
प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT
बारिश का मौसम किसानों के लिए उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आता है। जब मूसलधार बारिश होती है, तो फसलों, पशुओं और खेतों को कई तरह के जोखिम होते हैं - जलभराव, कीट-रोग, फसल क्षति, और जान-माल का नुकसान। लेकिन सही तैयारी और सावधानी से इन खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है। नीचे हम वैज्ञानिक और सरकारी सलाहों के आधार पर किसानों के लिए सुरक्षा उपाय बता रहे हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) “ग्रामीण कृषि मौसम सेवा” (Gramin Krishi Mausam Sewa) के तहत मौसम-आधारित कृषि परामर्श देता है। यह सेवा मौसम पूर्वानुमान को फसल-विशेष और चरण-विशेष सलाह में बदलकर किसानों तक पहुंचाती है - जैसे बुवाई, सिंचाई, कीट नियंत्रण, फसल कटाई और बाद की देखभाल के लिए समय पर सुझाव। IMD का चार-रंग (ग्रीन, येलो, ऑरेंज, रेड) चेतावनी तंत्र किसानों और स्थानीय प्रशासन को मौसम की गंभीरता के अनुसार तैयार रहने में मदद करता है।
ऑरेंज और रेड चेतावनी वाले जिलों में कृषि प्रभावों के साथ-साथ फसल-विशेष सलाह भी दी जाती है।
IMD की हालिया सलाह में कहा गया है कि भारी बारिश के दौरान खेतों में पानी जमा न होने दें। इसके लिए खेतों में उचित नाली (ड्रेनेज) बनाएं और नाली के छोर खुले रखें ताकि पानी निकल सके। अगर फसल कटने की स्थिति में है, तो बारिश आने से पहले उसे काटकर सुरक्षित जगह पर रखें। साथ ही, बारिश के बाद उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव तब तक टालें जब तक पानी पूरी तरह से न उतर जाए।
बारिश के बाद कीट और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। IMD ने सलाह दी है कि खेतों का नियमित निरीक्षण करें और जरूरत पड़ने पर ही कीटनाशक का उपयोग करें लेकिन तब जब मौसम साफ हो और पानी उतर चुका हो।
अगर फसल कटने के काबिल हो, तो उसे बारिश से पहले काटकर सुरक्षित स्थान पर रखें। कटे हुए फसल को खुले में न छोड़ें, क्योंकि इससे सड़न और रोग फैलने का खतरा होता है।
बारिश के दौरान पशुओं को शेड में रखें और उन्हें संतुलित चारा व साफ पानी उपलब्ध कराएं। चारा और फीड को सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि वह खराब न हो जाए। मछली पालन में, तालाबों में अतिरिक्त पानी निकलने का इंतजाम करें - जैसे आउटलेट बनाएं ताकि मछलियां बहकर बाहर न निकल जाएं।
अगर तेज हवा या तूफानी बारिश की चेतावनी हो, तो हवादार फसलों जैसे केले, सब्जियां, फलदार पौधों को सहारा दें - जैसे स्टेकिंग या मैकेनिकल सपोर्ट। कटे हुए फसल को टारपॉलिन से ढककर रखें ताकि तेज हवा उसे उड़ा न ले जाए।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) जैसे कार्यक्रम किसानों को मौसम-जनित नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। ये योजनाएं फसल क्षति की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती हैं।
ओडिशा के महीसापट क्षेत्र में सितंबर 2024 में भारी बारिश के दौरान IMD की स्थानीय कृषि मौसम इकाई (AMFU) ने समय पर सलाह दी- जैसे जल निकासी बनाए रखना, कटाई पहले करना, उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग टालना। इससे कई किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिली और कुछ ने प्रति एकड़ लगभग ₹15,000–18,000 तक का लाभ भी कमाया।
| क्षेत्र | सुझाव |
|---|---|
| खेत और फसल | जल निकासी बनाएं, कटाई पहले करें, फसल को सुरक्षित रखें |
| कीट/रोग नियंत्रण | बारिश के बाद निरीक्षण करें, तभी उपचार करें |
| पशु/मत्स्य पालन | शेड में रखें, चारा सुरक्षित रखें, तालाबों में निकासी सुनिश्चित करें |
| तेज हवा/तूफान | फसल को सहारा दें, कटे फसल को ढकें |
| बीमा | PMFBY/WBCIS जैसे योजनाओं का लाभ उठाएं |
बारिश के मौसम में किसानों की तैयारी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत होती है। मौसम-आधारित सलाहों का पालन, खेतों में जल निकासी, समय पर कटाई और बीमा कवरेज - इन सब से किसान न सिर्फ नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और आय भी सुनिश्चित कर सकते हैं। अगली बार जब मौसम विभाग भारी बारिश की चेतावनी दे, तो इन उपायों को अपनाकर खेत और परिवार दोनों को सुरक्षित रखें।
Updated on:
17 Aug 2026 01:04 pm
Published on:
17 Aug 2026 01:04 pm
