
देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी खुशखबरी मिली है। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में प्राकृतिक गैस का एक बड़ा भंडार मिला है। यह खोज केजी बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में स्थित एक ब्लॉक में हुई है।
ऑयल इंडिया ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कामयाबी की जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि यह गैस केजी बेसिन के 'मत्स्यपुरी फॉर्मेशन' में मिली है। बेहद दिलचस्प बात यह है कि इस क्षेत्र का पहले कभी भी मूल्यांकन या टेस्टिंग नहीं की गई थी। पहली ही बार में इस अनछुए क्षेत्र से गैस निकलना भारत की ऊर्जा रणनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, यह खोज KG-DSF/GSKW/2018 नाम के उथले समुद्री अपतटीय ब्लॉक में मौजूद 'गोदावरी-1' आकलन भंडार में हुई है। इस भंडार में हाइड्रोकार्बन युक्त क्षेत्र का परीक्षण 16 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया था। यह परीक्षण जमीन से करीब 2,024 से 2,027 मीटर की गहराई पर किया जा रहा है।
शुरुआती जांच में गैस भंडार से लगभग 1,00,000 मानक घन मीटर प्रतिदिन (SCMD) की दर से गैस निकल रही है। वहीं, लगातार किए गए परीक्षण के दौरान यह प्रवाह अधिकतम 2,00,000 SCMD तक दर्ज किया गया। गैस के साथ-साथ इस भंडार से रोजाना करीब 170 बैरल कंडेनसेट (गैस के संघनन से बनने वाला मूल्यवान तरल पदार्थ) भी मिल रहा है।
यह खोज ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बहुत बड़े हिस्से का विदेशों से आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर गैस का यह नया और अतिरिक्त स्रोत मिलने से भारत की विदेशी देशों पर निर्भरता कम होगी और करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार का इरादा भारत के कुल ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर साल 2030 तक 15 प्रतिशत करने का है। इस विजन को पूरा करने के लिए घरेलू संसाधनों और नए गैस ब्लॉकों का विकास करना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
ऑयल इंडिया की यह नई खोज सरकार के इसी लक्ष्य को रफ्तार देने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अभी इस खोज में मौजूद कुल संभावित गैस भंडार की मात्रा का सटीक आकलन नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में इससे भी अधिक गहराई वाले क्षेत्रों में टेस्टिंग की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।