रायपुर

Raipur News: सीवरेज में तीन मौतों से गम और गुस्सा, कहीं 4 महीने का मासूम अनाथ हुआ, तो कहीं सालभर में उठी दूसरी अर्थी

Raipur News: सिमरन सिटी और भाटागांव की गलियों में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां थीं। रामकृष्ण केयर अस्पताल से निकली जहरीली गैस ने सिर्फ सांसें नहीं छीनीं बल्कि उन सपनों को भी तोड़ दिया जो इन परिवारों ने सालों से सहेजकर रखे थे।

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Mar 19, 2026
परिजनों में पसरा मातम (Photo Patrika)

Raipur News: @ Tabeer Hussain। राजधानी में बुधवार की सुबह उजाला तो था लेकिन सिमरन सिटी और भाटागांव की गलियों में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां थीं। रामकृष्ण केयर अस्पताल से निकली जहरीली गैस ने सिर्फ सांसें नहीं छीनीं बल्कि उन सपनों को भी तोड़ दिया जो इन परिवारों ने सालों से सहेजकर रखे थे। भाटागांव की पीली बिल्डिंग में दरवाजे खुले हैं, लेकिन उम्मीदें बंद हो चुकी हैं। किसी की गोद उजड़ गई, तो किसी मां का आखिरी सहारा छिन गया। यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि उन रिश्तों, उम्मीदों और जिंदगियों का दर्दनाक अंत है जिनकी भरपाई अब शायद कभी नहीं हो पाएगी।

एक परिवार जो बार-बार उजड़ा

सिमरन सिटी निवासी गोविंद सेंद्रे के घर का मंजर देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। कुछ ही महीने बीते थे जब इस परिवार ने अपने छोटे भाई को खोया था और अब घर का बड़ा स्तंभ गोविंद भी ढह गया।

अधूरे सपने

स्कूल में पढ़ रही दो मासूम बेटियां और बुजुर्ग मां का चेहरा देखकर हर कोई सुबक रहा है। पत्नी और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में एक जख्म भरा भी नहीं था, वहां अस्पताल की लापरवाही ने एक और गहरा घाव दे दिया।

4 महीने के बच्चे के सिर से उठा पिता का साया

पीली बिल्डिंग (नैचुरल सिटी) में सबसे ज्यादा कलेजा तब फटने लगा जब लोगों ने अनमोल के 4 महीने के मासूम बेटे को देखा।

मार्मिक दृश्य

शादी के चार साल लंबे इंतजार के बाद घर में किलकारी गूंजी थी, लेकिन उस नन्ही जान को क्या पता कि जिस पिता की अंगुली थामकर उसे चलना था वो अब कभी नहीं लौटेंगे। दादी की गोद में खेलता वो बच्चा और पथराई आंखों वाली उसकी मां मोहल्ले वालों की जुबान पर बस एक ही सवाल है, हे ईश्वर! इस मासूम ने तेरा क्या बिगाड़ा था जो इसके सिर से पिता का साया छीन लिया।

मां का आखिरी सहारा भी छीन लिया

पीली बिल्डिंग के ही किराए के मकान में रहने वाले प्रशांत की मां के जीवन में ऐसा सूनापन आ गया जो अब कभी नहीं भरेगा। प्रशांत अपनी मां और काम से मतलब रखता था।

दोहरी मार

महज एक साल पहले ही प्रशांत के सिर से पिता का साया उठा था। सालभर के भीतर इस घर से दूसरी अर्थी निकली है। दो भाई शादीशुदा हैं जो अलग रहते हैं। ऐसे में मां का इकलौता सहारा प्रशांत ही था। अब उस मां के पास किराए के मकान की तन्हाई और बेटे की यादों के सिवा कुछ नहीं बचा।

सामूहिक लाशों से श्मशान में सन्नाटा

बूढ़ापारा स्थित मारवाड़ी श्मशान घाट में उस समय सन्नाटा छा गया जब तीनों का एक साथ दाह संस्कार किया गया। लपटें तो अलग-अलग उठीं, लेकिन दर्द एक ही था। वहां मौजूद किसी के पास शब्द नहीं थे सिर्फ खामोशी थी।

Updated on:
19 Mar 2026 12:13 pm
Published on:
19 Mar 2026 12:11 pm
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