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पैकेज्ड फूड से ‘सुपरफूड’ तक: दो मां ने कैसे बदली बच्चों के खानपान की दुनिया?

Slurrp Farm Success Story: जानें कैसे मिलेट्स और नो-जंक फॉर्मूले के साथ यह भारतीय स्टार्टअप फूड इंडस्ट्री में बच्चों के पोषण का नया चेहरा बन गया है।
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Sep 01, 2026
FOOD
Slurrp Farm का बड़ा गेम! (AI)

आज के दौर में जब बाजार पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड से भरा पड़ा है, माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि बच्चों को ऐसा क्या खिलाएं जो स्वाद में मजेदार हो और सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित। इसी जरूरत और भरोसे के खालीपन को समझा भारतीय स्टार्टअप Slurrp Farm (स्लर्प फार्म) ने। पारंपरिक भारतीय अनाजों (Millets) को आधुनिक स्नैक्स का रूप देकर इस ब्रांड ने न सिर्फ बच्चों की पोषण संबंधी समस्याओं का हल निकाला, बल्कि भारतीय फूड स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत मुकाम भी हासिल किया।

शुरुआत की कहानी: जब दो माताओं ने उठाई जिम्मेदारी

स्लर्प फार्म की शुरुआत 2016 में दो माताओं मेघना नारायण और शौरवी मलिक ने की थी। दोनों जब अपने बच्चों के लिए बाजार में हेल्दी फूड ऑप्शंस तलाश रही थीं, तो उन्हें हर जगह मैदा, रिफाइंड चीनी, प्रिजर्वेटिव्स और पाम ऑयल से भरे प्रोडक्ट्स ही मिले।

बच्चों के नाम पर बिकने वाले कथित 'हेल्दी' प्रोडक्ट्स की हकीकत देखने के बाद उन्होंने तय किया कि वे खुद एक ऐसा ब्रांड बनाएंगी जिस पर कोई भी माता-पिता आंख मूंदकर भरोसा कर सकें। बाद में इस मिशन में उमंग भट्टाचार्य भी बतौर को-फाउंडर शामिल हुए।

सफलता के 5 बड़े स्तंभ: क्या है स्लर्प फार्म का सीक्रेट फॉर्मूला?

'सुपरग्रेन्स' और मोटे अनाजों की वापसी

स्लर्प फार्म की सबसे बड़ी ताकत रही भारत के पारंपरिक अनाजों जैसे रागी, ज्वार, बाजरा, कंगनी और ओट्स का इस्तेमाल। ब्रांड ने दादी-नानी के दौर के इन अनाजों को बोरिंग दलिया या खिचड़ी के बजाय बच्चों के पसंदीदा फॉर्मेट्स में ढाला:

  • रागी और ओट्स के पैनकेक मिक्स
  • बिना मैदे वाले चाउमीन/नूडल्स और पास्ता
  • ज्वार और रागी से बनी बेक्ड कुकीज और पफ्स
  • प्राकृतिक फलों से बने ब्रेकफास्ट सीरियल्स

100% 'क्लीन लेबल' प्रॉमिस

ब्रांड ने कभी भी स्वाद के लिए सामग्री की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। इनके हर प्रोडक्ट के पीछे तीन सख्त नियम होते हैं:

  • नो मैदा: किसी भी उत्पाद में रिफाइंड आटे की मिलावट नहीं।
  • नो रिफाइंड शुगर: मिठास के लिए केवल गुड़, अनरिफाइंड खांड या फलों के अर्क का प्रयोग।
  • शून्य केमिकल: कोई कृत्रिम रंग, सिंथेटिक फ्लेवर, ट्रांस फैट या केमिकल प्रिजर्वेटिव्स नहीं।

मॉम-टू-मॉम कनेक्ट और कम्युनिटी बिल्डिंग

स्लर्प फार्म ने अपने मार्केटिंग अभियान को सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पेरेंट्स के बीच पोषण को लेकर जागरूकता फैलाई। जब एक मां दूसरी मां को यह बताती है कि यह प्रोडक्ट उसके बच्चे के लिए सुरक्षित है, तो वह भरोसा किसी भी बड़े पेड कैंपेन से कहीं अधिक ताकतवर होता है।

अनुष्का शर्मा का साथ और सेलिब्रिटी ट्रस्ट

बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का इस स्टार्टअप में बतौर निवेशक और ब्रांड एंबेसडर जुड़ना एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। एक मां के रूप में अनुष्का का ब्रांड से जुड़ाव दर्शकों को वास्तविक और प्रामाणिक लगा, जिससे ब्रांड की पहुंच टियर-1 और टियर-2 शहरों के परिवारों तक तेजी से बढ़ी।

ओम्नीचैनल वितरण और क्विक-कॉमर्स क्रांति

शुरुआत में केवल D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी ने समय के साथ अपनी वितरण रणनीति बदली।

क्विक-कॉमर्स: Blinkit, Zepto, Instamart और BigBasket पर मौजूदगी, जिससे माता-पिता को 10-15 मिनट में हेल्दी फूड मिल जाता है।

ई-कॉमर्स और मॉडर्न ट्रेड: Amazon, FirstCry के अलावा प्रीमियम ग्रॉसरी स्टोर्स (Nature's Basket आदि) के शेल्व्स पर जगह।

ग्लोबल रीच: भारत के साथ-साथ यूएई, यूके और अमेरिका जैसे विदेशी बाजारों में भारतीय सुपरफूड्स का निर्यात।

प्रोडक्ट पोर्टफोलियो: हर उम्र के बच्चे के लिए संपूर्ण पोषण

श्रेणीउत्पाद प्रकारखासियत
टॉडलर्स (शुरुआती आहार)सेरेलैक विकल्प, रागी पाउडर100% प्राकृतिक, पचने में आसान, बिना अतिरिक्त चीनी
ब्रेकफास्ट रेंजपैनकेक मिक्स, डोसा मिक्स, ओट्स सीरियल्स5 मिनट में तैयार, पोषण से भरपूर नाश्ता
शाम का स्नैकिंगरागी बाइट्स, ज्वार पफ्स, नट कुकीजनॉन-फ्राइड, बेक्ड और क्रंची
किड्स मीलमिलेट नूडल्स, पास्तामैदा-मुक्त, हाई फाइबर और प्रोटीन युक्त

नए स्टार्टअप्स के लिए सबक

स्लर्प फार्म की यात्रा भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक बेहतरीन केस स्टडी है। यह दिखाती है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक पैकेजिंग का सही तालमेल एक बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकता है। भारत सरकार द्वारा मोटे अनाजों (Shree Anna) को बढ़ावा दिए जाने से भी इस सेक्टर को जबरदस्त गति मिली है।

स्लर्प फार्म ने साबित कर दिया है कि अगर आपका इरादा समाज की किसी वास्तविक समस्या का समाधान करना है और उत्पाद की गुणवत्ता में सच्चाई है, तो एक छोटा सा विचार भी अरबों रुपये के स्थापित पैकेज्ड फूड दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे सकता है।

Updated on:
01 Sept 2026 05:13 pm
Published on:
01 Sept 2026 04:25 pm