
Nuclear Hydrogen India: ये नाम सुनते ही दिमाग में परमाणु रिएक्टर, रेडिएशन और भारी-भरकम तकनीकी शब्द आते हैं। लेकिन अब इसी कल्पाक्कम में दुनिया की सबसे अनोखी 'हरियाली' उगने वाली है। हाइड्रोजन की हरियाली! भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने यहां दुनिया का पहला ऐसा हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र शुरू किया है, जो परमाणु रिएक्टर की गर्मी से हाइड्रोजन बनाता है।
ये सिर्फ एक और तकनीकी प्रयोग नहीं है। ये उस सपने की पहली ईंट है, जहां परमाणु ऊर्जा सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि ईंधन भी बनाएगी—और वो भी बिना किसी प्रदूषण के। आइए समझते हैं कि ये 'गुप्त' प्रयोगशाला देश की तकदीर कैसे बदल सकती है।
सवाल ये है कि परमाणु रिएक्टर से हाइड्रोजन कैसे बनेगी? दरअसल, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने एक खास प्रक्रिया विकसित की है, 'कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल साइकल' (Cu–Cl Cycle)। ये एक ऐसी रासायनिक विधि है, जो परमाणु रिएक्टर से निकलने वाली तेज गर्मी (प्रोसेस हीट) का उपयोग करके पानी से हाइड्रोजन अलग कर लेती है। इस पूरी प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है।
इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) के फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) से मिली गर्मी इस प्लांट को चलाती है। ये वही रिएक्टर है, जिसने भारत की तीन-चरणीय परमाणु योजना की नींव रखी थी, और अब वही रिएक्टर हमें 'हरित ईंधन' देने वाला है ।
आप सोच रहे होंगे कि परमाणु-हाइड्रोजन, ये तो वैज्ञानिकों का खेल है, आम आदमी को इससे क्या? लेकिन इसका जवाब है, इससे सस्ता ईंधन, स्वच्छ हवा और आत्मनिर्भर भारत बनेगा।
जल-पेट्रोल पर निर्भरता घटेगी, हाइड्रोजन एक ऐसा ईंधन है, जो जलने पर पानी बनाता है, धुआं नहीं। अगर भारत बड़े पैमाने पर परमाणु-हाइड्रोजन बनाने लगा, तो हमारे ट्रक, बसें, और यहां तक कि ट्रेनें भी हाइड्रोजन पर चलेंगी। यानी महंगे तेल के आयात पर खर्च होने वाले पैसे की बचत!
'ग्रीन हाइड्रोजन' की कीमत गिरेगी, दुनिया में 'ग्रीन हाइड्रोजन' महंगी मानी जाती है। भारत की ये तकनीक (Cu–Cl चक्र) दूसरे तरीकों के मुकाबले कम तापमान पर और ज्यादा कुशलता से हाइड्रोजन बनाती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में हाइड्रोजन 'सुनहरी' नहीं, बल्कि 'आम आदमी' की पहुंच में होगी!
स्वदेशी तकनीक, डीएई के सचिव अजीत कुमार मोहंती का कहना है कि ये प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है ।
ये सिर्फ एक डेमोंस्ट्रेटर (प्रदर्शक) प्लांट है। लेकिन इसका मकसद पूरी दुनिया को ये दिखाना है कि परमाणु ऊर्जा सिर्फ बिजली बनाने के काम नहीं आती। फोकस भविष्य में बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक उत्पादन का है। भारत ये साबित करना चाहता है कि वह परमाणु तकनीक को हरित ऊर्जा से जोड़ने वाला पहला देश है।
· कहाँ? - इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पाक्कम, चेन्नई के पास।
· तकनीक- कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल चक्र।
· ऊर्जा स्रोत- फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) से मिली गर्मी।
· विकासकर्ता- BARC और IGCAR की संयुक्त टीम।
· विशेषता: दुनिया का पहला परमाणु- गर्मी आधारित हाइड्रोजन प्लांट!
ये प्लांट एक 'टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर' है, मतलब अभी ये साबित करेगा कि ये तकनीक काम करती है। इसके बाद डेटा इकट्ठा होगा और प्रक्रिया को और बेहतर बनाया जाएगा। एक बार जब ये तकनीक पूरी तरह सफल हो गई, तो भारत के पास असीमित, सस्ता और स्वच्छ ईंधन बनाने का रास्ता खुल जाएगा। ये सिर्फ एक प्लांट नहीं है, ये उस भविष्य का दरवाजा है, जहां परमाणु ऊर्जा काली धुंध की नहीं, बल्कि साफ नीले आसमान की वजह बनेगी।