
राजस्थान के अनूपगढ़ और घड़साना क्षेत्र में सिंचाई पानी की नियमित व्यवस्था को लेकर किसानों का आक्रोश अब उग्र रूप लेता जा रहा है। रबी फसलों की बुवाई और पकाव के लिए पानी सुनिश्चित करने की मांग को लेकर किसानों ने नेशनल हाईवे नंबर 911 पर 12 एमडी टोल नाके के पास पक्का मोर्चा खोल रखा है, जहां पिछले दो दिनों से लगातार चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन जारी है। इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी धरने पर डटे रहे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर चली लंबी बैठकों और वार्ताओं के बेनतीजा रहने के बाद उनका वहां से रवाना होना एक बड़ा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
रविवार शाम को प्रशासन की ओर से मिले न्योते के बाद खेत बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति की कोर कमेटी के 15 सदस्यों ने अनूपगढ़ पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की। इस दौरान जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अमरजीत मेहरड़ा से दूरभाष पर भी संपर्क किया गया, लेकिन पानी की बारी और रेगुलेशन के फार्मूले पर सहमति नहीं बन पाई। रात करीब 10:45 बजे तक चली यह महत्वपूर्ण वार्ता पूरी तरह विफल रही, जिसके बाद किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी और अधिक बढ़ गई है।
किसानों और सिंचाई विभाग के बीच मुख्य विवाद पानी की बारी और रेगुलेशन को लेकर बना हुआ है। किसान लगातार यह मांग कर रहे हैं कि रबी की फसल की बुवाई और उसके पकाव तक खेतों को पर्याप्त पानी मिलना चाहिए। इसके लिए वे छह बारी पानी देने के साथ-साथ जनवरी महीने में स्थिति की समीक्षा करने के बाद दो अतिरिक्त बारी पानी देने का निर्णय करने की मांग पर अड़े हैं।
दूसरी ओर, सिंचाई विभाग अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत केवल पांच बारी पानी का रेगुलेशन जारी करने और जनवरी में समीक्षा के बाद केवल एक अतिरिक्त बारी पानी देने का आश्वासन दे रहा है। किसानों का साफ कहना है कि फसल की वास्तविक जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति पहले से तय होनी चाहिए, ताकि उनकी मेहनत और उत्पादन पर कोई संकट न आए। दोनों पक्षों के प्रस्तावों में बड़ा अंतर होने के कारण यह गतिरोध लगातार बना हुआ है।
धरना स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि घड़साना और रावला क्षेत्र के किसान पिछले पच्चीस सालों से अपने हक के पानी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की हठधर्मिता के कारण किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल मौखिक आश्वासनों से किसान संतुष्ट होने वाले नहीं हैं, जब तक नहरों में पानी की नियमित बारी का ठोस समाधान नहीं होता, यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
हालांकि, वार्ता विफल होने के बाद हनुमान बेनीवाल अपने काफिले के साथ नागौर के लिए रवाना हो गए। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चूंकि पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन दाखिल करने में अब केवल दो दिन का समय शेष बचा है, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए चुनावी जिम्मेदारियों के तहत लौटना पड़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनावी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वे दो दिन बाद फिर से किसानों के बीच लौटेंगे और संघर्ष समिति के साथ मिलकर इस आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।
इस बड़े किसान आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे नंबर 911 पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। अनूपगढ़ से घड़साना, खाजूवाला और बीकानेर जाने वाले मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद होने के कारण रोडवेज और निजी बसों का संचालन ठप हो गया है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अनूपगढ़ आगार के लगभग साठ प्रतिशत रूट इस आंदोलन से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ डिपो से चलने वाली बसें आगे रास्ता बंद होने के कारण बीच रास्ते से ही वापस लौटने को मजबूर हैं। सड़क के दोनों तरफ व्यावसायिक और निजी वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग चुकी हैं, जिससे दैनिक यात्रियों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
धरना स्थल पर किसानों का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों के अनुरूप अनूपगढ़ शाखा में पानी का सुचारू प्रवाह शुरू नहीं किया, तो वे आक्रामक कदम उठाते हुए 'बिरधवाल हेड' पर कब्जा कर लेंगे।
इस आंदोलन को स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए विभिन्न गुरुद्वारों की तरफ से लगातार लंगर की व्यवस्था की जा रही है। किसान नेता नरेंद्र मान, राजेश पूनियां, मांगीलाल देहडू, मीरज निठारवाल और मनफूल जाखड़ सहित कई प्रमुख नेता आंदोलन की अगली रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं। प्रशासन और किसानों के बीच चल रहे इस गतिरोध के कारण आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने के पूरे आसार बने हुए हैं।