
Sawan Shivling Jalabhishek:सावन माह में वातावरण शिवमय हो जाता है। मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन में शिवलिंग पर जल ही क्यों चढ़ाया जाता है? और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है? हम सावन के इन 30 दिनों में महादेव से जुड़ी रोचक कथाओं, मान्यताओं और परंपराओं से रूबरू कराएंगे। सावन माह में श्रद्धालु शिव भक्ति में लीन है। मंदिरों में जलाभिषेक और रूद्राभिषेक हो रहे हैं। पत्रिका में भोलेनाथ से जुड़ी रोचक कथाओं और मान्यताओं से पाठको का साक्षात्कार करवा रहे हैं।
आचार्य राजेश शर्मा बताते है कि भारतीय वैदिक परम्परा के अनुसार सावन मास में भगवान शिव जी की आराधना और आध्यात्मिक शुद्धि का सबसे पवित्र महीना माना जाता हैं। स्कंद पुराण के अनुसार द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो में तिवल्लभः बारह महीनों में एक सावन भगवान महादेव को सबसे अधिक प्रिय हैं। इस मास में की गई पूजा साधना का अनन्त गुना फल मिलता हैं। संसार की रक्षा के लिए भगवान महादेव ने हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया तभी से भगवान का एक नाम नीलकंठ महादेव हैं। उनके विष के प्रभाव को शान्त करने के लिए देवी देवताओं ने उनका जल से अभिषेक किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल और बिलपत्र चढ़ाने की परम्परा शुरू हुई।
श्रावण मास में पारद शिवलिंग का खास महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, पारद शिवलिंग को रस शिवलिंग भी कहा जाता है। पारद शिवलिंग की पूजा करने से चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त होता है। लंकाधिपति रावण भी प्रतिदिन पारद शिवलिंग की पूजा अर्चना करते थे। इसके दर्शन पूजन करने से द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन करने का पुण्य फल प्राप्त होता है।
5 अगस्त: शीतला सप्तमी
6 अगस्त: मंगला गौरी व्रत
9 अगस्त: कामदा एकादशी
10 अगस्त: दूसरा सावन सोमवार
12 अगस्त: हरियाली अमावस्या
15 अगस्त: हरियाली तीज
17 अगस्त: नाग पंचमी
17 अगस्त: तीसरा सावन सोमवार
23 अगस्त: पुत्रदा एकादशी
24 अगस्त: चौथा सावन सोमवार
28 अगस्त: सावन पूर्णिमा व रक्षाबंधन