
भारत में 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। यदि यह व्यवस्था 2029 के आम चुनाव से लागू होती है, तो संसद की तस्वीर पहले से काफी अलग दिख सकती है।
कानून के अनुसार लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा की लगभग एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षित सीटों के भीतर भी लागू होगा।
संसद में कितनी सीटें महिलाओं के लिए जा सकती हैं? : मौजूदा लोकसभा 543 सीटें हैं। इसके हिसाब से 543 में से 33 प्रतिशत सीटें अगर आरक्षित होती हैं तो आरक्षित सीटों की संख्या लगभग 181 हो जाएगी।
आज लोकसभा में महिलाओं की संख्या करीब 75-80 के आसपास है, जबकि आरक्षण लागू होने पर यह संख्या 180 से अधिक हो सकती है। यानी महिला सांसदों की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी।
2026 में सरकार द्वारा पेश किए गए प्रस्तावों में लोकसभा की सीटें बढ़ाने की चर्चा हुई थी। कुछ प्रस्तावों के अनुसार लोकसभा की संख्या 800 से अधिक हो सकती है, जिसमें लगभग 270 से ज्यादा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। हालांकि यह अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है।
यही इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कानून कहता है कि महिला आरक्षण सीधे लागू नहीं होगा। इसके लिए पहले:
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का पुनर्निर्धारण। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि हर सांसद लगभग समान आबादी का प्रतिनिधित्व करे।
विपक्षी दलों का कहना था कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण इसके लागू होने में देरी हो सकती है। वहीं सरकार का तर्क था कि सीटों का आरक्षण वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से तय करने के लिए परिसीमन जरूरी है।
संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी : महिलाओं की संख्या वर्तमान स्तर से काफी बढ़ जाएगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
राजनीतिक दलों की रणनीति बदलेगी : पार्टियों को बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार तैयार करने होंगे। टिकट वितरण का पूरा गणित बदल सकता है।
कई मौजूदा सीटों का स्वरूप बदलेगा : जो सीटें महिला आरक्षित घोषित होंगी, वहां पुरुष नेताओं को दूसरी सीट तलाशनी पड़ सकती है।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक जगह मिल सकती है : शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, रोजगार और लैंगिक समानता जैसे विषय संसद में ज्यादा प्रमुखता से उठ सकते हैं।
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| आरक्षण कितना? | 33% |
| किन सदनों में? | लोकसभा, विधानसभा और दिल्ली विधानसभा |
| SC/ST सीटों पर भी लागू? | हां |
| कब लागू होगा? | जनगणना और परिसीमन के बाद |
| 543 सीटों वाली लोकसभा में कितनी महिला सीटें? | लगभग 181 |
| आरक्षण कितने समय के लिए? | शुरुआती तौर पर 15 वर्ष (आगे संसद बढ़ा सकती है) |
यदि महिला आरक्षण 2029 से लागू होता है, तो भारतीय संसद में महिलाओं की उपस्थिति ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच सकती है। लेकिन इसकी असली कुंजी जनगणना और परिसीमन हैं, क्योंकि इन्हीं के बाद तय होगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और नई राजनीतिक तस्वीर कैसी दिखेगी।