Patrika+

Everyday Explainer: इंटरनेट की हर खिड़की पर ‘Accept Cookies’ की दस्तक सुविधा का जरिया या डेटा की जासूसी?

इंटरनेट पर वेबसाइट्स 'Accept Cookies' क्यों पूछती हैं? जानिए कुकीज क्या हैं, यह आपके डेटा को कैसे ट्रैक करती हैं और Accept या Reject में से सही विकल्प क्या है।
4 min read
Sep 01, 2026
web
वेबसाइट्स आपसे परमिशन क्यों मांगती हैं?

स्मार्टफोन हो या लैपटॉप, इंटरनेट ब्राउज़ करते हुए एक दृश्य हम सभी के लिए बेहद आम हो चुका है। किसी भी नई वेबसाइट पर क्लिक करते ही स्क्रीन के निचले हिस्से या बीच में एक बड़ा सा बैनर उभर आता है: “We value your privacy. Accept All Cookies or Reject?”

ज्यादातर इंटरनेट यूजर्स बिना पढ़े या झुंझलाहट में तुरंत 'Accept All' पर टैप कर देते हैं ताकि सामने दिख रहा कंटेंट पढ़ा जा सके। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अचानक इंटरनेट की दुनिया इतनी विनम्र क्यों हो गई कि हर कदम पर आपसे इजाजत मांग रही है? और यह साधारण सा दिखने वाला 'Accept' या 'Reject' का फैसला आपकी डिजिटल जिंदगी को किस हद तक प्रभावित करता है?

आखिर क्या हैं ये डिजिटल 'कुकीज़'?

इंटरनेट की तकनीकी भाषा में 'कुकी' (Cookie) कोई खाने वाली मीठी चीज नहीं, बल्कि बहुत छोटी टेक्स्ट फाइलों (Text Files) का एक पैकेट होती है। जब आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं, तो वह सर्वर आपके वेब ब्राउज़र (Chrome, Safari, Edge आदि) में यह छोटी सी फाइल डाउनलोड करवा देता है।

सीधे शब्दों में कहें तो कुकी वेबसाइट की 'शॉर्ट-टर्म मेमोरी' की तरह काम करती है। यह आपकी पहचान, पासवर्ड, शॉपिंग कार्ट में छोड़े गए सामान, भाषा की प्राथमिकता और आपने उस वेबसाइट पर किस-किस लिंक पर क्लिक किया इन सब का एक संक्षिप्त रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखती है।

अगर कुकीज़ न हों, तो वेब का अनुभव बेहद उबाऊ और थका देने वाला हो जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी ई-कॉमर्स साइट पर कपड़े देख रहे हैं और पेज रिफ्रेश कर दें, तो कार्ट का सारा सामान गायब हो जाएगा और आपको हर एक पेज बदलने पर दोबारा लॉगिन करना पड़ेगा।

कुकीज़ के चार मुख्य चेहरे: कौन मददगार, कौन जासूस?

हर कुकी आपकी निजता के लिए खतरा नहीं होती। इन्हें समझने के लिए चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

एसेंशियल कुकीज़ (Essential / Strictly Necessary): ये वेबसाइट के बुनियादी कामकाज के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। ये यूजर लॉगिन, सिक्योरिटी टोकन और बिलिंग पेज जैसी जरूरी प्रक्रियाओं को संभालती हैं। इन्हें बंद करने पर वेबसाइट ठीक से लोड ही नहीं होगी।

प्रेफरेंस कुकीज़ (Preference / Functional): ये आपकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को याद रखती हैं; जैसे आपने डार्क मोड चुना है या लाइट मोड, या फिर आपकी पसंदीदा भाषा हिंदी है या अंग्रेजी।

एनालिटिक्स कुकीज़ (Performance / Analytics): ये वेबसाइट के मालिक को बताती हैं कि उनके कौन से आर्टिकल सबसे ज्यादा पढ़े जा रहे हैं, पाठक पेज पर कितनी देर रुका और साइट पर ट्रैफिक कहां से आ रहा है।

थर्ड-पार्टी मार्केटिंग कुकीज़ (Tracking / Marketing): यही वह श्रेणी है जो सबसे ज्यादा विवादों में रहती है। ये कुकीज़ उस वेबसाइट की नहीं होतीं जिसे आप देख रहे हैं, बल्कि किसी बाहरी विज्ञापन नेटवर्क या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा लगाई जाती हैं। ये इंटरनेट पर आप जहां-जहां जाते हैं, आपका पीछा (Track) करती हैं।

कंपनियां आपसे इजाजत मांगने पर मजबूर क्यों हुईं?

इंटरनेट के शुरुआती दशकों में कुकीज़ बिना किसी की जानकारी के बैकग्राउंड में चुपचाप इंस्टॉल हो जाती थीं। कंपनियां आपके हर डिजिटल फुटप्रिंट को रिकॉर्ड करके विज्ञापनदाताओं को बेचती थीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डेटा सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर बड़े कानूनी बदलाव हुए:

यूरोप का GDPR कानून: 2018 में यूरोपीय संघ ने जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) और ई-प्राइवेसी डायरेक्टिव लागू किया। इसके तहत किसी भी यूजर का व्यक्तिगत डेटा या ट्रैकिंग बिना उसकी स्पष्ट सहमति (Explicit Consent) के इकट्ठा करना गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया।

वैश्विक प्रभाव और भारी जुर्माना: यदि कोई वैश्विक वेबसाइट नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर करोड़ों यूरो का जुर्माना लग सकता है। गूगल, मेटा और अमेज़न जैसी दिग्गज कंपनियों पर इस नियम के तहत भारी जुर्माने लगे हैं।

भारत का DPDP Act: भारत में भी डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत डिजिटल सहमति और डेटा फिड्यूशरी की जवाबदेही को कड़ा किया गया है।

कानूनी पचड़ों और भारी पेनल्टी से बचने के लिए अब हर वेबसाइट के लिए कुकी कंसेंट बैनर लगाना तकनीकी अनिवार्यता बन चुका है।

'Accept' और 'Reject' के पीछे का पूरा खेल

जब आप पॉप-अप पर फैसला लेते हैं, तो बैकग्राउंड में क्या होता है?

यदि आप 'Accept All' चुनते हैं: आप वेबसाइट को यह खुली छूट दे देते हैं कि वह आपकी पहचान, सर्च हिस्ट्री और ब्राउज़िंग बिहेवियर को थर्ड-पार्टी ऐड नेटवर्क के साथ साझा कर सके। आपने अभी किसी फोन की कीमत सर्च की, और अगले ही पल आपके इंस्टाग्राम या यूट्यूब फीड पर उसी फोन के डिस्काउंट ऑफर दिखने लगते हैं यह इसी 'Accept All' का नतीजा है।

यदि आप 'Reject All' चुनते हैं: वेबसाइट केवल उन 'एसेंशियल कुकीज़' का इस्तेमाल कर पाती है जिनके बिना पेज नहीं खुल सकता। विज्ञापन नेटवर्क आपके ब्राउज़र में ट्रैकिंग कोड नहीं डाल पाते। इसका मतलब यह नहीं कि विज्ञापन आने बंद हो जाएंगे; विज्ञापन तो दिखेंगे, लेकिन वे आपकी निजी जिंदगी और सर्च हिस्ट्री पर आधारित (Targeted) नहीं होंगे।

'डार्क पैटर्न्स': डिजाइन का वह फरेब जिससे आपको बचना है

वेबसाइट कंपनियां चाहती हैं कि आप हर हाल में 'Accept All' पर ही क्लिक करें, क्योंकि आपका डेटा उनके लिए पैसा है। इसके लिए वे 'डार्क पैटर्न्स' (Deceptive UI Design) का इस्तेमाल करती हैं:

रंगों का खेल: 'Accept All' बटन को बड़ा, चमकीला (हरा या नीला) बनाया जाता है, जबकि 'Reject' बटन को जानबूझकर छिपा दिया जाता है या उसे हल्के ग्रे रंग में लिखा जाता है ताकि नजर न पड़े।

जटिल मेनू: कई बार 'Reject All' का सीधा बटन न देकर 'Manage Settings' या 'More Options' का विकल्प दिया जाता है, जहां यूजर को 50 अलग-अलग टॉगल बंद करने पड़ते हैं। आम यूजर समय बचाने के लिए सीधे Accept दबाकर आगे बढ़ जाता है।

आम यूजर के लिए स्मार्ट डिजिटल सुरक्षा टिप्स

अपरिचित साइटों पर 'Reject' चुनें: अगर आप किसी लिंक पर केवल एक बार कोई खबर या ब्लॉग पढ़ने गए हैं, तो हमेशा 'Reject Non-Essential' या 'Decline All' ही चुनें।

'Customize' विकल्प का इस्तेमाल करें: अगर रिजेक्ट का सीधा बटन न दिखे, तो 'Manage Options' पर क्लिक करें। वहां 'Essential' को चालू रहने दें और 'Marketing/Advertising' वाले टॉगल को ऑफ कर दें।

ब्राउज़र सेटिंग्स मजबूत करें: अपने ब्राउज़र (Chrome, Firefox, Safari) की सेटिंग्स में जाकर "Block Third-Party Cookies" का विकल्प हमेशा ऑन रखें।

इनकॉग्निटो मोड की सीमा समझें: प्राइवेट या इनकॉग्निटो विंडो सेशन खत्म होने पर कुकीज़ डिलीट कर देती है, लेकिन जब तक टैब खुला है तब तक वेबसाइट आपको ट्रैक कर सकती है।

कुकी परमिशन बैनर इंटरनेट का कोई गैर-जरूरी व्यवधान नहीं, बल्कि आपकी डिजिटल आजादी और प्राइवेसी की पहली सुरक्षा दीवार है। अगली बार स्क्रीन पर पॉप-अप दिखे, तो एक सेकंड रुककर यह तय करें कि आप किसी अनजान वेबसाइट को अपने डिजिटल कमरे की कितनी चाबियां सौंपना चाहते हैं।

Updated on:
01 Sept 2026 07:05 pm
Published on:
01 Sept 2026 07:05 pm