
फोटो-आरटी-2404-जर्जर होकर छत टूटने के कगार पर
फोटो-आरटी-2405-इलाज के पूर्व गंदगी से निकलने की मजबूरी
Bरीडर्स कनेक्ट का लोगो रहेगाB
जोड़ आएगा खबर में मरीज के वर्जन का
सैलाना। विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्थाएं अब मरीजों की जान पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं। जिस अस्पताल पर हजारों लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है, वहीं अस्पताल जर्जर भवन, दवाइयों की कमी, चिकित्सा उपकरणों के अभाव, डॉक्टरों की अनुपलब्धता और गंदगी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि स्थानीय लोग इसे सिर्फ नाम का अस्पताल कहने लगे हैं।
जर्जर भवन बना खतरा
अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग का वार्ड तक जाने वाला गलियारा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। छत और दीवारों में गहरी दरारें हैं, कई जगह सरिए बाहर निकल आए हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और बरामदों में जलभराव हो जाता है। ऐसे में मरीजों और परिजनों की सुरक्षा भी खतरे में बनी रहती है। वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस मरम्मत कार्य नहीं कराया गया।
जरूरी दवाइयां और मशीनें गायब
अस्पताल में कई आवश्यक दवाइयां और चिकित्सा संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों का कहना है कि इलाज के बावजूद उन्हें दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है, जिससे कुत्ते के काटने वाले मरीजों को रतलाम जाना पड़ता है। ईसीजी मशीन करीब एक वर्ष से बंद है। टिटनेस (टीटी) इंजेक्शन भी लंबे समय से उपलब्ध नहीं है। एक्स-रे की फिल्म मरीजों को नहीं मिल रही। जांच रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। डॉक्टरों और एंबुलेंस की कमी से गंभीर मरीजों को निजी वाहनों से जिला अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
गंदगी और कीचड़ से बढ़ रही परेशानी
अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। बरसात में लैब तक जाने वाला रास्ता कीचड़ से भर जाता है। मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कुछ माह पहले जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा ने अस्पताल का निरीक्षण कर सफाई और गाजर घास हटाने के निर्देश दिए थे। शुरुआती कार्रवाई के बाद फिर से हालात पहले जैसे हो गए। नई बिल्डिंग के पास संचालित लैब तक पहुंचने के लिए मरीजों को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। वहीं अधिकारियों के कक्ष पहली मंजिल पर होने के कारण बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर मरीजों को सीढ़ियां चढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं
बीएमओ डॉ. शैलेश डांगे के अनुसार जिले में ही एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए अस्पताल को भी इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिले में दवाइयों की सीमित आपूर्ति के कारण कई आवश्यक संसाधनों का अभाव बना हुआ है।