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क्या पिता से मिली संपत्ति पर टैक्स लगता है? जानें रिश्तेदारों और अन्य लोगों से मिले उपहार पर लगने वाले टैक्स के नियम

क्या आप जानते हैं कि पिता से प्राप्त उपहार पर टैक्स नहीं लगता? पिता से उपहार में मिले पैसे हों, शेयर हों या संपत्ति सभी पर टैक्स फ्री है। जानिए कैसे इसका लाभ ले सकते हैं और इसकी प्रक्रिया क्या है?
3 min read
Aug 19, 2026
Tax rules for gifts received
सांकेतिक इमेज (फोटो सोर्स-ChatGpt)

हर व्यक्ति के लिए पिता से मिला उपहार बेहद खास होता है। इसके साथ ही उपहार से जुड़े नियम-कानून की जानकारी होना भी सभी के लिए बेहद जरूरी है। यह नियम ऐसे सभी लोगों के लिए समझना जरूरी है, जो पारिवारिक मदद, निवेश या संपत्ति हस्तांतरण की योजना बना रहे हैं। आइए जानते हैं कि वर्तमान में क्या नियम लागू हैं और वे आपके लिए कैसे काम करते हैं?

पिता से प्राप्त उपहार टैक्स फ्री

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 56 के तहत रिश्तेदार से प्राप्त उपहार कर-मुक्त होते हैं। इसमें पिता-पुत्र संबंध स्पष्ट रूप से शामिल है। इसका मतलब यह है कि चाहे नकद हो, शेयर हों या कोई अन्य संपत्ति, पिता से प्राप्त उपहार पर आयकर नहीं लगता, चाहे उसकी राशि कितनी भी हो। यह नियम वित्त वर्ष 2025‑26 और उससे आगे भी वैध है।

कुल उपहार सीमा का क्या मतलब है?

धारा 56 के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को गैर‑रिश्तेदार से बिना किसी प्रतिफल के उपहार मिलता है। इस उपहार की कुल राशि वित्त वर्ष में ₹50,000 से अधिक हो जाती है, तो उस पूरे उपहार पर टैक्स लगेगा। हालांकि, पिता-पुत्र के मामले में उपहार इस सीमा से स्वतंत्र रहेगा।

पिता से शेयर या संपत्ति मिलने पर क्या करें?


यदि पिता से शेयर या कोई अन्य संपत्ति उपहार में मिलती है, तो वह पूरी तरह से टैक्स‑फ्री है। उदाहरण के लिए, यदि कोई NRI पुत्र ₹30 लाख मूल्य के शेयर अपने पिता को उपहार में देता है, तो यह पूरी तरह वैध हैं। इन शेयर्स पर टैक्स नहीं लगता, क्योंकि पिता रिश्तेदार है। हालांकि, ऐसी ट्रांजैक्शन को Annual Information Statement (AIS) में दिखाया जा सकता है, जिससे कभी-कभी भ्रम हो सकता है। लेकिन टैक्स की दृष्टि से यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

उपहार का दस्तावेजीकरण क्यों जरूरी?

टैक्स की दृष्टि से पिता से उपहार पूरी तरह मुक्त है, फिर भी रिकॉर्ड रखना समझदारी है। उदाहरण के लिए, गिफ्ट डीड बनाना। विशेषकर जब संपत्ति या बड़ी राशि हो, एक अच्छा अभ्यास है। इससे भविष्य में कानूनी विवाद या आयकर नोटिस से बचा जा सकता है।

आम गलतफहमियां और सावधानियां

कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ म्यूटेशन (Mutation) करवा लेने से संपत्ति का कानूनी अधिकार ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। म्यूटेशन केवल सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करता है। कानूनी टाइटल बदलने के लिए गिफ्ट डीड या वसीयत जरूरी है। इसके अलावा, विवाह के अवसर पर मिलने वाले उपहार (जैसे- गहने या नकद) भी कर-मुक्त होते हैं, लेकिन यह केवल तभी लागू होता है जब उपहार रिश्तेदारों से मिले हों। पिता से विवाह के अवसर पर मिलने वाले उपहार पर भी टैक्स नहीं लगता है।

पिता से उपहार लेने पर क्या करें?

  • उपहार प्राप्त होने का रिकॉर्ड रखें। बैंक ट्रांसफर, गिफ्ट डीड, प्राप्ति की लिखित पुष्टि करें।
  • यदि उपहार में संपत्ति (जैसे- जमीन, घर, शेयर) हैं, तो गिफ्ट डीड बनवाएं और आवश्यक स्टाम्प ड्यूटी/रजिस्ट्रेशन कराएं।
  • ITR भरते समय, यदि AIS में दिखता है, तो इसे सही तरीके से रिपोर्ट करें। लेकिन टैक्स नहीं लगेगा।
  • भविष्य में कानूनी विवाद से बचने के लिए दस्तावेजीकरण महत्वपूर्ण है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

कर विशेषज्ञों का मानना है कि उपहार के दस्तावेजीकरण से न केवल कानूनी सुरक्षा मिलती है, बल्कि यह पारिवारिक संबंधों में पारदर्शिता भी लाता है। यह सुनिश्चित करता है कि भविष्य में कोई विवाद न हो और सभी लेन-देन स्पष्ट रूप से दर्ज हों। पिता से प्राप्त उपहार चाहे नकद हो, संपत्ति हो या शेयर कर-मुक्त हैं। लेकिन कानूनी सुरक्षा और भविष्य में किसी विवाद से बचने के लिए गिफ्ट डीड और अन्य दस्तावेजीकरण रखना बुद्धिमानी है। वित्त अधिनियम 2026 में गिफ्ट से संबंधित नियमों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। वर्तमान नियम वही हैं जो पहले थे। रिश्तेदारों से उपहार टैक्स‑फ्री, गैर‑रिश्तेदार से ₹50,000 से अधिक पर टैक्स लगेगा।

Updated on:
19 Aug 2026 09:18 pm
Published on:
19 Aug 2026 09:17 pm