
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के विदेश दौरे को लेकर सामने आई खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 20 अगस्त 2026 को ब्रिटेन और अमेरिका की यात्रा के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री को अब अपनी यात्रा को बीच में ही रोककर 23 अगस्त को लंदन से हैदराबाद लौटना पड़ रहा है।
इस बदलाव का मुख्य कारण बताया जा रहा है- केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक मंजूरी न दिया जाना। आइए इस खबर की तह तक जाएं और समझें कि ऐसा क्यों हुआ, इसका क्या अर्थ है, और आगे क्या हो सकता है।
20 अगस्त को तेलंगाना के कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी यूके और यूएस के लिए रवाना हुए थे। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग जगत से संवाद स्थापित करना था। हालांकि, अब यह तय हुआ है कि वे बोस्टन नहीं जाएंगे, बल्कि 23 अगस्त को लंदन से सीधे हैदराबाद लौटेंगे। यह बदलाव स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार की मंजूरी न मिलने से जुड़ा हुआ है।
जब कोई राज्य का मुख्यमंत्री विदेश यात्रा पर जाता है, तो उसे विदेश मंत्रालय (MEA) से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। यह मंजूरी सुरक्षा, कूटनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण से आवश्यक होती है। रेवंत रेड्डी की चार देशों (यूके, यूएस, जर्मनी, चीन) की प्रस्तावित यात्रा को पहले ही राज्य सरकार ने स्वीकृति दे दी थी, लेकिन यह यात्रा MEA की मंजूरी पर निर्भर थी।
हां, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने रेवंत रेड्डी को पासपोर्ट की अंतरिम कस्टडी और विदेश यात्रा की अनुमति दी थी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि वे 1 लाख रुपये की जमानत दें और यात्रा के दौरान ठहरने का पता व संपर्क विवरण उपलब्ध कराएं। साथ ही, यात्रा के बाद 18 सितंबर तक पासपोर्ट सौंपने का वचन देना था।
अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आए हैं कि केंद्र ने मंजूरी क्यों नहीं दी। हालांकि, यह संभव है कि सुरक्षा, कूटनीतिक या अन्य संवेदनशील कारणों से MEA ने यात्रा को मंजूरी देने में संकोच किया हो। इस तरह की मंजूरी में कई स्तरों पर समीक्षा होती है—जिसमें सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, यात्रा का उद्देश्य और यात्रा के समय का राजनीतिक माहौल शामिल होता है।
इस अचानक बदलाव से कई सवाल उठते हैं। क्या यह राजनीतिक दबाव का परिणाम है? क्या केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों में खटास है? इससे राज्य में निवेशकों को क्या संदेश जाएगा? ऐसे सवालों का जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह घटना राज्य-केंद्र संबंधों की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री अब लंदन से सीधे हैदराबाद लौटेंगे। इस यात्रा का अगला चरण बोस्टन व अन्य अमेरिकी शहरों के निवेशकों से मुलाकात करना था, अब रद्द किया जा चुका है। अब यह देखना होगा कि क्या भविष्य में यह यात्रा फिर से आयोजित की जाएगी या कोई वैकल्पिक योजना बनाई जाएगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस बदलाव का कारण स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की यूएस यात्रा का अचानक रद्द होना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक घटना है। यह दर्शाता है कि विदेश यात्राओं में केवल राज्य सरकार की मंजूरी ही नहीं, बल्कि केंद्र की सहमति भी उतनी ही आवश्यक होती है। इस घटना से राज्य-केंद्र संबंधों की नाजुकता उजागर होती है और यह सवाल खड़ा होता है कि क्या भविष्य में ऐसी यात्राओं को लेकर बेहतर समन्वय संभव होगा। आगे क्या होगा, यह समय बताएगा लेकिन फिलहाल यह घटना एक स्पष्ट संकेत है कि विदेश यात्राओं में राजनीतिक मंजूरी का महत्व कम नहीं है।