Innovation Time: रायपुर के ट्रिपलआईटी नवा रायपुर के रिसर्चर मयंक लौवंशी ने ऐसा एआई सिस्टम विकसित किया है, जो चेहरे के भाव और शरीर की गतिविधियों के जरिए व्यक्ति के व्यवहार को समझकर संभावित स्थिति का विश्लेषण कर सकता है।
Innovation Time: ताबीर हुसैन. छत्तीसगढ़ के रायपुर टेक्नोलॉजी अब सिर्फ देखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इंसान के हाव-भाव समझने लगी है। ट्रिपलआईटी नवा रायपुर के रिसर्चर मयंक लौवंशी ने ऐसा एआई सिस्टम विकसित किया है जो चेहरे के भाव और शरीर की गतिविधियों को पहचानकर व्यक्ति के व्यवहार का विश्लेषण करता है।
यह तकनीक अस्पताल, इंडस्ट्री और पब्लिक प्लेस में सुरक्षा और निगरानी को नई दिशा दे सकती है। लौवंशी कहते हैं, यह शोध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और कंप्यूटर विजन के संयोजन का उदाहरण है। यह तकनीक भविष्य में स्मार्ट और सुरक्षित सिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यह सिस्टम एक स्मार्ट कैमरे की तरह काम करता है, जो केवल वीडियो रिकॉर्ड नहीं करता बल्कि उसे समझता भी है। कैमरा किसी व्यक्ति की गतिविधियों को कैप्चर करता है, इसके बाद एआई चेहरे और सीसीटीवी दोनों में उपयोग किया जा सकता है।
मोबाइल में यह ऐप के रूप में काम कर सकता है, जबकि सीसीटीवी के साथ यह और प्रभावी होता है, जहां लाइव वीडियो को सर्वर या क्लाउड पर प्रोसेस कर तुरंत अलर्ट दिया जा सकता है। के भाव जैसे खुशी, गुस्सा या दर्द और शरीर की हरकतों को पहचानता है। इन संकेतों का विश्लेषण कर सिस्टम यह अनुमान लगाता है कि व्यक्ति क्या कर रहा है या आगे क्या कर सकता है।
नियंत्रित वातावरण में यह सिस्टम 90 से 95 प्रतिशत तक सटीक परिणाम देता है, जबकि वास्तविक परिस्थितियों में इसकी सटीकता 75 से 90 प्रतिशत तक रहती है। कैमरे की क्वालिटी, रोशनी और एंगल जैसे कारक इसके प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। यह तकनीक अस्पतालों में मरीजों की निगरानी के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है।
मरीज के गिरने की आशंका, असामान्य गतिविधि या दर्द और तनाव जैसे संकेतों को पहचानकर यह तुरंत अलर्ट दे सकती है, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सके।
इंडस्ट्री में यह कर्मचारियों की थकान और सुरक्षा पर नजर रखने में सहायक हो सकती है। वहीं, पब्लिक प्लेस में यह संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकती है।