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रक्षा मंत्री ने जारी किया 10 साल की रक्षा कूटनीति का रोडमैप; हिंद महासागर में भारत बनेगा ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में अगले 10 वर्षों के लिए भारत की रक्षा कूटनीति का रणनीतिक रोडमैप जारी किया है। दस्तावेज में राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को वैश्विक सहयोग से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
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Sep 04, 2026
india defence diplomacy roadmap
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यानी 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में भारत की रक्षा कूटनीति से जुड़ा एक अहम दस्तावेज जारी किया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस दस्तावेज का आधिकारिक नाम 'RAKSHA' है, जो अगले 10 वर्षों के लिए भारत की वैश्विक रक्षा साझेदारियों का रणनीतिक रोडमैप और विजन पेश करता है। रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय (DPR) ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर बताया कि यह दस्तावेज वैश्विक सुरक्षा साझेदारियों को मजबूत करने के लिए 10 साल का रोडमैप तय करता है।

दस्तावेज के 4 प्रमुख स्तंभ

यह दस्तावेज चार प्रमुख आधार स्तंभों पर टिका है। पहला, रणनीतिक साझेदारियां यानी द्विपक्षीय व बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को गहरा करना। दूसरा, क्षमता निर्माण यानी मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और बेहतर कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान बढ़ाना।

तीसरा स्तंभ 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देकर भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक रक्षा-विनिर्माण केंद्र के तौर पर स्थापित करना और चौथा स्तंभ, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। इस दस्तावेज में रक्षा कूटनीति को भारत की विदेश नीति का एक 'मुख्य स्तंभ' बताया गया है। यह अगले 10 वर्षों के लिए एक स्पष्ट व व्यावहारिक दिशा देने का दावा करता है।

हिंद महासागर में भारत की भूमिका

दस्तावेज में हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की भूमिका को "नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर" (यानी क्षेत्र में सुरक्षा देने वाला प्रमुख देश) और "फर्स्ट रिस्पॉन्डर" (आपदा या संकट में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश) के तौर पर मजबूत करने का स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है। रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक बदलते वैश्विक हालात में भारत को शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था के एक अहम आधार के तौर पर स्थापित करना इस पहल का मकसद है।

बेल्जियम और अमेरिका से जुड़ी गतिविधियां

यह रक्षा दस्तावेज ऐसे समय जारी हुआ जब भारत की रक्षा कूटनीति पहले से ही सक्रिय दौर में थी। दस्तावेज जारी होने से एक दिन पहले, 2 सितंबर को राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकेन के साथ नई दिल्ली में विस्तृत रणनीतिक बातचीत की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा-औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा, इसी सप्ताह मलेशिया में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत और अमेरिका ने भी एक अलग '10 वर्षीय रक्षा साझेदारी ढांचा' समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन घटनाओं को एक साथ देखा जाए तो यह भारत की रक्षा कूटनीति में बढ़ती सक्रियता का संकेत देता है।

रक्षा दस्तावेज का महत्व

रक्षा विश्लेषकों के लिए यह दस्तावेज इसलिए अहम है, क्योंकि भारत ने अब तक अपनी रक्षा कूटनीति को इतने स्पष्ट, संरचित और लंबी अवधि (10 वर्ष) के रूप में सार्वजनिक तौर पर परिभाषित नहीं किया था। अब तक भारत की रक्षा साझेदारियां ज्यादातर अलग-अलग द्विपक्षीय समझौतों (जैसे भारत-अमेरिका, भारत-फ्रांस, भारत-बेल्जियम रक्षा समझौतों) के जरिए आगे बढ़ती रही हैं। 'RAKSHA' दस्तावेज इन सभी प्रयासों को एक समग्र रणनीतिक ढांचे में पिरोने की कोशिश करता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों और वैश्विक सहयोग के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।

फिलहाल, यह एक नीतिगत दिशा-निर्देश दस्तावेज है, न कि कोई कानूनी या संधि-स्तरीय बाध्यकारी समझौता। इसका असल असर आने वाले वर्षों में तभी दिखेगा जब इसके 4 स्तंभों, रणनीतिक साझेदारी, क्षमता निर्माण, रक्षा निर्यात और समुद्री सुरक्षा पर ठोस द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौते और कार्यान्वयन योजनाएं सामने आएंगी। रक्षा मंत्रालय ने इसे भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का प्रतीक बताया है।

Updated on:
04 Sept 2026 06:34 pm
Published on:
04 Sept 2026 06:34 pm