
तमिलनाडु में औद्योगिक विस्तार अब सिर्फ चेन्नई और उसके आसपास तक सीमित नहीं दिख रहा। 13 अगस्त 2026 को ‘वेट्री तमिलनाडु इन्वेस्टर्स कॉन्क्लेव’ में 97 समझौता ज्ञापनों (MoU) के जरिए ₹67,452 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए। राज्य सरकार के मुताबिक इनसे करीब 1,06,998 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इन प्रस्तावों में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, इंजीनियरिंग और जीवन-विज्ञान जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
लेकिन बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि तमिलनाडु में कितना पैसा आ रहा है। सवाल यह है कि यह पैसा किन जिलों में जा रहा है, वहां कितनी जमीन और पानी चाहिए होगा और क्या इससे चेन्नई से बाहर नए औद्योगिक केंद्र बनेंगे?
| आंकड़ा | स्थिति |
|---|---|
| नए MoU | 97 |
| प्रस्तावित निवेश | ₹67,452 करोड़ |
| अनुमानित रोजगार | 1,06,998 |
| प्रमुख क्षेत्र | ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, इंजीनियरिंग |
| निवेश की स्थिति | MoU/प्रस्ताव, अंतिम निवेश नहीं |
यहां एक जरूरी सावधानी है, MoU का मतलब पैसा तुरंत जमीन पर लग जाना नहीं होता। इसके बाद जमीन, मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति, निर्माण और उत्पादन शुरू होने जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं।
नई घोषणाओं में चेन्नई के साथ-साथ कई दूसरे औद्योगिक जिलों की भूमिका दिखाई दे रही है। कांचीपुरम में JK Tyre करीब ₹5,143 करोड़ के विस्तार और जर्मनी की Pitzer कंपनी करीब ₹300 करोड़ की परियोजना लाने वाली है। चेन्नई में Super Micro Computer करीब ₹477 करोड़ के सर्वर निर्माण निवेश से जुड़ा है। कृष्णागिरी में Ultraviolette ₹779 करोड़ की इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माण परियोजना ला रही है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के Avid Group ने तिरुवल्लूर और तूतीकोरिन में कुल ₹7,000 करोड़ के निवेश और 12,000 रोजगार का प्रस्ताव दिया है।
प्रमुख जगहें
ईरोड में Technosport ने भी अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹130 करोड़ निवेश और करीब 500 रोजगार का प्रस्ताव दिया है।
हां, लेकिन इसे पूरी तरह “चेन्नई से बाहर निकलता उद्योग” कहना अभी जल्दबाजी होगी। असल में तमिलनाडु एक बहु-केंद्रित औद्योगिक नेटवर्क बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। चेन्नई के आसपास पहले से ही कांचीपुरम, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूर का मजबूत औद्योगिक गलियारा है। इसके बाहर होसुर-कृष्णागिरी, कोयंबटूर-ईरोड-तिरुप्पुर, सलेम, त्रिची और तूतीकोरिन जैसे क्षेत्र अपनी-अपनी विशेषज्ञता के साथ मजबूत हो रहे हैं।
सरकार ने भी कंपनियों को केवल एक जगह केंद्रित करने के बजाय क्षेत्र और जिले के हिसाब से निवेश आकर्षित करने की रणनीति की बात कही है।
यहां ₹67,452 करोड़ को सीधे जमीन के आंकड़े में बदलना संभव नहीं है। क्योंकि ₹1,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट और ₹1,000 करोड़ का टेक्सटाइल या नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट एक जैसी जमीन नहीं मांगते। किसी परियोजना की जमीन जरूरत इस पर निर्भर करेगी कि वह:
तमिलनाडु में पहले से SIPCOT के 50 से ज्यादा औद्योगिक पार्क और 8 SEZ हैं, जो करीब 48,926 एकड़ में फैले हैं। ये 24 जिलों में मौजूद हैं। यानी नई परियोजनाओं के लिए हर बार नई कृषि भूमि लेने की जरूरत नहीं होगी। मौजूदा औद्योगिक पार्कों और उनके विस्तार का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
कई परियोजनाओं में हां। लेकिन, यहां भी सभी उद्योगों की पानी की जरूरत समान नहीं होती। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, टेक्सटाइल प्रोसेसिंग और कुछ भारी उद्योग अपेक्षाकृत ज्यादा पानी मांग सकते हैं, जबकि कई असेंबली और इंजीनियरिंग इकाइयों की जरूरत कम हो सकती है। इसलिए किसी एक आंकड़े से ₹67 हजार करोड़ के पूरे निवेश की पानी की मांग निकालना सही नहीं होगा। असल सवाल यह होगा कि किस जिले में कौन-सी परियोजना लग रही है और वहां उपलब्ध जल संसाधन कितना है।
चेन्नई क्षेत्र: पहले से शहरी और औद्योगिक पानी की मांग काफी है।
कृष्णागिरी-होसुर: तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र में पानी की उपलब्धता अहम मुद्दा है।
तूतीकोरिन: समुद्र के पास होने के कारण समुद्री जल को मीठा करने जैसी तकनीकों की संभावना है, लेकिन इसकी लागत और ऊर्जा जरूरत अलग चुनौती है।
इसलिए नए उद्योगों में पुनर्चक्रित पानी, उपचारित अपशिष्ट जल और जल-कुशल तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण होगा।
बिजली का इंतजाम कैसे होगा? : नई फैक्ट्रियां सिर्फ जमीन और पानी नहीं मांगेंगी, उन्हें लगातार बिजली भी चाहिए। खासकर:
जैसे उद्योगों में बिजली की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु के लिए चुनौती सिर्फ अतिरिक्त बिजली पैदा करने की नहीं होगी, बल्कि जहां उद्योग आएंगे वहां पर्याप्त ग्रिड और ट्रांसमिशन क्षमता उपलब्ध कराने की होगी।
इसके साथ नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका भी बढ़ सकती है। अगर नए औद्योगिक पार्कों को सौर और पवन ऊर्जा के साथ जोड़ा जाता है तो कंपनियों को स्वच्छ बिजली मिलने के साथ राज्य पर जीवाश्म ईंधन का दबाव भी कम हो सकता है।
| क्षेत्र | संभावित असर |
|---|---|
| इलेक्ट्रॉनिक्स | उच्च तकनीक विनिर्माण |
| इलेक्ट्रिक वाहन | ऑटो उद्योग का नया चरण |
| सेमीकंडक्टर | सप्लाई चेन और कौशल विकास |
| अंतरिक्ष | नए उच्च-मूल्य उद्योग |
| रक्षा | रणनीतिक विनिर्माण |
| नवीकरणीय ऊर्जा | स्वच्छ ऊर्जा क्षमता |
| टेक्सटाइल | पारंपरिक उद्योग का आधुनिकीकरण |
| जीवन विज्ञान | फार्मा/बायोटेक विस्तार |
तमिलनाडु में इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार पहले से मजबूत है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाइयां कांचीपुरम, चेन्नई, चेंगलपट्टू, कृष्णागिरी, तिरुवल्लूर, तूतीकोरिन और दूसरे जिलों में मौजूद हैं।
अगर सप्लाई चेन स्थानीय बनी तो जरूर। एक बड़ी फैक्ट्री अकेले हजारों लोगों को रोजगार नहीं देती। उसके आसपास:
यही कारण है कि होसुर, कृष्णागिरी, तिरुप्पुर, ईरोड, सलेम और तूतीकोरिन जैसे शहरों के लिए बड़ी परियोजनाएं नए औद्योगिक अवसर पैदा कर सकती हैं।
यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ₹67,452 करोड़ अभी प्रतिबद्ध निवेश है, वास्तविक खर्च नहीं। निवेश को जमीन पर उतरने में कई साल लग सकते हैं। इसलिए अगले कुछ वर्षों में तीन चीजों पर नजर रखनी होगी: