
भारत ने अप्रैल 2018 में सभी आबाद जनगणना गांवों के विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया था। इसके बाद सौभाग्य योजना के तहत करोड़ों घरों को बिजली कनेक्शन भी दिए गए। सरकार के रिकॉर्ड में अब लगभग हर गांव बिजली नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। लेकिन इससे एक नया सवाल पैदा हुआ है। क्या बिजली पहुंचने का मतलब यह है कि गांवों में 24 घंटे बिजली मिल रही है? असल तस्वीर इससे थोड़ी अलग है। आज ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी चुनौती बिजली का कनेक्शन नहीं, बल्कि बिजली की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता है।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उनके घर में बिजली रोज कितने घंटे आती है। कई गांवों में बिजली का ढांचा मौजूद है, लेकिन सप्लाई पूरे दिन नहीं रहती। मिशन अंत्योदय सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश के सभी गांवों में बिजली की उपलब्धता एक जैसी नहीं है। बड़ी संख्या में गांव ऐसे हैं जहां रोजाना 12 घंटे से अधिक बिजली मिलती है, लेकिन ऐसे गांव भी मौजूद हैं जहां सप्लाई इससे काफी कम है।
पिछले एक दशक में ग्रामीण बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2015 के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन करीब 12 घंटे बिजली उपलब्ध होती थी। इसके बाद उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने और गांवों तक बिजली पहुंचाने की योजनाओं के कारण आपूर्ति के घंटों में लगातार वृद्धि हुई। 2021 तक ग्रामीण क्षेत्रों में औसत बिजली उपलब्धता 22 घंटे प्रतिदिन के करीब पहुंच गई थी। इसका मतलब यह है कि देश के अधिकांश गांवों में अब पहले की तुलना में कहीं अधिक समय तक बिजली मिल रही है।
हालांकि सभी राज्यों की स्थिति समान नहीं है। गुजरात, तमिलनाडु और कुछ अन्य राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों को लगभग चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। वहीं बिहार, असम, राजस्थान और कई अन्य राज्यों में भी बिजली आपूर्ति के घंटे 22 घंटे या उससे अधिक तक पहुंच चुके हैं। इसके विपरीत, कुछ पहाड़ी और दूरदराज़ राज्यों में अभी भी बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, लंबी वितरण लाइनें और रखरखाव की चुनौतियां वहां सप्लाई को प्रभावित करती हैं।
| प्रतिदिन बिजली उपलब्धता | गांवों की संख्या |
|---|---|
| 1 से 4 घंटे | 16,674 |
| 4 से 8 घंटे | 55,563 |
| 8 से 12 घंटे | 2,05,621 |
| 12 घंटे से अधिक | 3,42,570 |
यह भी समझना जरूरी है कि बिजली उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद गांवों में कटौती क्यों होती है। इसकी एक बड़ी वजह वितरण नेटवर्क की स्थिति है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर पुराने हैं या लाइनें कमजोर हैं, जिससे बार-बार फॉल्ट आते हैं। इसके अलावा कृषि फीडरों के कारण कई राज्यों में सिंचाई और घरेलू बिजली की आपूर्ति अलग-अलग समय पर की जाती है। कुछ जगहों पर बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान भी वितरण कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। बेहतर बिजली आपूर्ति का सीधा संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, छोटे उद्योग, डिजिटल सेवाओं और कृषि से है। गांवों में लंबे समय तक बिजली मिलने से छात्र रात में पढ़ सकते हैं, छोटे कारोबारी अपने उपकरण चला सकते हैं और किसान सिंचाई के लिए अधिक भरोसेमंद बिजली प्राप्त कर सकते हैं। यही वजह है कि अब बिजली की चर्चा केवल "कनेक्शन मिला या नहीं" तक सीमित नहीं रह गई है।
आज भारत बिजली पहुंचाने के लक्ष्य से आगे निकल चुका है और अगला लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण तथा भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के घंटे लगातार बढ़े हैं, लेकिन 24 घंटे बिजली का सपना अभी सभी गांवों में पूरी तरह साकार नहीं हुआ है। इसलिए आने वाले वर्षों में चुनौती नए कनेक्शन देने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की होगी कि हर गांव और हर घर को पर्याप्त और नियमित बिजली मिल सके।