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मां दुर्गा की मूर्ति घर में कहां रखें? जानें सही दिशा और पूजा स्थल के वास्तु नियम

क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा स्थल का सही स्थान आपके घर की ऊर्जा को कैसे बदल सकता है? सही दिशा चुनकर सकारात्मकता बढ़ाएं और अपने जीवन में समृद्धि और शांति भी लाएं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 19, 2026

Maa Durga Puja Vastu

मां दुर्गा की पूजा के नियम। (फोटोः एआई)

घर में मां दुर्गा की पूजा के लिए वास्तु के अनुसार सही स्थान चुनना एक ऐसा विषय है, जो पारंपरिक विश्वास और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन बनाता है। आइए समझते हैं, पूजा स्थल को सही दिशा में स्थापित कैसे करें, जिससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति बनी रहे।

पूजा स्थल का महत्व

वास्तु शास्त्र में पूजा कक्ष को घर का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। यह वह स्थान है, जहां ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है और सकारात्मकता का संचार होता है। इसलिए पूजा स्थल का सही दिशा और स्थान चुनना जरूरी है।

उत्तर-पूर्व (ईशान कोण): सबसे शुभ दिशा

वास्तु के अनुसार पूजा कक्ष या देवी-देवताओं की मूर्ति के लिए सबसे शुभ दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) है। यह दिशा दिव्य ऊर्जा और सुबह की पहली किरणों से जुड़ी होती है, जिससे घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है।

पूर्व और उत्तर: वैकल्पिक विकल्प

यदि उत्तर-पूर्व संभव न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा भी शुभ मानी जाती है। पूर्व दिशा से बुद्धि और स्वास्थ्य में सुधार होता है, जबकि उत्तर दिशा से धन-लाभ और समृद्धि आती है।

इन दिशाओं से बचें

दक्षिण दिशा यम का प्रभाव बढ़ाती है, जिससे कलह और बीमारी की आशंका होती है। पश्चिम में शनि का प्रभाव होता है, जिससे रिश्तों में दरार पड़ सकती है। दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में राहु दोष बढ़ सकता है। इसलिए इन दिशाओं में देवी की तस्वीर या मूर्ति रखना टाला जाना चाहिए।

मूर्ति की दिशा और पूजा करने वाले की दिशा

मूर्ति को इस तरह स्थापित करें कि देवी का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो। इससे पूजा करने वाला व्यक्ति पश्चिम या दक्षिण की ओर बैठकर पूजा कर सकता है, जो वास्तु के अनुसार शुभ है।

मूर्ति की ऊंचाई और दीवार से दूरी

मूर्ति को जमीन से कम से कम तीन फीट ऊपर रखें। यदि आप बैठकर पूजा करते हैं, तो मूर्ति का आधार आपकी छाती के स्तर पर होना चाहिए। इसके अलावा, मूर्ति को दीवार से कुछ इंच दूर रखना चाहिए ताकि हवा पीछे से भी गुजर सके और ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।

पूजा सामग्री की व्यवस्था

दीपक (दीया) को मंदिर के दक्षिण-पूर्व भाग में रखें, क्योंकि यह अग्नि तत्व का क्षेत्र है। कलश या जल पात्र को उत्तर-पूर्व कोने में रखना शुभ माना जाता है। अगर पूजा कक्ष उत्तर-पूर्व में नहीं हो, तो वहां एक छोटा जल पात्र या वास्तु पिरामिड रखकर दोष को कम किया जा सकता है।

छोटे घरों और फ्लैट्स के लिए समाधान

यदि घर में पूजा कक्ष के लिए अलग कमरा नहीं है, तो उत्तर-पूर्व कोने में एक साफ, ऊंचाई पर रखा पूजा शेल्फ या वॉल-माउंटेड मंदिर पर्याप्त होता है। इसे रात में ढक दें और दिन में साफ रखें।

पूजा स्थल के आसपास की साफ-सफाई

पूजा स्थल को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें। टूटे या फटे चित्र, मूर्तियां या अव्यवस्था न रखें। पूजा के बाद फूलों को तुरंत हटा दें। दीपक बुझाकर रात में पर्दा लगा दें या ढक दें।

मां दुर्गा की विशेष स्थिति

विशेष रूप से मां दुर्गा की पूजा के लिए, मूर्ति या तस्वीर को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है। इससे देवी की कृपा बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

आपके लिए सुझाव

घर में मां दुर्गा की पूजा के लिए वास्तु के अनुसार सबसे शुभ स्थान उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) है। यदि यह संभव न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा भी विकल्प हैं। मूर्ति को ऊंचाई पर, दीवार से थोड़ी दूरी पर और पूजा करने वाले की दिशा को ध्यान में रखते हुए स्थापित करें। दीपक, कलश और अन्य पूजा सामग्री को सही दिशा में रखें। छोटे घरों में उत्तर-पूर्व कोने में एक साफ, ऊंचाई पर रखा पूजा शेल्फ भी पर्याप्त है। यह सब करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और देवी की कृपा बनी रहती है।

(डिस्क्लेमरः यह लेख वास्तु शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, वैज्ञानिक तथ्य पर नहीं। कृपया इसे आस्था के रूप में लें और महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।)