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बच्चों में प्रीडायबिटीज का खतरा: क्या आपके बच्चे में हैं ये संकेत? समय पर पहचानना है जरूरी

क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे की चुप्पी उनकी सेहत के लिए खतरा बन सकती है? प्रीडायबिटिक स्थिति की पहचान करना मुश्किल है, लेकिन सही जानकारी और जीवनशैली में बदलाव से आप इसे रोक सकते हैं!
3 min read
Aug 28, 2026
prediabetes in kids
प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

बच्चों में प्रीडायबिटिक का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रीडायबिटिक की स्थिति अक्सर चुपचाप होती है, लेकिन समय रहते पहचान कर जीवनशैली में बदलाव से इसे टाला जा सकता है।

अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते

अधिकांश बच्चों में प्रीडायबिटिक स्थिति के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। हालांकि, त्वचा के कुछ हिस्सों जैसे गर्दन, बगल, कोहनी, घुटने या पेट के मोड़ों पर त्वचा का गहरा हो जाना (acanthosis nigricans) इंसुलिन प्रतिरोध का संकेत हो सकता है।

कब जांच की जाए और कौन-कौन से जोखिम देखें

अंतर्राष्ट्रीय दिशानिर्देशों (ISPAD 2024) के अनुसार, यदि बच्चा 10 वर्ष या उससे अधिक उम्र का है, और उसका BMI उम्र व लिंग के अनुसार 85वें पर्सेंटाइल से ऊपर है, तो जांच पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि परिवार में टाइप 2 डायबिटीज का इतिहास हो, मां को गर्भावस्था में डायबिटीज हुआ हो, या बच्चा दक्षिण एशियाई पृष्ठभूमि से हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।

कैसे होती है जांच - कौन से टेस्ट होते हैं

प्रीडायबिटिक स्थिति की पहचान के लिए तीन मुख्य रक्त परीक्षण होते हैं:

  • फास्टिंग ग्लूकोज (FPG): 100–125 mg/dL
  • 2‑घंटे का ग्लूकोज टेस्ट (OGTT): 140–199 mg/dL
  • HbA1c: 5.7–6.4%

ये मानक ADA (अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन) और RSSDI‑ESI (भारतीय संदर्भ में) द्वारा भी अपनाए गए हैं।

भारत में प्रीडायबिटीज की स्थिति

भारत में हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण (CNNS) के अनुसार, 10–19 वर्ष के बच्चों में फास्टिंग ग्लूकोज के आधार पर लगभग 10% को प्रीडायबिटिक पाया गया। राज्यों में यह दर 2% से लेकर 20% तक भिन्न थी—उदाहरण के लिए मणिपुर, केरल, सिक्किम, मिजोरम और पश्चिम बंगाल में यह 21% से अधिक था।

लाइफस्टाइल बदलाव से सुधार संभव है

अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय दोनों दिशानिर्देशों में जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिक उपाय माना गया है। इसमें शामिल हैं:

  • कैलोरी नियंत्रित, संतुलित आहार: कम परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट, अधिक फाइबर, फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, कम वसा वाले प्रोटीन स्रोत।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि: कम से कम एक घंटे प्रतिदिन मध्यम से तीव्र व्यायाम।
  • परिवार‑केंद्रित दृष्टिकोण: पूरे परिवार को स्वस्थ खाने और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना।

भारत में RSSDI‑ESI 2025 दिशानिर्देशों में यह सलाह दी गई है कि यदि बच्चा अधिक वजन वाला है, तो उसे वजन घटाने की बजाय ऊंचाई बढ़ने के साथ वजन को स्थिर रखने पर ध्यान देना चाहिए। यदि मोटापा अधिक है, तो धीरे-धीरे—लगभग 0.5 से 1 किलोग्राम प्रति माह—वजन घटाने का लक्ष्य रखें, और 500–1000 कैलोरी दैनिक कम करें।

कब डॉक्टर से मिलें—चेतन संकेत

यदि आपके बच्चे में निम्नलिखित में से कोई संकेत दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करें:

  • लगातार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकावट, धुंधली दृष्टि - ये डायबिटीज के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
  • त्वचा पर गहरे धब्बे (acanthosis nigricans) या तेजी से वजन बढ़ना - ये इंसुलिन प्रतिरोध के संकेत हो सकते हैं।
  • यदि BMI बढ़ रहा हो या जोखिम कारक मौजूद हों, तो हर 2–3 वर्ष में जांच दोहराएं; यदि स्थिति बिगड़ रही हो, तो हर साल जांच की सलाह है।

स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता

भारत में स्कूलों में “My Health World” जैसे स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री से बच्चों और परिवारों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। यह पहल बच्चों को स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

पहलूसुझाव
जोखिम पहचानBMI ≥85वें पर्सेंटाइल, पारिवारिक इतिहास, गर्भकालीन डायबिटीज
जांच के तरीकेFPG, OGTT, HbA1c
जीवनशैली उपायसंतुलित आहार, रोजाना व्यायाम, परिवार‑केंद्रित बदलाव
डॉक्टर से कब मिलेंलक्षण दिखने पर, BMI बढ़ने पर, नियमित जांच के लिए

यदि आपके बच्चे में प्रीडायबिटिक स्थिति है, तो समय रहते पहचान और जीवनशैली में बदलाव से टाइप 2 डायबिटीज की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और परिवार का सहयोग इस राह में सबसे मजबूत आधार हैं। यदि कोई लक्षण दिखें या जोखिम बढ़ता हो, तो डॉक्टर से मिलकर उचित जांच और मार्गदर्शन अवश्य लें।

मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लें।

Updated on:
28 Aug 2026 02:44 pm
Published on:
28 Aug 2026 02:44 pm