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रक्षा बंधन के त्योहार पर बुरा है भाई बहनों का हाल, नेपाल के लोग कैसे मनाएं राखी

Crisis in Nepal:नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के चलते रक्षाबंधन का उल्लास मातम में बदल गया। राहत शिविरों में विस्थापित परिवार अपनों की सलामती की दुआओं के साथ रक्षा सूत्र बांध रहे हैं।
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Aug 27, 2026
Raksha Bandha In Nepal News.
आपदा के साये में रक्षाबंधन: नेपाल में सैलाब के बीच राहत शिविरों से बंधी उम्मीद। (फोटो: AI)

श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर जहां नेपाल भर में 'जनै पूर्णिमा' और 'राखी' के पारंपरिक उल्लास की गूंज सुनाई देती थी, वहीं इस बार देश का एक बड़ा हिस्सा भीषण मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। नेपाल-चीन सीमा से सटे रसुवागढ़ी, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में ग्लेशियर टूटने और विकराल भूस्खलन के बाद आए विनाशकारी फ़्लैश फ़्लड ने सैकड़ों आशियानों को तबाह कर दिया है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बाज़ारों की चहल-पहल और घरों की मिठास की जगह केवल मलबे के ढेर, अपनों की तलाश और राहत शिविरों में गूँजती सिसकियाँ बाकी रह गई हैं।

तबाही का मंज़र: सैकड़ों लापता, राहत शिविरों में शरण

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, रसुवा, नुवाकोट और धादिंग ज़िलों में आई अचानक बाढ़ में 150 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि भारतीय तीर्थयात्रियों सहित सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।

विस्थापितों की पीड़ा: तिमुरे, स्याफ्रुबेंसी और बेत्रावती जैसे इलाक़ों में रिहाइशी बस्तियाँ मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। हज़ारों लोग अस्थायी तंबुओं और राहत शिविरों में गुज़र-बसर करने को मजबूर हैं।

टूटे संपर्क मार्ग: राजमार्गों के धंसने और प्रमुख पुलों के बह जाने के कारण दर्जनों पहाड़ी गाँवों का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से पूरी तरह कट चुका है। ऐसे में दूर-दराज़ रहने वाले भाई-बहनों का एक-दूसरे तक पहुँचना नामुमकिन हो गया है।

नेपाल में श्रावण पूर्णिमा का सांस्कृतिक स्वरूप

परंपरा व अनुष्ठानधार्मिक व सांस्कृतिक महत्व
जनै पूर्णिमा (यज्ञोपवीत)वैदिक परंपरा के तहत पुराने जनेऊ को बदलकर नया 'पवित्र धागा' धारण किया जाता है।
रक्षा सूत्र / डोरोपुरोहितों द्वारा कलाई पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और दीर्घायु का 'रक्षा धागा' (डोरो) बाँधा जाता है।
राखी पर्वतराई और अन्य क्षेत्रों में बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधकर उनकी सलामती की दुआ करती हैं।
क्वाती (Kwati) भोजनौ प्रकार के अंकुरित अनाजों से तैयार पारंपरिक पौष्टिक सूप पिया जाता है।

आंसुओं के बीच सलामती की दुआएं

आपदाग्रस्त क्षेत्रों में इस बार त्योहार का पारंपरिक स्वरूप पूरी तरह बदल गया है:

सूनी कलाइयां और सिसकियां: रसुवा और सिन्धुपाल्चोक के प्रभावित क्षेत्रों में कई बहनें राखी की थाली सजाने के बजाय मलबे में दबे अपने भाइयों की ख़ैरियत के लिए ईश्वर से गुहार लगा रही हैं।

राहत शिविरों में सांकेतिक रस्में: सुरक्षित ठिकानों पर पहुँचे परिवारों में केवल सांकेतिक रूप से एक-दूसरे के हाथ पर कच्चा धागा बाँधकर एक-दूसरे की हिफ़ाज़त का संकल्प लिया जा रहा है।

बचाव अभियान और मानवीय सहायता: नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय प्रशासन के जवान मलबे में ज़िंदगी की तलाश में जुटे हैं। वहीं भारत की ओर से भेजी गई त्वरित मेडिकल सहायता और राशन सामग्री प्रभावितों तक पहुँचाई जा रही है।

इस त्रासदी ने रक्षाबंधन के उत्सव को ज़रूर फीका कर दिया है, लेकिन आपदा के इस मुश्किल दौर में एक-दूसरे का सहारा बनना और जीवन रक्षा का अटूट संकल्प ही इस बार नेपाल में रक्षाबंधन का सबसे बड़ा पैग़ाम बनकर उभरा है।

Updated on:
27 Aug 2026 09:21 pm
Published on:
27 Aug 2026 09:20 pm