CG News: छत्तीसगढ़ के रायपुर राज्य में नक्सलियों के सफाए के बाद भी राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान यथावत अपने मोर्चे पर तैनात रहेंगे।
CG News: छत्तीसगढ़ के रायपुर राज्य में नक्सलियों के सफाए के बाद भी राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान यथावत अपने मोर्चे पर तैनात रहेंगे। 31 मार्च 2026 के बाद उनके मूवमेंट और डिप्लॉयमेंट पर विचार किया जाएगा। उनकी सुरक्षा में प्रभावित इलाकों में विकास कार्यो और शांति बनाए रखने के लिए फोर्स को रखा जाएगा।
राज्य पुलिस और नक्सल मोर्चे पर के आलाधिकारियों ने बताया कि दक्षिण बस्तर में अभी भी कुछ गिनती के नक्सली बचे हुए है। इसे देखते हुए नक्सल मुक्त हो चुके क्षेत्रों के जवानों को प्रभावित इलाकों में भेजा गया है, ताकि पूरे क्षेत्र में को नक्सल मुक्त कराया जा सकें। बता दें कि 2025 में 257 नक्सली मारे गए, 861 गिरफ्तार हुए और 1500 से ज्यादा सरेंडर कर चुके है। वहीं, अब भी लगातार सरेंडर करने के साथ ही मुठभेड़ में नक्सलियों को मार गिराया जा रहा है।
नक्सलियों द्वारा बिछाए गए लैंडमाइंस को डिफ्यूज करने के साथ ही उन्हें निकाला जा रहा है। पिछले दो साल में करीब 400 लैंडमाइंस को निकालने के साथ ही 200 से ज्यादा को डिफ्यूज किया गया है। वहीं, अब भी बीडीएस टीम सुरक्षा बलों के साथ लैंडमाइंस की तलाश कर रही है।
इसे फोर्स का रास्ता रोकने के लिए जमीन के नीचे इसे लगाया गया है, ताकि मुठभेड़ और रोड ओपङ्क्षनग के दौरान इसका उपयोग किया जा सकें। लेकिन फोर्स की तगडी़ घेराबंदी के चलते 90 फीसदी से ज्यादा नक्सली सरेंडर, गिरफ्तार और मारे जा चुके है। वहीं, करीब अब भी सक्रिय करीब 150 नक्सली मारे और पकड़े जाने के डर से सुरक्षित इलाके की तलाश में भाग रहे हैं।
नक्सल से निपटने के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के करीब 90 हजार जवानों को तैनात किया गया है। इसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, सीएएफ, डीएफ, डीआरजी, एसएसबी और सीआईएसएफ के जवान शामिल है। वहीं, एयरफोर्स को सहायता के लिए लगाया गया है। उक्त जवानों के अदम्य शौर्य और साहस के चलते नक्सलियों के कुनबे का सफाया हो चुका है।
हालांकि कुछ बचे हुए नक्सलियों को समेटने की कवायद चल रही है। बस्तर से लेकर गरियाबंद, राजनांदगांव और राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों को पूरी तरह से नक्सल मुक्त कराया जा चुका है। इसे देखते हुए अब फोर्स के बेहतर उपयोग को लेकर भी विचार किया जाएगा। इसके लिए राज्य पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल, आईबी और स्थानीय अधिकारियों की सलाह ली जाएगी। इसके आधार पर उच्चस्तर पर विचार-विमर्श तक अन्य क्षेत्रों में जवानों को भेजा जा सकता है।