
प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI
कभी सोचा है कि सिर्फ दो साल में कोई सरकारी योजना 50 लाख से ज्यादा घरों की छतों तक पहुंच सकती है? पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने यही कर दिखाया है। जो योजना कुछ महीने पहले तक 40-42 लाख घरों तक सीमित थी, वह अब 51 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है।
13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम सूर्य घर योजना का ऐलान किया था। इसका मकसद साफ था - देश के एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर लोगों का बिजली बिल शून्य के करीब लाना और भारत को घर-घर बिजली उत्पादक बनाना। इसके लिए सरकार ने करीब ₹75,021 करोड़ का बजट रखा और मार्च 2027 तक एक करोड़ इंस्टॉलेशन का लक्ष्य तय किया।
योजना के तहत सब्सिडी का गणित बेहद सीधा है। 1 किलोवाट के सिस्टम पर ₹30,000, 2 किलोवाट पर ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे बड़े सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 तक की सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके अलावा 7 से 9 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर बिना गारंटी के लोन की सुविधा भी दी जाती है, ताकि शुरुआती खर्च की चिंता किसी को न सताए।
रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अक्टूबर 2025 में जहां रोजाना करीब 5,038 सोलर सिस्टम लगते थे, वहीं जुलाई 2026 में यह संख्या बढ़कर करीब 16,328 प्रतिदिन हो गई — यानी रफ्तार तीन गुने से भी अधिक बढ़ी।
यानी अगर किसी पुरानी रिपोर्ट या लेख में "42 लाख लाभार्थी परिवार" का जिक्र मिले, तो समझ लीजिए वह आंकड़ा कम से कम दो-तीन महीने पुराना है। योजना की असली मौजूदा तस्वीर उससे कहीं आगे निकल चुकी है।
योजना के दो साल पूरे होने के मौके पर काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) ने एक व्यापक देशव्यापी उपभोक्ता सर्वे जारी किया। इस सर्वे का निष्कर्ष चौंकाने वाला था - जिन घरों ने रूफटॉप सोलर अपनाया, वहां बिजली के मासिक बिल में औसतन 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कई परिवारों का बिल तो पूरी तरह शून्य तक पहुंच गया।
रिपोर्ट का एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि सोलर अपनाने के इच्छुक करीब 81 प्रतिशत लोगों ने बिजली बिल घटाना ही अपनी सबसे बड़ी वजह बताया।
साथ ही CEEW के मुताबिक, आवासीय रूफटॉप सोलर की विकास दर 2017-23 के 45% सालाना चक्रवृद्धि से बढ़कर 2024-26 में 85% तक जा पहुंची है - यानी योजना ने सिर्फ संख्या ही नहीं, अपनाने की रफ्तार भी कई गुना तेज कर दी है।
योजना सिर्फ शहरी घरों तक सीमित नहीं है। इसके तहत हर जिले में एक "मॉडल सोलर गांव" चुनने की भी व्यवस्था है - वह गांव जो सबसे ज़्यादा रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हासिल करे। जीतने वाले गांव को केंद्र सरकार से ₹1 करोड़ का इनाम मिलता है, जिसे गांव के सोलर ढांचे को और मजबूत करने में खर्च किया जाता है।
इसका सबसे शानदार उदाहरण हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की मेहली ग्राम पंचायत है। शिमला जिले में शुरू में त्याल, छकड़ैल, दत्तनगर, किटबाड़ी, परेच, शिंगला, सराहन, कुमारसैन, बउंडा और मेहली — कुल दस पंचायतों को इस दौड़ में शामिल किया गया था। इन सभी को 28 फरवरी 2026 तक ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करने की समयसीमा दी गई थी, लेकिन इनमें से सिर्फ मेहली पंचायत ही तय समय के भीतर यह काम पूरा कर पाई। नतीजतन, मेहली को मॉडल सोलर गांव घोषित किया गया और उसे ₹1 करोड़ का इनाम मिला। ज़िला प्रशासन ने इसे बाकी पंचायतों के लिए एक मिसाल बताया, जो दिखाती है कि गांव स्तर पर भी तेज़ी से काम करके बड़ा फायदा उठाया जा सकता है।
अगर एक लाइन में कहें, तो पीएम सूर्य घर योजना की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि रफ्तार की कहानी है। शुरुआती वर्षों में धीमी शुरुआत के बाद, 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत से यह योजना तेजी से रफ्तार पकड़ चुकी है।
Updated on:
21 Aug 2026 12:53 pm
Published on:
21 Aug 2026 12:53 pm
