
जब किसी खिलाड़ी के डोप टेस्ट में फेल होने की खबर सामने आती है, तो यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर डोप टेस्ट होता क्या है? क्या यह सिर्फ खिलाड़ियों के लिए होता है या दूसरे पेशों में भी इसकी जरूरत पड़ती है? दरअसल, डोप टेस्ट केवल खेल जगत तक सीमित नहीं है। विमान उड़ाने वाले पायलट, सेना और पुलिस के जवान, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और कई संवेदनशील पदों पर काम करने वाले लोगों की भी समय-समय पर डोप या ड्रग टेस्टिंग की जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि व्यक्ति किसी ऐसे पदार्थ के प्रभाव में न हो जो उसकी कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता या सुरक्षा को प्रभावित कर सकता हो।
डोप टेस्ट एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है, जिसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने प्रतिबंधित दवाओं, नशीले पदार्थों या प्रदर्शन बढ़ाने वाले रसायनों (Performance Enhancing Drugs) का सेवन किया है या नहीं। खेलों में इसका उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना होता है, जबकि विमानन, सेना और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में इसका लक्ष्य सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
सरल शब्दों में कहें तो डोप टेस्ट यह जांचता है कि किसी व्यक्ति का प्रदर्शन उसकी प्राकृतिक क्षमता का परिणाम है या फिर किसी प्रतिबंधित पदार्थ की वजह से बढ़ा है।
जब कोई खिलाड़ी या व्यक्ति अपनी ताकत, सहनशक्ति, गति या एकाग्रता बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित पदार्थों का उपयोग करता है, तो इसे डोपिंग कहा जाता है।
इन पदार्थों से प्रदर्शन में अस्थायी सुधार हो सकता है, लेकिन इनके गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी होते हैं।
डोप टेस्ट के दौरान शरीर से नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच की जाती है। सबसे आम तरीका मूत्र (Urine) टेस्ट है, लेकिन कई मामलों में रक्त (Blood) की जांच भी की जाती है।
| जांच का तरीका | क्या पता चलता है? |
|---|---|
| मूत्र (Urine) टेस्ट | अधिकांश प्रतिबंधित दवाओं का सेवन |
| रक्त (Blood) टेस्ट | हार्मोन, ब्लड डोपिंग और विशेष पदार्थ |
| लार (Saliva) टेस्ट | कुछ ड्रग्स और अल्कोहल |
| बाल (Hair) टेस्ट | लंबे समय तक ड्रग उपयोग का रिकॉर्ड |
नमूनों को सीलबंद कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है, जहां अत्याधुनिक तकनीकों से उनकी जांच की जाती है।
खेलों में डोप टेस्ट का सबसे बड़ा उद्देश्य निष्पक्षता बनाए रखना है। यदि कोई खिलाड़ी प्रतिबंधित पदार्थ लेकर अपनी ताकत या सहनशक्ति बढ़ाता है, तो उसे अन्य खिलाड़ियों पर अनुचित लाभ मिल सकता है।
ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों में डोप टेस्ट अनिवार्य होता है।
नहीं। खिलाड़ियों की जांच प्रतियोगिता के दौरान और उसके बाहर दोनों समय हो सकती है।
| टेस्ट का प्रकार | कब होता है? |
|---|---|
| In Competition | मैच या प्रतियोगिता के दौरान |
| Out of Competition | प्रशिक्षण शिविर, घर या अभ्यास स्थल पर अचानक जांच |
यही वजह है कि पेशेवर खिलाड़ी पूरे साल निगरानी में रहते हैं।
डोप टेस्ट केवल खेल तक सीमित नहीं है। विमानन क्षेत्र में पायलटों की मानसिक सतर्कता और निर्णय क्षमता यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। यदि कोई पायलट नशे या प्रतिबंधित दवाओं के प्रभाव में विमान उड़ाए तो गंभीर हादसा हो सकता है। इसी कारण कई देशों में पायलटों की नियमित और रैंडम ड्रग जांच होती है।
इसी तरह सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में भी डोप टेस्ट का उपयोग अनुशासन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। हथियारों और संवेदनशील जिम्मेदारियों वाले पदों पर नशे की स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है।
किन क्षेत्रों में डोप/ड्रग टेस्ट आम हैं?
यदि जांच में प्रतिबंधित पदार्थ मिलने की पुष्टि हो जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
खिलाड़ियों के मामले में
अन्य पेशों में
हां, कुछ सामान्य दवाओं में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो डोप टेस्ट में प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं। इसलिए पेशेवर खिलाड़ियों को बिना सलाह के कोई भी दवा लेने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सीय उपयोग छूट (Therapeutic Use Exemption - TUE) भी ली जा सकती है।