
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के बाद परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण कई प्रमुख मार्गों पर बसें और दूसरे वाहन रोक दिए गए हैं। ऐसे में लोग जहां सड़कें खुली हैं, वहां छोटे वाहनों का सहारा ले रहे हैं, जबकि कटे हुए इलाकों में पैदल आवाजाही और हेलिकॉप्टर से निकासी पर निर्भरता बढ़ गई है। नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के अनुसार, बाढ़ से करीब 40 किलोमीटर सड़क, 35 मोटरेबल पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त हुए हैं।
काठमांडू घाटी ट्रैफिक पुलिस ने बाढ़ के खतरे और सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए कई मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन रोक दिया। काठमांडू से चितवन, पोखरा, गोरखा, लामजुंग, धादिंग, नुवाकोट और रसुवा की ओर जाने वाले वाहनों को प्रभावित रूटों पर आगे बढ़ने से रोका गया। अधिकारियों ने कहा कि सड़क की स्थिति सुरक्षित होने और स्थिति का आकलन होने के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा।
नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार, लोगों से गल्छी-प्रिथ्वी हाईवे, स्याफ्रुबेसी मार्ग और मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़क जैसे जोखिम वाले रास्तों पर यात्रा नहीं करने की अपील की गई है। स्थानीय प्रशासन को जोखिम वाले इलाकों में परिवहन और अन्य आवाजाही प्रतिबंधित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सभी सड़कें पूरी तरह बंद नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, बीपी हाईवे चालू है और फर्पिंग की ओर छोटे वाहन चल रहे हैं। हालांकि बड़े वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध है और वाहन संचालकों को संबंधित अनुमति तथा रूट परमिट का पालन करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में ट्रैफिक पुलिस सड़क की स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है। इसका मतलब है कि बाढ़ के बाद लोगों का सफर एक ही माध्यम पर निर्भर नहीं है। सुरक्षित खुले हिस्सों में छोटे वाहन चल रहे हैं, जबकि बंद मार्गों पर यात्रियों को रुकने या वापस लौटने की सलाह दी जा रही है।
प्रिथ्वी हाईवे के प्रभावित हिस्सों में मलबा जमा होने के कारण यातायात रोक दिया गया है। थानकोट इलाके में फंसे यात्रियों को काठमांडू वापस भेजा गया और उन्हें आगे की यात्रा जोखिम में न डालने की सलाह दी गई। परिवहन संचालकों को भी ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक सूचना के आधार पर ही वाहन चलाने को कहा गया है।
जिन इलाकों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, वहां हेलिकॉप्टर अहम भूमिका निभा रहे हैं। नेपाल रेड क्रॉस के मुताबिक, रसुवा के तमुरे से 123 लोगों को हवाई मार्ग से निकाला गया, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक शामिल थे। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया कि 27 अगस्त की सुबह से 15 से अधिक बचाव उड़ानें हो चुकी थीं और अतिरिक्त हेलिकॉप्टर तैयार रखे गए थे। नेपाल सेना ने तिमुरे से 21 भारतीय नागरिकों समेत 95 लोगों को भी निकाला।
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव के लिए प्रतिक्रिया को 12 क्षेत्रों में बांटा है। इनमें परिवहन और कनेक्टिविटी के लिए अलग टीम बनाई गई है, जिसकी अगुवाई भौतिक बुनियादी ढांचा एवं परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव दिलीप भंडारी कर रहे हैं। इस टीम में सड़क विभाग, नेपाली सेना, रोड बोर्ड नेपाल, पुलिस और परिवहन क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसका उद्देश्य परिवहन संपर्क बहाल करने और प्रभावित मार्गों की स्थिति का आकलन करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार का पूरा तंत्र राहत और बचाव में लगाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, संचार उपकरण और जरूरी मशीनरी भेजी जा रही है तथा ड्रोन सर्वे के जरिए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हेलिकॉप्टर से निकासी में बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है। फिलहाल नेपाल में सामान्य बस और लंबी दूरी की सड़क यात्रा कई क्षेत्रों में जोखिमपूर्ण है। ऐसे में लोगों के लिए सुरक्षित खुले मार्गों पर छोटे वाहन, पैदल आवाजाही और गंभीर रूप से कटे इलाकों में हेलिकॉप्टर निकासी ही प्रमुख विकल्प बने हुए हैं।