
देशभर में ऊर्जा सुधारों और ग्रिड आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। डायनामिक टैरिफ (Dynamic power tariff) प्रणाली को गति देते हुए केंद्रीय दिशा-निर्देशों के तहत अब राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियों (Discoms) द्वारा 'टाइम ऑफ डे' (Time of Day - ToD) टैरिफ को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।
यह व्यवस्था सीधे तौर पर उन सभी घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगी, जिनके परिसरों में आधुनिक डिजिटल स्मार्ट मीटर इंस्टॉल हो चुके हैं। दिन के समय जब सौर ऊर्जा (Solar Energy) की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में होती है। इस दौरान बिजली की प्रति यूनिट दरें सस्ती रहेंगी। वहीं, शाम और रात के समय जब ग्रिड पर चरम भार (Peak Load) होता है, तब बिजली का उपभोग सामान्य से अधिक महंगा पड़ेगा।
पारंपरिक बिजली प्रणाली में पूरे 24 घंटे बिजली की दर एक समान (फ्लैट रेट) रहती थी। चाहे उपभोक्ता दोपहर के 12 बजे बिजली का उपभोग करे या रात के 8 बजे। अब नई 'टाइम ऑफ डे (ToD) व्यवस्था में दिन के 24 घंटों को मुख्य रूप से 3 अलग-अलग टाइम-स्लॉट्स में विभाजित किया गया है।
सोलर आवर्स (सुबह 8 से शाम 4 बजे तक): यह वह समयावधि है जब नेशनल और स्टेट ग्रिड में सोलर रूफटॉप्स और बड़े सोलर पार्कों से भारी मात्रा में हरित ऊर्जा की आपूर्ति होती है। इस स्लॉट में बेस टैरिफ पर 10% से 20% तक की सीधी छूट (Rebate) दी जाएगी। यानी दिन में उपभोग की गई यूनिट्स सबसे सस्ती पड़ेंगी।
सामान्य आवर्स: इस समय अवधि को सुबह 4 से 8 बजे और शाम 4 से 6 बजे तक बांटा गया है। इस समयावधि में बिजली की दरें सामान्य यानी बेस रेट पर ही रहेंगी। इसमें न कोई अतिरिक्त सरचार्ज लगेगा और न ही कोई रियायत मिलेगी।
पीक आवर्स: शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर्स रहेगा। शाम ढलते ही दफ्तरों से घरों की ओर लौटने वाले लोगों, घरेलू रोशनी, एयर कंडीशनर और टीवी चलने के कारण ग्रिड पर लोड अचानक चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान थर्मल और गैस पावर प्लांट्स को अतिरिक्त क्षमता पर चलाना पड़ता है। अतएव, इस स्लॉट में उपभोग की गई बिजली पर 15% से 25% तक का पीक-आवर सरचार्ज वसूला जाएगा।
यह नई व्यवस्था पारंपरिक इलेक्ट्रोमैकेनिकल या सादे इलेक्ट्रॉनिक मीटरों पर लागू नहीं हो सकती। इसके क्रियान्वयन के लिए स्मार्ट प्रीपेड/पोस्टपेड मीटर अनिवार्य हैं। स्मार्ट मीटर में रियल-टाइम डेटा लॉगिंग और इंटरनल क्लॉक चिप लगी होती है, जो हर 15 मिनट के टाइम-ब्लॉक में यह रिकॉर्ड करती है कि उपभोक्ता ने किस समय कितनी यूनिट बिजली खर्च की। यह डेटा ऑटोमैटिक मीटर रीडिंग (AMR) और सेल्युलर नेटवर्क के ज़रिए डिस्कॉम के सेंट्रल सर्वर तक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पहुंच जाता है। बिलिंग सॉफ्टवेयर स्वतः स्लॉट-वार गणना कर बिल तैयार करता है।
ToD व्यवस्था को समझकर उपभोक्ता अपने बिजली बिल में 15 से 30 फ़ीसदी तक की बचत कर सकते हैं। इसके लिए बस अपनी दिनचर्या में थोड़ा तकनीकी तालमेल बिठाने की आवश्यकता है। भारी बिजली उपकरणों की टाइमिंग बदलें: पानी की मोटर, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर, गीज़र और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग जैसे अत्यधिक लोड खींचने वाले कार्यों को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच निपटाएं।
पीक आवर्स में लोड मैनेजमेंट: रात 7:00 से 10:30 बजे के बीच एक साथ कई भारी उपकरण चलाने से बचें। यदि घर में दो एसी हैं, तो दोनों को एक साथ चलाने के बजाय ज़रूरत के अनुसार एक का ही उपयोग करें और तापमान 24°C से 26°C पर सेट रखें।
मोबाइल ऐप का नियमित उपयोग: प्रत्येक विद्युत वितरण कंपनी अपने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध करा रही है। इस ऐप पर जाकर अपने दैनिक और प्रति घंटा खपत पैटर्न को मॉनिटर करें।
इस नीतिगत सुधार के दोहरे फ़ायदे हैं। पहला, ग्रिड पर अचानक लोड बढ़ने से होने वाले ब्लैकआउट और ट्रिपिंग की समस्या पर लगाम लगेगी। कंपनियों को पीक आवर्स के दौरान महंगी दरों पर आपातकालीन बिजली (Power Exchange Market) से नहीं खरीदनी पड़ेगी, जिससे डिस्कॉम का वित्तीय घाटा कम होगा। दूसरा बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण का है। जब उपभोक्ता दिन के समय बिजली का अधिक उपयोग करेंगे, तो स्वच्छ सौर ऊर्जा की खपत बढ़ेगी और रात के समय प्रदूषण फैलाने वाले कोयला आधारित प्लांट्स पर अत्यधिक निर्भरता घटेगी। यह भारत के 'नेट ज़ीरो कार्बन एमिशन' और रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।