
Amit Kashyap Murder: अमित कश्यप हत्याकांड में दोषी ठहराई गई रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। फैसला आने से पहले दोनों ने अदालत के सामने अपने परिवार की दुहाई दी। रविता ने तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी का हवाला दिया, तो अमरदीप ने बूढ़े मां-बाप की देखभाल की बात कही। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को मौत की सजा सुना दी। फैसला सुनते ही दोनों दोषी फूट-फूटकर रोने लगे।
सजा के ऐलान से पहले शुक्रवार को कोर्ट में आखिरी दलीलें हुईं। जेल में बंद रविता और अमरदीप को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश किया गया। जज ने दोनों से पूछा, "तुम दोनों को हत्या का दोषी ठहराया गया है। क्या सजा चाहते हो?"सवाल सुनकर रविता कुछ देर खामोश रही। फिर भरी आवाज में बोली कि मेरे 3 छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनका ख्याल रखा जाए। इतना कहकर वह चुप हो गई।
अमरदीप ने भी अपनी सजा पर कुछ नहीं कहा। उसने सिर्फ इतना कहा, "मेरे मां-बाप बूढ़े हैं। उनकी सेवा करने वाला कोई नहीं है। उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।"दोनों की बात खत्म होते ही वे फूट-फूटकर रोने लगे। अदालत में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। इसके बाद कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।
13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित का शव उसके घर में चारपाई पर मिला था। उसके शरीर पर सांप के डसने के निशान थे और शव के नीचे एक जिंदा सांप दबा हुआ था। परिजनों को भी शुरुआत में लगा कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है। सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद कर दिया गया और अमित को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की असली वजह सर्पदंश के बजाय दम घुटना (दम घुटने से मौत) निकलकर आई। अमित के भाई मोनू कश्यप ने उसकी पत्नी रविता और अमरदीप के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर रविता और अमरदीप को गिरफ्तार कर लिया था।
हत्या के 60 दिन बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। एसीजेएम-12 जयवीर सिंह नागर की कोर्ट में 551 दिन चली सुनवाई के दौरान 87 तारीखें लगीं और 12 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज हुए। 7 अक्टूबर को कोर्ट ने रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा सुनाई गई।