
यूक्रेन ने रविवार, 16 अगस्त 2026 को रूस के भीतर सैकड़ों ड्रोन भेजकर युद्ध के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक को अंजाम दिया। इसके कुछ ही समय बाद रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसी दौर की जवाबी कार्रवाई में भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल की कंपनी ArcelorMittal का क्रिवी रिह स्थित विशाल स्टील प्लांट भी निशाना बना। हमले में दो लोगों की मौत और 14 लोगों के घायल होने की खबर है।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्रिवी रिह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का गृह शहर है, और यहां स्थित ArcelorMittal Kryvyi Rih देश की सबसे बड़ी एकीकृत स्टील उत्पादन इकाइयों में से एक है। रूसी हमले में प्लांट के महत्वपूर्ण बिजली और उत्पादन ढांचे को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद कंपनी को कुछ गतिविधियां आंशिक रूप से रोकनी पड़ीं।
रविवार को यूक्रेन ने रूस के खिलाफ बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को इंटरसेप्ट या नष्ट किया गया। मॉस्को और उसके आसपास का इलाका भी हमले की चपेट में आया। रूसी अधिकारियों के अनुसार हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई।
मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक बताया। मॉस्को के आसपास कई स्थानों पर आग लगने और संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की खबरें आईं। पोडोल्स्क इलाके में ऑनलाइन रिटेल कंपनी Wildberries के एक बड़े वेयरहाउस को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा और वहां आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक कर्मचारियों को समय रहते वहां से निकाल लिया गया था। इसी रात मॉस्को क्षेत्र में एक ड्रोन के एक निजी मकान से टकराने से 83 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई, यह घटना वेयरहाउस वाली जगह से अलग थी।
यूक्रेन के हमलों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कीव अब रूस के काफी भीतर स्थित आर्थिक और लॉजिस्टिक्स ठिकानों को भी निशाना बनाने की क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। यूक्रेन का तर्क है कि ऐसे प्रतिष्ठान रूस की युद्ध क्षमता और सैन्य आपूर्ति व्यवस्था को सहारा देते हैं।
इसी दौरान रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें से एक हमले में क्रिवी रिह स्थित मित्तल के स्टील प्लांट को नुकसान पहुंचा।
ArcelorMittal Kryvyi Rih यूक्रेन के औद्योगिक ढांचे का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह खनन और धातुकर्म से जुड़ा विशाल परिसर है, और देश के स्टील उत्पादन में इसकी बड़ी भूमिका है।
प्लांट पर हमले से सिर्फ एक निजी कंपनी की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि यह यूक्रेन की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद युद्धकालीन जोखिम का भी उदाहरण है।
रिपोर्टों के मुताबिक रूसी मिसाइल हमले में प्लांट की बिजली व्यवस्था और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़े महत्वपूर्ण हिस्से प्रभावित हुए। उत्पादन को आंशिक रूप से रोकना पड़ा। दो लोगों की मौत और 14 लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है।
युद्ध के बीच किसी बड़े स्टील प्लांट का संचालन अपने आप में बड़ी चुनौती है। बिजली, कच्चे माल, परिवहन, श्रमिकों की सुरक्षा और निर्यात — हर स्तर पर युद्ध का असर पड़ता है। ऐसे में किसी प्रमुख उत्पादन इकाई पर मिसाइल हमला उसके संचालन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
रूस लगातार यह दावा करता रहा है कि यूक्रेन में उसके हमले सैन्य या सैन्य-औद्योगिक क्षमता से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हैं। दूसरी ओर यूक्रेन रूस पर नागरिक और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाता है।
इसी वजह से क्रिवी रिह का हमला भी युद्ध की उस जटिल तस्वीर को सामने लाता है, जिसमें किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान की नागरिक और रणनीतिक भूमिका के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।
रूस का कहना है कि उसके हमलों का उद्देश्य यूक्रेन की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। वहीं यूक्रेन ऐसे हमलों को अपनी अर्थव्यवस्था और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला बताता है। दोनों पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र रूप से हर हमले के उद्देश्य की पुष्टि करना कई बार मुश्किल होता है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन के औद्योगिक प्रतिष्ठान लगातार युद्ध की चपेट में आ रहे हैं। इससे पहले 10-11 अगस्त की रात रूस के हमले में ज़ापोरिज़्झिया स्थित Zaporizhstal स्टील प्लांट को भी नुकसान पहुंचा था। कंपनी (Metinvest Group) के मुताबिक उस हमले में सात कर्मचारियों की मौत हुई और लगभग 21-24 लोग घायल हुए थे।
रूस अक्सर यह दावा करता है कि उसके हमले सैन्य-संबंधी लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाते हैं, यह आरोप लगाते हुए कि कुछ औद्योगिक इकाइयों से सैन्य इस्तेमाल के लिए सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। यूक्रेन और स्वतंत्र पर्यवेक्षक इन दावों पर सवाल उठाते रहे हैं, क्योंकि ये प्लांट मुख्यतः नागरिक औद्योगिक इकाइयां हैं।
इससे साफ है कि युद्ध का एक नया मोर्चा औद्योगिक क्षमता बन चुका है। स्टील, ऊर्जा, तेल, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली व्यवस्थाएं अब रणनीतिक निशाने पर हैं।
यूक्रेन की रणनीति में भी पिछले कुछ महीनों में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिया है। यूक्रेनी ड्रोन अब रूस के सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं हैं। वे सैकड़ों किलोमीटर भीतर जाकर तेल रिफाइनरी, ऊर्जा संयंत्र, लॉजिस्टिक्स केंद्र और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं, जिनमें रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी Wildberries के दर्जनों गोदाम भी शामिल हैं।
कीव का कहना है कि इसका उद्देश्य रूस के सैन्य अभियान को आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था को कमजोर करना है। हाल के हमलों में रूस के तेल और पेट्रोकेमिकल उद्योग को भी नुकसान पहुंचा है। इससे युद्ध अब पारंपरिक मोर्चे से आगे बढ़कर आर्थिक युद्ध का रूप लेता दिख रहा है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि हमलों का भौगोलिक दायरा बढ़ रहा है। रविवार को रोमानिया की सीमा में भी एक ड्रोन के प्रवेश की खबर आई, जिसे नाटो के एक स्पैनिश F-18 लड़ाकू विमान ने मार गिराया। रोमानियाई अधिकारियों के मुताबिक यह इस साल का चौथा ऐसा मामला था, और शुरुआती जांच में ड्रोन के रूसी होने की आशंका जताई गई है। रोमानिया नाटो का सदस्य है, और इस तरह की घटनाएं युद्ध के सीधे तौर पर नाटो क्षेत्र में फैलने का जोखिम बढ़ाती हैं।
हालांकि एक घटना अपने आप में नाटो और रूस के बीच सीधा संघर्ष शुरू होने का संकेत नहीं है, लेकिन ऐसी घटनाएं यूरोपीय देशों के लिए सुरक्षा चुनौती जरूर बढ़ाती हैं।
युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, मिसाइल और ड्रोन तकनीक उतनी ही तेजी से विकसित हो रही है। यूक्रेन लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है, जबकि रूस भी बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दे रहा है।
लक्ष्मी मित्तल की कंपनी की यूक्रेन स्थित फैक्ट्री पर हमला भारत के लिए भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। यह हमला भारतीय मूल के कारोबारी से जुड़ी कंपनी की संपत्ति पर हुआ है, लेकिन इसके पीछे वैश्विक निवेश और युद्ध के बीच पैदा होने वाला जोखिम भी दिखाई देता है।
दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए युद्धग्रस्त क्षेत्रों में निवेश अब केवल व्यापारिक फैसला नहीं रह गया है। राजनीतिक जोखिम, सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा, बीमा लागत, कर्मचारियों की सुरक्षा और उत्पादन बंद होने की आशंका के चलते सभी कारोबारी फैसलों का हिस्सा बन चुके हैं।
ArcelorMittal जैसी वैश्विक कंपनी के लिए यूक्रेन में संचालन जारी रखना इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि स्टील उद्योग को लगातार और स्थिर ऊर्जा तथा परिवहन नेटवर्क की जरूरत होती है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में अब एक खतरनाक चक्र दिखाई दे रहा है - एक पक्ष बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करता है, दूसरा पक्ष मिसाइलों से जवाब देता है, और फिर आर्थिक तथा औद्योगिक ढांचे को निशाना बनाया जाता है।
यूक्रेन का रूस के भीतर गहराई तक ड्रोन पहुंचाना उसकी बढ़ती लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को दर्शाता है। वहीं रूस की जवाबी कार्रवाई बताती है कि वह यूक्रेन के शहरों और औद्योगिक ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमला करने की क्षमता बनाए हुए है।
लक्ष्मी मित्तल की स्टील फैक्ट्री पर हुआ हमला इसी बढ़ते तनाव की एक बड़ी मिसाल है। यहां सवाल सिर्फ दो लोगों की मौत या एक फैक्ट्री को हुए नुकसान का नहीं है। सवाल यह है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध अब उस चरण में पहुंच चुका है, जहां युद्ध की सीमा, अर्थव्यवस्था और नागरिक जीवन के बीच की रेखाएं लगभग मिटती जा रही हैं।
जब मिसाइलें स्टील प्लांट तक पहुंचती हैं, ड्रोन सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित औद्योगिक केंद्रों को निशाना बनाते हैं, और नाटो की सीमाओं के आसपास हवाई क्षेत्र प्रभावित होता है, तो यह संघर्ष केवल रूस और यूक्रेन का युद्ध नहीं रह जाता। इसका असर यूरोप की सुरक्षा, वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय कारोबार तक पहुंचने लगता है। और यही वजह है कि क्रिवी रिह में हुआ यह हमला आने वाले दिनों में रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा समझने के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।