड़ा विस्तार है, क्योंकि भारत में जिलों की तुलना में तालुका/ब्लॉक की संख्या कई गुना ज्यादा (करीब 6,000 से अधिक) है।
मीडिया रिपोर्ट्स के आंकड़ों के अनुसार, आयोग अभी 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 287 PMCCs को गाइड कर रहा है। इनमें से 231 सेंटर राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे हैं। जिनमें जिला प्रशासन और 'वन स्टॉप सेंटर' के जरिए संचालित सेंटर भी शामिल हैं, जबकि 56 सेंटर गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के जरिए चल रहे हैं।
इन सेंटरों ने अपनी शुरुआत से अब तक 4,695 लोगों को शादी-पूर्व बातचीत में मदद पहुंचाई है। राज्य सरकारों के साथ साझेदारी का एक उदाहरण कर्नाटक है, जहां एनसीडब्ल्यू ने राज्य सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर राज्य द्वारा संचालित सभी 175 संतवना केंद्रों में PMCC स्थापित करने पर सहमति जताई थी।
काउंसलिंग की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए NCW काउंसलर्स की ट्रेनिंग पर भी निवेश कर रहा है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 489 काउंसलर्स को 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' प्रोग्राम के जरिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। जिसमें आपसी बातचीत, इमोशनल इंटेलिजेंस, शादी के लिए तैयारी और झगड़े सुलझाने जैसे विषय शामिल हैं। यह प्रशिक्षण मॉड्यूल फरवरी 2025 में हुए एक राष्ट्रीय परामर्श सत्र की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था, जिसमें विशेषज्ञों ने पारिवारिक कल्याण को मजबूत करने के लिए प्री-मैरिटल काउंसलिंग की जरूरत पर चर्चा की थी।
NCW ने एक डिजिटल PMCC मॉड्यूल भी शुरू किया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों तक भी यह सुविधा पहुंच सके। इस मॉड्यूल के लिए अब तक कुल 302 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से 192 लोग इसे पूरा कर चुके हैं। कमीशन ने एक मॉनिटरिंग सिस्टम भी बनाया है, ताकि सेंटरों पर हो रहे काम पर नजर रखी जा सके और लाभार्थियों से फीडबैक लिया जा सके।
NCW के अपने कॉन्सेप्ट नोट के अनुसार, आयोग को मिलने वाली शिकायतों के विश्लेषण से पता चला था कि घरेलू विवादों से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा हैं और इनका बड़ा कारण अवास्तविक उम्मीदें, संवाद की कमी और शादी के लिए अपर्याप्त तैयारी है। संयुक्त परिवारों में गिरावट, सोशल मीडिया का असर और बदलते सामाजिक मानदंडों के चलते युवा जोड़ों के सामने नई चुनौतियां आई हैं। यही इस प्रोग्राम को शुरू करने की मूल वजह बताई गई है।
हालांकि, प्रोग्राम को लेकर हर जगह सिर्फ सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। कर्नाटक में इस पहल को लेकर द न्यूज़ मिनट की एक रिपोर्ट ने सवाल उठाया था कि यह प्रोग्राम भले ही आपसी संवाद और सम्मान को बढ़ावा देता है, लेकिन इसमें यौन व प्रजनन अधिकारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात करने की गुंजाइश सीमित है। यह दिखाता है कि प्रोग्राम अभी भी विकसित हो रहा है और इसके दायरे को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय है।